1. विभिन्न प्रकार की मिट्टियों की जलधारण क्षमता का घटता हुआ क्रम है-
(a) मृत्तिका > गाद > बालू
(b) मृत्तिका बालू > गाद
(c) बालू > गाद > मृत्तिका
(d) गाद बालू मृत्तिका
[R.O./A.R.O. (Pre) 2017]
उत्तर- (a) मृत्तिका > गाद > बालू
- विकल्प में दी गई मिट्टियों की जल-धारण क्षमता का घटता हुआ क्रम क्रमशः इस प्रकार है- मृत्तिका (Clay) गाद (Silt) > बालू (Sand)
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2. किस मिट्टी में केशिका (कैपिलरी) सबसे अधिक प्रभावशाली होती है?
(a) चिकनी मिट्टी
(b) पांशु मिट्टी
(c) बलुई मिट्टी
(d) लोम मिट्टी
[53to55th B.P.S.C. (Pre) 2011]
उत्तर- (a) चिकनी मिट्टी
- केशिका क्रिया चिकनी मिट्टी (Clay Soil) में सर्वाधिक प्रभावशाली होती है, जबकि बलुई मिट्टी में यह न्यूनतम होती है।
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3. मृदा संरक्षण वह प्रक्रम है, जिसमें-
(a) बंध्य मृदा उर्वर मृदा में परिवर्तित होती है।
(b) मृदा वर्तित होती है।
(c) मृदा अपरदन होता है।
(d) मृदा को नुकसान से सुरक्षित किया जाता है।
[39th B.P.S.C. (Pre) 1994]
उत्तर- (d) मृदा को नुकसान से सुरक्षित किया जाता है।
- वृहत अर्थ में मृदा संरक्षण (Soil Conservation) का अर्थ केवल अपरदन को नियंत्रित करना ही नहीं होता है, बल्कि इसका उद्देश्य भूमि की उच्चस्तरीय उर्वरता को बनाए रखना भी होता है।
- सामान्य अर्थ में भूमि उपयोग में सुधार ही मृदा संरक्षण कहलाता है।
- अतः विकल्प (d) सही उत्तर है।
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4. टेरारोसा का प्रारूपिक विकास उस भू-भाग में होता है, जिसमें-
(a) चूना पत्थर होता है।
(b) साइनाइट होता है।
(c) ग्रेनाइट होता है।
(d) बलुआ पत्थर होता है।
[39th B.P.S.C. (Pre) 1994]
उत्तर- (a) चूना पत्थर होता है।
- टेरारोसा एक प्रकार की लाल चिकनी मृदा है, जिसका निर्माण चूना पत्थर वाली चट्टानों के अपक्षय से होता है।
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5. मृदा विक्षालन बड़ी समस्या है-
(a) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन प्रदेशों में
(b) अफ्रीकी सवाना में
(c) भूमध्य सागरीय प्रदेशों में
(d) ऑस्ट्रेलियाई डाउन्स में
[U.P.P.C.S. (Pre) 1998]
उत्तर- (a) उष्णकटिबंधीय वर्षा वन प्रदेशों में
- वर्ष भर मूसलाधार वर्षा से विश्व के उष्णकटिबंधीय वर्षा वन प्रदेश मृदा विक्षालन की समस्या से जूझ रहे हैं।
- अतः विकल्प (a) सही उत्तर है।
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6. हैलोफाइट्स अच्छी वृद्धि करते हैं-
(a) अम्लीय मृदा में
(b) ठंडी मृदा में
(c) कैल्शियम युक्त मृदा में
(d) क्षारीय मिट्टी में
[M.P.P.C.S. (Pre) 2014]
उत्तर- (d) क्षारीय मिट्टी में
- हैलोफाइट्स क्षारीय/लवणीय मृदा में अच्छी वृद्धि करने वाली वनस्पतियां हैं।
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7. निम्नलिखित में से कौन-सा/से, मृदा में नाइट्रोजन को बढ़ाता है/ बढ़ाते हैं?
