SMART पुलिस का संक्षिप्त परिचय : भारतीय पुलिस की कमियां , जिसके कारण SMART पुलिस की आवश्यकता है

प्रश्न: भारत में SMART पुलिसिंग की आवश्यकता पर प्रकाश डालते हुए, इस दृष्टि को साकार करने के लिए कुछ प्रशासनिक, विधायी और तकनीकी सुधारों का सुझाव दीजिए।

दृष्टिकोण

  • प्रस्तावना में, SMART पुलिस का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  • इसके बाद, भारतीय पुलिस की कमियों के बारे में लिखिए, जिसके कारण SMART पुलिस की आवश्यकता है।
  • दूसरे भाग में, प्रश्न को प्रशासनिक, विधायी और तकनीकी सुधारों में विभाजित कीजिए और इन श्रेणियों के अंतर्गत कुछ सुधार लिखिए।

उत्तर

प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित SMART पुलिस का आशय संवेदनशील और सख्त (Sensitive and Strict); गतिशीलता के साथ आधुनिक (Modern with mobility); सतर्क और जवाबदेह (Alert and Accountable); विश्वसनीय एवं उत्तरदायी (Reliable and Responsive) तथा प्रशिक्षित और तकनीकी समझ-बूझ (Trained and Techno-savvy) वाली पुलिस से है। SMART पुलिस की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से है: 

  • भारत में अपराधों में होने वाली तीव्र वृद्धि आपराधिक न्याय प्रणाली की निम्न स्तरीय स्थिति को इंगित करती है।
  • देश की औपनिवेशिक पुलिस संरचना को जन सामान्य की लोकतांत्रिक आकांक्षाओं के प्रति संवेदनशील, प्रगतिशील और आधुनिक बल के रूप में बदलने की आवश्यकता है।
  • भारतीय पुलिस के पास उभरती आंतरिक सुरक्षा चुनौतियों जैसे संगठित अपराधों, तस्करी इत्यादि से निपटने के लिए पर्याप्त संसाधन नहीं हैं।
  • हमारे नागरिकों, व्यवसायों और महत्वपूर्ण संरचनाओं की सुरक्षा के लिए SMART पुलिसिंग की अनिवार्य आवश्यकता है।
  • आंतरिक सुरक्षा और पुलिस संबंधी बुनियादी ढांचे का भविष्य, प्रौद्योगिकी की उन्नति के कारण प्री एम्पटिव पुलिसिंग (pre-emptive policing) हेतु डेटा और सूचना के बेहतर उपयोग में निहित है।

भारत में SMART पुलिस के दृष्टिकोण के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए निम्नलिखित सुधारों की आवश्यकता है।

  • तीव्रतर जांच प्रक्रिया, बेहतर विशेषज्ञता और जनता के साथ बेहतर संबंध सुनिश्चित करने के लिए जांच-पड़ताल तथा कानून और व्यवस्था को पृथक किया जाना चाहिए।
  • सामाजिक और साइबर अपराधों के लिए विशेष विंग होना चाहिए।
  • पुलिस केवल मूल/प्रमुख कार्यों तक ही सीमित होनी चाहिए और दूसरे कार्य जैसे पासपोर्ट आवेदनों या नौकरी का सत्यापन इत्यादि के लिए अन्य एजेंसियों को आउटसोर्स किया जा सकता है।
  • पुलिस के लिए व्यापक नीतियों और दिशा-निर्देशों को निर्धारित करने के लिए राज्य सुरक्षा आयोग की स्थापना।
  • स्थानांतरण, पोस्टिंग, प्रमोशन और दूसरे सेवा संबंधी मुद्दों पर निर्णय लेने के लिए पुलिस इस्टेब्लिशमेंट बोर्ड की स्थापना।
  • पुलिस के विरुद्ध शिकायतों के निवारण के लिए राज्य और जिला स्तर पर पुलिस शिकायत प्राधिकरण।
  • राज्य सरकार द्वारा DGP का चयन विभाग के तीन वरिष्ठ अधिकारियों के उस पैनल के मध्य से करना जिसे UPSC द्वारा पदोन्नति के लिए सूचीबद्ध किया गया हो।
  • कार्यकारी या ऑपरेशनल ड्यूटी (operational duties) पर अधिकारियों का निश्चित कार्यकाल।
  • अभियोजन पक्ष और पुलिस के मध्य एकीकरण और समन्वय।

विधायी

  • केंद्र द्वारा पुलिस कानून में एकरूपता लाने के लिए एक मॉडल पुलिस बिल तैयार करना चाहिए और राज्यों को इसे अपनाना चाहिए।
  • संगठित अपराध अधिनियम को अधिनियमित करना।
  • पारदर्शिता सुनिश्चित करने और अपराधों को छिपाये जाने से रोकने के लिए प्राथमिकी की रिपोर्टिंग और पंजीकरण के संबंध में उपाय।
  • CBI के लिए वैधानिक आधार।
  • बड़े क्षेत्रों के लिए आयुक्त प्रणाली (Commissionerate system)।
  • बीट कांस्टेबल सिस्टम (beat constable system) का पुनरुद्धार और सुदृढ़ीकरण
  • आपराधिक प्रक्रिया और साक्ष्य व्यवस्था में परिवर्तन।

प्रौद्योगिकीय

  •  पुलिस नियंत्रण कक्षों का आधुनिकीकरण और उन्नयन किया जाना चाहिए। एक अद्वितीय और एकीकृत आपातकालीन अनुक्रिया नंबर होना चाहिए।
  • इसके लिए गृह मंत्रालय द्वारा नेशनल इमरजेंसी रिस्पांस सिस्टम (NERS) को परिचालित करने की आवश्यकता है।
  • क्राइम एंड क्रिमिनल ट्रैकिंग नेटवर्क और सिस्टम (CCTNS) को शीघ्रता से लागू किया जाना चाहिए।
  • आतंकवाद-निरोध (counter terrorism) में सुधार के लिए NATGRID को कार्यान्वित किया जाना चाहिए।
  • कुशल मानव संसाधन की प्राप्ति के लिए अपराध निवारण, अभियोजन और प्रशिक्षण उद्देश्यों में प्रौद्योगिकी का उपयोग करना।

किसी राष्ट्र के लोकतंत्र और अर्थव्यवस्था का विकास केवल भयरहित और सुरक्षित वातावरण में ही हो सकता है, जिसके लिए हमें SMART पुलिस की आवश्यकता है।

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