स्थलमंडलीय प्लेटों को संचलित करने वाले बल

प्रश्न: स्थलमंडलीय प्लेटों को संचलित करने वाले बल कौन-से हैं? इस संदर्भ में, उनके किनारे निर्मित अभिलाक्षणिक विशेषताओं के उपयुक्त उदाहरणों के साथ उनकी अंतरक्रिया की प्रकृति पर आधारित विभिन्न प्रकार की प्लेट सीमाओं की पहचान कीजिए।

दृष्टिकोण

  • प्लेट विवर्तनकी सिद्धांत और प्लेट संचलन के संबंध में एक संक्षिप्त अवधारणा प्रस्तुत करते हुए, इनको संचलित करने वाले बलों का विवरण दीजिए।
  • उनकी अंतरक्रिया की प्रकृति के आधार पर विभिन्न प्रकार की प्लेट सीमाओं को वर्गीकृत कीजिए, इन सीमाओं पर पाए जाने वाली भिन्न-भिन्न विशेषताओं से संबंधित उदाहरण प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर

विवर्तनिकी प्लेट, ठोस चट्टान का विशाल व अनियमित आकार का खंड है, जो सामान्यतः महाद्वीपीय और महासागरीय पर्पटी से मिलकर बना है। सर्वाधिक स्वीकृत प्लेट विवर्तनिक सिद्धांत के अनुसार, अतीत में ये प्लेटें परस्पर संचलन और अंतरक्रिया कर रही थीं और यह प्रक्रिया भविष्य में भी जारी रहेगी, जिसके परिणामस्वरूप नवीन स्थलीय और महासागरीय स्थलाकृतियों का निर्माण होगा।

विवर्तनिक प्लेट संचलन के कारण

पिघला हुआ मैग्मा अत्यधिक गहराई से ऊपर की ओर गति करता है और तत्पश्चात भू-पर्पटी के नीचे क्षैतिज रूप से प्रसारित हो जाता है। इस प्रसरण के दौरान यह इसके ऊपर स्थित प्लेटों को भी संचलित करता है। पिघला हुआ मैग्मा पुनः नीचे की ओर गतिमान होकर चक्रीय गति को पूर्ण करता है। स्थलमंडलीय प्लेटों के नीचे अवस्थित पिघला हुआ मैग्मा, इस क्षेत्र में रेडियोधर्मी क्षय के कारण उत्पन्न ऊष्मा और अत्यधिक गहराई से आनी वाली अवशिष्ट ऊष्मा के कारण सदैव पिघली अवस्था में बना रहता है।

  1. महाद्वीपीय क्रस्ट( continenetal crust)
  2. स्थलमण्डल( lithosphere)
  3. दुर्बलतामंडल(asthenosphere)
  4. पिघली अवस्था(melting)
  5. ज्वालामुखीय श्रृंखला( volcanic chain)
  6. अभिसरण( convergence)
  7. मैग्मा(magma)
  8. क्षेपण( subduction)
  9. खाई(trench)
  10. बेसाल्ट निर्मित महासागरीय क्रस्ट(oceanic crust (basalt)

प्लेटों को संचलित करने वाली निम्नलिखित दो मूलभूत प्रक्रियाएँ हैं:

  • रिज पुश (ridge push)
  • स्लैब पुल (slab pull)

रिज पुश, मध्य महासागरीय कटक के साथ दबावयुक्त संचलन होता है जहां मैग्मा स्थलमंडल में प्रवेश करने में सक्षम होता है और प्लेट को पार्श्व रूप से संचलित करता है।

स्लैब पुल, खाई या क्षेपण क्षेत्र के साथ घटित होता है, जहां नीचे स्थित प्लेट गुरुत्वाकर्षण के कारण नीचे धंसती है और क्रमशः ऊपर स्थित प्लेट को नीचे की ओर खींचती है।

पूर्व में, सूर्य और चंद्रमा के ज्वारीय बल को भी संचलन बल के रूप में जाना जाता था। हालांकि, उनके प्रभाव अभी तक सुस्पष्ट रूप से स्थापित नहीं हुए हैं।

अंतरक्रिया की प्रकृति के आधार पर विभिन्न प्रकार की प्लेट सीमाएं: प्लेट सीमाओं को उनके किनारों पर होने वाली अंतरक्रिया के आधार पर वर्गीकृत किया गया है, जैसे- महासागरीयमहासागरीय, महासागरीय-महाद्वीपीय और महाद्वीपीय-महाद्वीपीय। इन किनारों पर, प्लेटें अभिसारी, अपसारी (एक दूसरे से दूर) या समानांतर गति कर सकती हैं। इस प्रकार निम्नलिखित विभिन्न प्रकार की प्लेट सीमाओं की उत्पत्ति हो सकती है: 

  • अपसारी सीमा (Divergent boundaries) – इन सीमाओं पर, प्लेटें एक दूसरे से विपरीत दिशा में गति करती हैं और इन स्थानों पर नई पर्पटी का निर्माण होता है। अपसारी प्लेट का सबसे अच्छा उदाहरण मध्य-अटलांटिक कटक है। यहाँ से अमेरिकी प्लेटें (उत्तर अमेरिकी व दक्षिण अमेरिकी प्लेटें) तथा यूरेशियन व अफ्रीकी प्लेटें अलग हो रही हैं।
  • अभिसारी सीमा (Convergent Boundaries) – इन सीमाओं पर, एक प्लेट दूसरी प्लेट के नीचे धंसती है और भूपर्पटी नष्ट होती है। वह स्थान जहाँ प्लेट धंसती है, क्षेपण क्षेत्र (सबडक्शन जोन) कहलाता है। जब दो महासागरीय प्लेटें या एक महासागरीय व एक महाद्वीपीय प्लेट अभिसरित होती हैं, तब अपेक्षाकृत भारी एवं अधिक घनत्व वाली महासागरीय प्लेट का क्षेपण होता है, जिससे एक खाई (ट्रेंच) का निर्माण होता है। महाद्वीपीय-महाद्वीपीय प्लेटों के टकराव के मामले में, वलित पर्वत और पठारों का निर्माण होता है। इस प्रकार की सीमाओं पर अत्यधिक वलन और भ्रंशन तथा भूकंप की घटनाएं घटित होती हैं।
  • रूपांतर सीमा (Transform boundaries) – जहाँ पर न तो नई पर्पटी का निर्माण होता है और न ही पर्पटी विनाश, क्योंकि प्लेटें एक दूसरे के साथ-साथ क्षैतिज रूप से संचलन करती हैं। रूपांतर भ्रंश दो प्लेट को अलग करने वाले तल हैं जो सामान्यतः मध्य-महासागरीय कटकों से लंबवत स्थिति में पाए जाते हैं।

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