विजयनगर साम्राज्य के संबंध में जानकारी के मुख्य स्रोत

प्रश्न: उन अभिलेखों और स्मारकों का विवरण प्रदान कीजिए जो विजयनगर साम्राज्य के संबंध में जानकारी के मुख्य स्रोत हैं। इस संदर्भ में, विजयनगर मंदिर स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं पर भी प्रकाश डालिए।

दृष्टिकोण

  • चर्चा कीजिए कि किस प्रकार अभिलेखों और स्मारकों ने विजयनगर साम्राज्य के संबंध में जानकारी प्रदान करने में सहायता की।
  • विजयनगर मंदिर स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं पर प्रकाश डालिए।

उत्तर

स्मारक जैसे पुरातात्विक स्रोत और अभिलेख जैसे साहित्यिक स्रोत विजयनगर साम्राज्य के इतिहास के पुनर्निर्माण हेतु सर्वाधिक प्रामाणिक स्रोत हैं।

अभिलेख: विजयनगर साम्राज्य से संबंधित लगभग सभी अभिलेख भू-राजस्व, भू-स्वामित्व के निर्धारण, राजस्व छूट, नए करों के आरोपण या कुछ अप्रचलित करों को पुनः प्रारंभ करने का उल्लेख करते हैं। इनमें मंदिरों, मठों और ब्राह्मणों के लिए सार्वजनिक या निजी प्रकृति के उपहारों और दान का वर्णन किया गया है। वे इस शासनकाल के शासकों, उनकी वंशावली, कालक्रम और उपलब्धियों का विवरण प्रदान करते हैं। उदाहरण के लिए, कृष्णदेव राय का हम्पी अभिलेख और देवराय द्वितीय का श्रीरंगम ताम्रपत्र अभिलेख।

स्मारक: विभिन्न स्मारक भी साम्राज्य की विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराने में सहायक हैं। उदाहरण के लिए: 

  • शाही केंद्र में स्थापित 60 से अधिक मंदिर शासकों के लिए मंदिरों और संप्रदायों के संरक्षण के महत्व को प्रदर्शित करते हैं।ये शासक गर्भगृहों में अधिष्ठापित देवी-देवताओं के साथ सम्बन्ध जोड़ कर अपनी सत्ता को स्थापित करने और वैध बनाने का प्रयास करते थे।
  • लोटस महल जो संभवतः एक सभा कक्ष था जहाँ राजा अपने सलाहकारों से वार्ता करते थे।
  • उपनगरीय बस्ती और साथ ही अद्वितीय हाइड्रोलिक तकनीकों से युक्त जलाशय विभिन्न नगरीय प्रणालियों की विशेषज्ञता के प्रमाण हैं।

मंदिर स्थापत्य: मंदिर निर्माण विशेष रूप से द्रविड़ स्थापत्य शैली में हुआ है, जैसे- विरुपाक्ष मंदिर और विट्ठल मन्दिर विजयनगर साम्राज्य के अंतर्गत विकसित हुए हैं। मंदिर स्थापत्य की प्रमुख विशेषताओं में निम्नलिखित शामिल हैं:

  • राय गोपुरम या शाही द्वार: ये अधिक दूरी से ही मंदिर की उपस्थिति का संकेत देने वाली विशाल संरचनाएँ थीं। इनका निर्माण राजा कृष्णदेव राय द्वारा प्रारंभ कराया गया था। ये गोपुरम राजाओं की शक्ति के संबंध में भी जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जो इस प्रकार के विशाल द्वार के निर्माण के लिए आवश्यक संसाधनों, तकनीकों और कौशल को नियंत्रित करने में सक्षम थे।
  • मंडप या पैविलियन और लंबे, स्तंभयुक्त गलियारे प्रायः मंदिर परिसर के भीतर गर्भगृह के आस-पास निर्मित किये जाते थे।
  • रथ पथ को शिलाखंडों से निर्मित किया जाता था और मंदिर के गोपुरम से एक सीधी रेखा में विस्तारित पैविलियन के साथ पंक्तिबद्ध स्तम्भों का निर्माण किया जाता था। रथ उत्सव के एक प्रमुख अनुष्ठान के रूप में स्थापित होने के बाद इस वास्तुकला का प्रारंभ किया गया था।
  • मंदिरों का दुर्गीकरण: मंदिरों की दीवार विगत काल के मंदिरों की तुलना में अधिक विशाल थी।
  • गुंबद के साथ-साथ रानी का स्नान घर (Queen’s Bath) और हाथी अस्तबल जैसी धर्मनिरपेक्ष इमारतों में इंडो-इस्लामिक वास्तुकला के तत्वों को अपनाया गया है।
  • नक्काशीदार स्तंभ, जिन पर घोड़ों (स्तंभ पर चित्रित सबसे सामान्य पशु) का चित्रण किया गया था। साथ ही दीवारों के बाहरी भागों पर सजावट इसकी प्रमुख विशेषता थी।
  • संगीत, नृत्य और नाटक आदि कार्यक्रमों के साक्षी के तौर पर देवताओं की प्रतिमाओं का अधिष्ठापन, देवताओं के विवाह के उत्सव आदि जैसे विभिन्न प्रयोजनों के लिए अलग-अलग कई विशाल कक्षों का निर्माण किया गया था।

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