1. जंतुओं द्वारा यूरिया का उत्सर्जन
2. मनुष्य द्वारा कोयले को जलाना
3. वनस्पति की मृत्यु
नीचे दिए गए कूट का प्रयोग कर सही उत्तर चुनिए-
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
[I.A.S. (Pre) 2013]
उत्तर- (c) केवल 1 और 3
- जंतुओं के यूरिया उत्सर्जन, साथ ही जीवों एवं वनस्पतियों की मृत्यु के बाद अपघटकों द्वारा इनका अपघटन किया जाता है।
- इस प्रकार पेड़-पौधे इनसे पोषण प्राप्त करते हैं।
- इस तरह नाइट्रोजन चक्र की प्रक्रिया चलती रहती है तथा मृदा में नाइट्रोजन की मात्रा की पूर्ति होती रहती है।
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8. कथनों पर विचार कीजिए –
कथन (A): मिट्टी की प्रजातियों में से मृत्तिका अधिकतम जल धारण करती है।
कारण (R): मृत्तिका में रंध्राकाश बड़े आकार के पाए जाते हैं।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कूट :
(a) (A) तथा (R) दोनों सत्य हैं और (A) का सही स्पष्टीकरण (R) है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सत्य हैं, किंतु (A) का सही स्पष्टीकरण (R) नहीं है।
(c) (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
(d) (A) असत्य है, किंतु (R) सत्य है।
[U.P.P.C.S. (Pre) 2015]
उत्तर- (c) (A) सत्य है, किंतु (R) असत्य है।
- मृत्तिका मिट्टी के कणों का व्यास छोटा होने के कारण इसमें जल धारण क्षमता अधिक पाई जाती है।
- अतः कथन (A) सही है।
- मृत्तिका के कणों का आकार छोटा होने के कारण उसमें रंध्राकाश छोटे आकार के पाए जाते हैं, अतः कारण (R) गलत है।
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9. भू-संरक्षण की परिरेखा बंधन विधि का प्रयोग कहां के लिए होता है?
(a) प्रबल पवन क्रिया के अधीन मरु उपांत
(b) नदी प्रवाहों के सन्निकट का, बाग्रस्त होने वाला, निम्न समतल मैदान
(c) अपतृण के बढ़कर फैलने की संभावना से युक्त गुल्म भूमि
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
[I.A.S. (Pre) 2013]
उत्तर- (d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
- भू-संरक्षण की ‘परिरेखा बंधन विधि’ (Contour Banding) का प्रयोग पहाड़ी ढलान क्षेत्रों में किया जाता है।
- वर्षा के दौरान यह पानी के बहाव को धीमा करके मृदा अपरदन को रोकता है।
- इसके तहत पहाड़ी ढलानों पर मेड़ बंदी करके खेती की जाती है, जिससे बारिश का पानी धीरे से नीचे जाता है और मृदा का कटाव कम होता है।
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10. सूची-I को सूची-II के साथ सुमेलित कीजिए तथा नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करते हुए सही उत्तर चुनिए-
| सूची-I (मिट्टी) |
सूची-II (जलवायु प्रदेश) |
| (A) पॉडजॉल |
(i) समशीतोष्ण-शीत स्टेपी |
| (B) चर्नाजेम |
(ii) शीत समशीतोष्ण |
| (C) स्पॉडजोल्स |
(iii) उष्ण एवं आद्र |
| (D) लेटेराइट |
(iv) आद्र शीत समशीतोष्ण |
कूट :
A, B, C, D
(a) (ii) (i) (iv) (iii)
(b) (iii) (iv) (ii) (i)
(c) (ii) (iii) (iv) (i)
(d) (iv) (i) (iii) (ii)
[R.A.S./R.T.S. (Re-Pre) 2013]
उत्तर- (a) (ii) (i) (iv) (iii)
- सूची-I का सूची-II के साथ सही सुमेलन इस प्रकार है-
| सूची-I |
सूची-II |
| पॉडजॉल |
शीत समशीतोष्ण |
| चर्नोजेम |
समशीतोष्ण-शीत स्टेपी |
| स्पॉडजोल्स |
आर्द्र शीत समशीतोष्ण |
| लेटेराइट |
उष्ण एवं आर्द्र |
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11. अभिकथन (दावा) (A): केंचुए खेती के लिए अच्छे नहीं हैं।
तर्क (कारण) (R): केंचुए मिट्टी को महीन कणों में परिवर्तित कर इसे नरम बना देते हैं।
(a) यदि (A) तथा (R) दोनों ही सही हैं एवं (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) यदि (A) सही है एवं (R) गलत है।
(c) यदि (A) और (R) दोनों ही सही हैं, किंतु (A) की सही व्याख्या (R) नहीं है।
(d) यदि (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]
उत्तर- (d) यदि (A) गलत है, लेकिन (R) सही है।
- केंचुए मिट्टी के निर्माण एवं इसकी उत्पादकता में वृद्धि में विशेष योगदान देते हैं।
- इन्हें ‘पारिस्थितिकी तंत्र का इंजीनियर’ कहा जाता है।
- ये मिट्टी में छिद्रों का निर्माण करते हैं, जिनसे होकर जल एवं ऑक्सीजन अंदर तक पहुंचती है तथा कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है।
- केंचुओं का मल मिट्टी की उत्पादकता के लिए महत्वपूर्ण होता है।
- ये मिट्टी को महीन कणों में परिवर्तित कर नरम बना देते हैं।
- ये अपघटक का कार्य करते हैं।
- अतः स्पष्ट है कि अभिकथन (A) गलत है तथा (कारण) (R) सही है।
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12. कृषि मृदाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए –
1. मृदा में कार्बनिक पदार्थ का उच्च अंश इसकी जल धारण क्षमता को प्रबंध रूप से कम करता है।
2. गंधक चक्र में मृदा की कोई भूमिका नहीं होती है।
3. कुछ समयावधि तक सिंचाई कुछ कृषि भूमियों के लवणीभवन में योगदान कर सकती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से सही है/हैं?
