स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में संक्षिप्त विवरण : शौचालय निर्माण पर बल दिए जाने और इस संबंध में अब तक प्राप्त सफलता

प्रश्न: शौचालयों का निर्माण स्वच्छ भारत के समाधान का केवल एक भाग है, अतः अब समय आ गया है कि स्वच्छ भारत मिशन अन्य पहलुओं पर भी अधिक बल दे। चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • स्वच्छ भारत मिशन के संबंध में संक्षिप्त विवरण दीजिए। 
  • शौचालय निर्माण पर बल दिए जाने और इस संबंध में अब तक प्राप्त सफलता की विवेचना कीजिए।
  • SBM में सम्मलित किये जाने वाले अन्य पहलुओं की व्याख्या कजिए। 
  • संक्षिप्त रूप से निष्कर्ष निकालिए।

उत्तर

स्वच्छ भारत मिशन (SBM) 2 अक्टूबर, 2019 तक सार्वभौमिक स्वच्छता आच्छादन प्राप्त करने हेतु वर्ष 2014 में आरंभ किया गया एक जन आन्दोलन है। इस मिशन में ग्रामीण और शहरी भारत, दोनों ही सम्मलित हैं और इसमें खुले में शौच को समाप्त करना, अस्वच्छ शौचालयों को फ्लश शौचालयों में बदलना, हाथों से मैला साफ़ करने की प्रथा को समाप्त करना, नगरपालिका के ठोस अपशिष्ट प्रबन्धन के साथ-साथ स्वस्थ स्वच्छता प्रथाओं के बारे में लोगों के व्यवहार में परिवर्तन लाना सम्मिलित है।

अक्टूबर 2014 से पूरे देश में 9.5 करोड़ शौचालय निर्मित हुए हैं और 564,658 गाँव खुले में शौच से मुक्त (ODF) घोषित किये गए हैं। वर्तमान में 30 राज्यों/संघ शासित प्रदेश 100% व्यक्तिगत घरेलू शौचालयों (IHHL) से युक्त हैं। राष्ट्रीय वार्षिक स्वच्छता सर्वेक्षण (NARSS) 2018-19 के आंकड़े दर्शाते हैं कि 93% ग्रामीण परिवारों को अब शौचालय तक पहुंच उपलब्ध है और 96% लोग इन शौचालयों का उपयोग करते हैं। इससे पता चलता है कि यह व्यवहार में परिवर्तन लाने में भी सक्षम रहा

SBM द्वारा उत्पन्न संवेग को बनाए रखने हेतु, स्वच्छ भारत के लिए इसमें अन्य पहलुओं (जैसे पर्यवरणीय और जल प्रबंधन संबंधी मुद्दों) का भी संयोजन किया जाना आवश्यक है:

  • ठोस और तरल अपशिष्ट प्रबन्धन: SBM को SLW के 100% निपटान पर ध्यान देना चाहिए। कचरे के सुरक्षित और प्रभावी निपटान के लिए वैज्ञानिक तकनीकें इस मिशन की कार्यसूची में होनी चाहिए।
  • उत्सर्जन का संधारणीय निपटान: अनुपचारित मल सामग्री पर्यावरण को क्षति पहुंचाता है। इसे विघटित करके रोगमुक्त करने की आवश्यकता है। मानव अपशिष्ट का उपयोग जैव-उर्वरक बनाने के लिए किया जा सकता है या इसे मीथेन में परिवर्तित करके तापन, प्रकाश और खाना पकाने के लिए उपयोग किया जा सकता है।
  • नदियों की सफाई: औद्योगिक अपशिष्टों का उपचार, नालियों का जैव-उपचार, सीवेज उपचार संयत्रों (STP) का निर्माण, नदी की सतह की सफाई, रिवर फ्रंट विकास आदि।
  • ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में जल निकायों को पूर्ववत बनाना: वाटर-शेड प्रबन्धन के माध्यम से मनुष्यों और पशुधन में कई रोगों को रोकने के लिए जल-निकायों में जल की गुणवत्ता को बहाल करने की आवश्यकता है। इसके अतिरिक्त वर्षा जल-संचयन को अपवाहित जल के सरंक्षण के लिए लोकप्रिय बनाया जाना चाहिए।
  • जलवायु परिवर्तन को भी कारक बनाना: जलवायु परिवर्तन के प्रभाव और चरम मौसमी घटनाओं के प्रभाव से जल उपलब्धता से सम्बन्धित मुद्दों के बढ़ने की सम्भावना है। संधारणीयता और पर्यावरण के अनुकूल स्वच्छता प्रौद्योगिकियों को अपनाने का सिद्धांत SBM में सम्मलित किया जाना चाहिए।
  • नियोजन में समानता: SC, ST समुदायों (जंगलों और अन्य दुर्गम स्थानों में रहने वाले) के निवास वाले खंडों पर SBM से सम्बन्धित विकास कार्यों में पर्याप्त ध्यान दिया जाना चाहिए, क्योंकि वे प्रायः नियोजन संबंधी कमियों के कारण पीछे छूट जाते हैं।

उपर्युक्त चिन्हित घटकों को SBM में सम्मलित करने से न केवल उस उद्देश्य तक पहुंचने में सहायता मिलेगी, बल्कि एक स्वच्छ, स्वस्थ और सुंदर भारत के निर्माण में भी मदद मिलेगी।

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