आपदा जोखिम प्रबंधन

प्रश्न: आपदा जोखिम प्रबंधन चक्र के विभिन्न चरणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।

दृष्टिकोण:

  • आपदा जोखिम प्रबंधन को परिभाषित करते हुए उत्तर प्रारंभ कीजिए। 
  • इसके तीन विभिन्न चरणों का सविस्तार वर्णन कीजिए।
  • तदनुसार निष्कर्ष प्रस्तुत कीजिए।

उत्तर:

आपदा जोखिम प्रबंधन नए आपदा जोखिमों को रोकने, मौजूदा आपदा जोखिमों का न्यूनीकरण और अवशिष्ट जोखिमों का प्रबंधन करने, सुनम्यता को सुदृढ़ करने तथा क्षति को कम करने में योगदान प्रदान करने हेतु आपदा जोखिम न्यूनीकरण नीतियों एवं रणनीतियों का अनुप्रयोग है।

आपदा जोखिम प्रबंधन चक्र को तीन चरणों में विभाजित किया जा सकता है:

आपदा-पूर्व (Pre-disaster): यह एक निवारक प्रक्रिया है। इसमें ऐसे उपाय सम्मिलित हैं, जो आपदा की स्थिति में सरकारों, समुदायों और व्यक्तियों को तीव्र अनुक्रिया करने में सक्षम बनाते हैं, ताकि आपदा का प्रभावी तरीके से सामना किया जा सके। इसमें चार घटक शामिल हैं:

  • जागरुकता और क्षमता निर्माण: लोगों को खतरे के जोखिम की सीमा और इसके प्रति उनकी सुभेद्यता के संबंध में जागरुक बनाना तथा उन्हें इस प्रकार आपदा प्रबंधन रणनीति में शामिल करना, जो उन्हें स्वयं और अपनी संपत्तियों को काफी हद तक सुरक्षित करने में सक्षम बनाता हो।
  • नियोजन: निवारक उपायों, सुरक्षा उपायों, पुनर्बहाली विकल्पों आदि के संदर्भ में नियोजन, आपदा जोखिम का अनुमान लगाने और उसके अनुसार बचाव कार्यों को संचालित करने में सहायता करता है।
  • निगरानी: तैयारी के तहत सभी कार्यक्रमों और योजनाओं की सावधानीपूर्वक निगरानी करने की आवश्यकता होती है, ताकि किसी भी संभावित त्रुटि से बचा जा सके।
  • त्वरित चेतावनी प्रणाली: यह सरकारी एजेंसियों को आपदा प्रवण क्षेत्रों में सार्वजनिक सूचना प्रेषित करने में सक्षम बनाता है, ताकि किसी खतरे के पश्चात त्वरित आवश्यक कार्यवाही की जा सके।

आपदा के दौरान (During Disaster): जब कोई संकट उत्पन्न होता है तो सेवा समूह, सरकारी एजेंसियां और सामाजिक संगठन लोगों की सुरक्षा हेतु सभी संभव उपाय करते हैं तथा यह सुनिश्चित करते हैं कि उनकी आवश्यकताओं एवं खाद्य आपूर्ति को उचित तरीके से पूरा किया जाए और उनकी कठिनाइयों को न्यूनतम किया जाए। समुदाय आधारित आपदा अनुक्रिया को बढ़ावा देने के लिए प्रयास किए जाते हैं।

आपदा-पश्चात प्रबंधन रणनीति (Post-disaster management strategies): इसमें अनुक्रिया एवं पुनर्बहाली रणनीति सम्मिलित हैं।

  • सर्वप्रथम सर्वेक्षण और बेसलाइन डेटा संग्रह के माध्यम से क्षति का आकलन किया जाता है।
  • तत्पश्चात राहत एवं पुनर्वास के उपाय किए जाते हैं, जिनमें आजीविका की पुनःप्राप्ति, भोजन, आश्रय जैसी मूलभूत आवश्यकताओं की आपूर्ति शामिल है।
  • इसमें आपदा के प्रति अधिक सुभेद्य वर्गों जैसे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों आदि के लिए विशेष उपाय भी शामिल हैं, ताकि उन्हें आपदा के प्रभावों से निपटने में सक्षम बनाया जा सके।

किसी आपदा के जोखिमों को न्यूनतम करने के लिए, सभी तीन चरणों पर एक समग्रतापूर्ण कार्रवाई किए जाने की आवश्यकता होती है। सेंडाई फ्रेमवर्क में संयुक्त राष्ट्र के सदस्य राष्ट्रों द्वारा भी आपदा जोखिम न्यूनीकरण के महत्व की पहचान की गई। भारत अपनी राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (जो आपदा प्रबंधन चक्र के सभी चरणों के लिए सभी हितधारकों को एक फ्रेमवर्क और निर्देश प्रदान करती है) के माध्यम से सेंडाई फ्रेमवर्क के लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के साथ संबद्ध है।

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