युवाओं द्वारा आत्महत्या के पीछे उत्तरदायी कारक : इस समस्या से निपटने हेतु उपाय

प्रश्न: युवाओं द्वारा आत्महत्या भारत में चिंता का एक विषय बना हुआ है। इसके पीछे उत्तरदायी कारणों पर प्रकाश डालिए और चर्चा कीजिए कि इस समस्या का समाधान कैसे किया जा सकता है

दृष्टिकोण

  • भारत में आत्महत्या करने वाले युवाओं की बढ़ती संख्या के संबंध में संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  • युवाओं द्वारा आत्महत्या के पीछे उत्तरदायी कारकों की चर्चा कीजिए।
  • इस समस्या से निपटने हेतु उपायों का सुझाव दीजिए।

उत्तर

आत्महत्या वस्तुतः जानबूझकर अपने जीवन को समाप्त करने हेतु किया गया एक कृत्य है। नेशनल हेल्थ प्रोफाइल, 2018 के अनुसार, भारत में 33% आत्महत्याएं (कुल संख्या का) युवाओं द्वारा की गयी हैं। यह युवाओं की कमजोरियों को रेखांकित करती है और यह बहुमूल्य मानव जीवन की क्षति का प्रमुख कारण भी है। ग्लोबल बर्डन ऑफ़ डिसीजीज, इंजरीज एंड रिस्क फैक्टर्स (GBD 2016) के अनुसार भारत में स्त्री एवं पुरुषों दोनों के संदर्भ में, वर्ष 2016 में 15-39 आयु वर्ग में हुई मृत्यु हेतु आत्महत्या एक प्रमुख कारण थी।

कारण:

  • सामाजिक-सांस्कृतिक कारक एवं परिवार की प्रकृति में सामाजिक रूपांतरण युवा गृहिणियों द्वारा की जाने वाली आत्महत्या का एक प्रमुख कारण है।
  • चूंकि युवा अधिक प्रगतिवादी होते हैं, जिस कारण उन्हें अपने द्वारा चयनित विकल्पों के लिए परंपरागत परिवारों से कम समर्थन प्राप्त होता है, फलस्वरूप परिवार में मूल्यों का संघर्ष उत्पन्न हो जाता है।
  • सामाजिक भेदभाव एवं बहिष्करण तथा मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों से निपटने हेतु उपयुक्त चिकित्सा प्रणाली का अभाव।
  • समुदाय आधारित मानसिक स्वास्थ्य सुविधाओं में निवेश का अभाव तथा आत्महत्या की रोकथाम संबंधी रणनीतियों की अनुपस्थिति।
  • अकादमिक उपलब्धियों के लिए माता-पिता की अति अपेक्षाएं तथा उच्च वेतन वाली नौकरियों हेतु अत्यधिक प्रतिस्पर्धा और निम्नस्तरीय प्रदर्शन करने पर आलोचना का सामना करना।
  • तीव्र नगरीकरण एवं परंपरागत संयुक्त परिवार समर्थन व्यवस्था का समाप्त होना। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की मेन्टल हेल्थ एटलस, 2017 ने आत्महत्या के प्रमुख कारण के रूप में मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों का समाधान करने वाले प्रशिक्षित कर्मियों की कमी को रेखांकित किया है।
  • युवाओं में साइबर-आत्महत्या की अवधारणा का विकास तथा इंटरनेट के उचित प्रयोग हेतु जागरूकता का अभाव।

इस समस्या से निपटने हेतु उठाए जाने वाले कदम

  • एक बच्चे के समग्र विकास हेतु शिक्षा व्यवस्था में पुनःसुधार करना तथा उनमें इंटरनेट के अनुपयुक्त प्रयोग के संभावी खतरों के बारे में जागरूकता उत्पन्न करना।
  • प्रारंभिक अवस्था से ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी शिक्षा प्रदान करना एवं इसके लक्षणों से निपटने हेतु आवश्यक संसाधनों के बारे में शिक्षित एवं प्रोत्साहित करना।
  • परिवार और दोस्तों द्वारा व्यक्ति में डिप्रेशन के आरंभिक संकेतों के प्रति सतर्क रहने, उन्हें गंभीरता पूर्वक समझने और अनिवार्य सहायता प्रदान करने की आवश्यकता है।
  • आत्महत्या रोकथाम क्लीनिकों की स्थापना करना एवं मानसिक स्वास्थ्य संबंधी मुद्दों के समाधान हेतु प्रशिक्षित कर्मियों की उपलब्धता सुनिश्चित करना।
  • आत्महत्या के साधनों तक पहुंच को सीमित करना जिसमें कीटनाशकों, दवाओं आदि की उपलब्धता को नियंत्रित करने के उपाय सम्मिलित हैं।
  • नीति निर्माताओं द्वारा ऐसी उचित नीतियों को निर्मित करने की आवश्यकता है जो युवाओं में तनाव से संबंधित समस्या का समाधान कर सके, न कि मानसिक स्वास्थ्य एवं अन्य सामाजिक मुद्दों को कलंकित कर उन्हें और अधिक गंभीर बनाए।

अतः मानव जीवन के सभी पहलुओं को कवर करने वाले एक बहुपक्षीय दृष्टिकोण की आवश्यकता है। हाल ही में अधिनियमित मानसिक स्वास्थ्य देखभाल अधिनियम, 2017 द्वारा आत्महत्या को गैर-आपराधिक कृत्य घोषित कर दिया गया है, जो सही दिशा में उठाया गया एक उपयुक्त कदम है। इसके अतिरिक्त. समस्या का समाधान करने हेतु जागरूकता और अवसंरचना निर्माण पर अधिक बल देने की आवश्यकता है।

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