Category: भारतीय इतिहास

1857 के बाद उपनिवेशवाद तथा प्रशासनिक व्यवस्था का विकास

कंपनी की आर्थिक और प्रशासनिक नीतियों ने समाज के सभी वर्गों में व्यापक असंतोष उत्पन्न कर दिया। यही असंतोष अन्य […]...

1857 से पूर्व उपनिवेशवाद तथा प्रशासनिक व्यवस्था का विकास

मुगलों ने भारत में प्रशासन का केंद्रीकृत रूप स्थापित किया था। उनकी प्रशासनिक व्यवस्था के सभी विभागों में व्यक्तित्व प्रमुख […]...

उन्नीसवीं शताब्दी में राष्ट्रीय चेतना का उद्भव और विकास

इसको पढ़ने के बाद आपः यह जान पाएँगे कि औपनिवेशि शासाने भारतीय जनता के विभिन्न वर्गों को किस प्रकार प्रभावित […]...

साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद : सैद्धान्तिक परिप्रेक्ष्य

इसमें साम्राज्यवाद तथा उपनिवेशवाद के स्वरूप पर विस्तृत चर्चा प्रस्तुत की गयी है। साथ ही यह प्रयत्न किया गया है […]...

असम आंदोलन का संक्षिप्त वर्णन : 1985 के असम समझौते के रूप में निष्कर्ष

प्रश्न: असम आंदोलन को आकार देने वाले मुद्दों की व्याख्या कीजिए। इस संदर्भ में, 1985 के असम समझौते के महत्व […]...

वर्नाकुलर प्रेस (भारतीय भाषा समाचार पत्र) के बारे में संक्षिप्त परिचय : भारतीय स्वतंत्रता संघर्ष के दौरान वर्नाकुलर प्रेस द्वारा अनुभव की जाने वाली समस्याओं और इसके दमन के प्रयास

प्रश्न: भले ही अंग्रेजों ने प्रत्येक संभाव्य अवसर पर इसके दमन का प्रयत्न किया, फिर भी वर्नाकुलर प्रेस (भारतीय भाषा […]...

भारत में राजनीतिक शक्ति के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी (EIC) के उदय की संक्षिप्त पृष्ठभूमि

प्रश्न: एक राजनैतिक शक्ति के रूप में ईस्ट इंडिया कंपनी काफी लंबे समय से मृत थी, 1858 के अधिनियम ने […]...

मुगल साम्राज्य के पतन का वर्णन : मराठाओं की विफलता के लिए उत्तरदायी कारण

प्रश्न: मराठे कई कारणों से मुगल साम्राज्य के पतन से निर्मित राजनीतिक निर्वात को भरने में विफल रहे। चर्चा कीजिए। […]...