(a) केवल 1 और 2
(b) केवल 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
[I.A.S. (Pre) 2018]
उत्तर- (b) केवल 3
- गुरुत्वीय जल (Gravitational Water) के रिस जाने के पश्चात मिट्टी में बचे हुए जल की अधिकतम मात्रा को मृदा जलधारिता / जलधारण क्षमता कहते हैं।
- मृदा में पाए जाने वाले कार्बनिक पदार्थ मृदा के कणों को अत्यधिक सघन बना देते हैं।
- जिस कारण मृदा की जल धारण क्षमता बढ़ जाती है।
- अतः कथन (1) गलत है। सल्फर प्रोटीन, विटामिन व अमीनो एसिड का प्रमुख घटक है।
- यह सामान्यतः सल्फेट के रूप में मिट्टी और चट्टानों के रूप में पाया जाता है।
- पादप इसे सल्फेट के रूप में ग्रहण करते हैं।
- मृत जीवों के अपघटन द्वारा H.S के ऑक्सीकरण से सल्फेट प्राप्त होते रहते हैं।
- इस प्रकार गंधक चक्र में मृदा की भूमिका प्रत्यक्ष रूप से है।
- अतः कथन (2) भी गलत है।
- कुछ समयावधि तक सिंचाई के कारण लवण, भूमि की सतह पर आ जाते हैं और जल के वाष्पीकरण के पश्चात इसके अपशिष्ट सतह पर शेष रह जाते हैं।
- यह मृदा के ऊपरी परत में लवण को एकत्रित भी कर सकता है।
- इस प्रकार मृदा में अत्यधिक मात्रा में लवण का निर्माण होता है, जिसे लवणीमवन (Solinization) कहा जाता है।
- अतः कथन (3) सही है।
- इस प्रकार विकल्प (b) सही उत्तर होगा।
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13. निम्नलिखित में कौन मृदा से संबंधित है?
(a) इडेफिक
(b) क्लाइमेटिक
(c) बायोटिक
(d) टोपोग्राफी
[U.P.P.C.S. (Pre) 2018]
उत्तर- (a) इडेफिक
- मृदा की संरचना एवं उसके घटकों को इडेफिक’ कहा जाता है।
- यह ग्रीक शब्द इडाफोस (Edaphos) से बना है।
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14. कालानुक्रमिक क्रम में व्यवस्थित करें-
1. पटपरा गठन
2. खेतौढ़ी गठन
3. बघोर गठन
4. सिहावल गठन
कूट :
(a) 1, 4, 2, 3
(b) 4, 1, 3, 2
(c) 1, 2, 3, 4
(d) 4, 3, 2, 1
[U.P. P.C.S. (Mains) 2017]
उत्तर- (b) 4, 1, 3, 2
| गठन |
काल/युग |
| पटपरा |
मध्य पुरापाषाण काल |
| खेतौढ़ी |
नवपाषाण काल एवं लघु पाषाण काल |
| बधोर |
उत्तर पुरापाषाण काल |
| सिहावल |
प्रारंभिक पुरापाषाण काल |
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15. भौगोलिक अपरदन चक्र की संकल्पना इनमें से किसने प्रस्तुत की है?
(a) ए. होल्म
(b) डब्ल्यू.एम. डेविस
(c) एस.डब्ल्यू. उल्टरीज
(d) कोबर
(e) उपर्युक्त में से में कोई नहीं/उपर्युक्त में एक से अधिक
[67 B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2022]
उत्तर- (b) डब्ल्यू.एम. डेविस
- डब्ल्यू एम. डेविस (विलियम मोरिस डेविस) ने भौगोलिक अपरदन चक्र की संकल्पना प्रस्तुत की है।
- वहीं वाल्टर पेंक ने डेविस के सिद्धांत को नकारते हुए अपना ‘मार्फोलॉजिकल सिस्टम’ संकल्पना का प्रतिपादन किया।
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