सतत विकास लक्ष्य(SDGs) : जनसंख्या गतिकी और भविष्य की रणनीतियां

प्रश्न: सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति अन्य कारकों के साथ-साथ विकास रणनीति के निर्माण पर, जो वर्तमान और भविष्य की जनसंख्या गतिकी को दर्शाती है, पर अधिक निर्भर करती है। चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • SDGs को संक्षेप में, परिभाषित कीजिए।
  • जनसंख्या गतिकी और इससे संबंधित कारकों के परिप्रेक्ष्य में विकास रणनीति के महत्व का वर्णन कीजिए।
  • विकसित और विकासशील देशों के सन्दर्भ में, वर्तमान जनसंख्या गतिकी और भविष्य की रणनीतियों पर चर्चा कीजिए।
  • SDGs के समक्ष विद्यमान चुनौतियों का उल्लेख करते हुए उत्तर का समापन कीजिए।

उत्तर

सतत विकास लक्ष्य (SDGs) संयुक्त राष्ट्र द्वारा निर्धारित 17 परस्पर संबंधित लक्ष्यों का समूह हैं, जो संधारणीय विकास सुनिश्चित करने के लिए पर्यावरणीय, सामाजिक और आर्थिक आयामों में संतुलन स्थापित करते हैं।

मानव पूंजी का सृजन न केवल योजना के लिए बल्कि विकास रणनीतियों के कार्यान्वयन के लिए भी प्रासंगिक है। इस संदर्भ में, जनसंख्या गतिकी, जैसे जनसंख्या वृद्धि और गिरावट, आयु वृद्धि, प्रवास और शहरीकरण की प्रवृत्तियाँ आदि विकास नीतियों के बेहतर नियोजन हेतु महत्वपूर्ण इनपुट हैं। इन नीतियों का वर्णन दो श्रेणियों में किया जा सकता है: (i) विकासशील देशों के सन्दर्भ में (ii) विकसित देशों के सन्दर्भ में।

विकासशील देशों में जनसंख्या गतिकी

भारत जैसे विकासशील देशों में वर्तमान जनसंख्या गतिकी, जनसंख्या में तीव्र वृद्धि, उच्च मातृ एवं शिशु मृत्यु दर, बेरोजगारी, संपत्ति का असमान वितरण, व्यापक पैमाने पर अनियोजित तीव्र शहरीकरण आदि पर केंद्रित है। विकास रणनीतियों को वर्तमान के साथ-साथ भविष्य की आवश्कयताओं से समायोजित होना चाहिए और इनके द्वारा निम्नलिखित पर ध्यान दिया जाना चाहिए:

  • कार्यशील माताओं की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए प्रजनन और शिशु स्वास्थ्य सेवाएँ, मातृत्व लाभ कार्यक्रम आदि।
  • युवाओं की क्षमता बढ़ाने पर केन्द्रित कौशल विकास और रोजगार अवसर।
  • अन्तः देशीय तथा अंतरदेशीय प्रवसन को सुविधाजनक बनाने हेतु समर्पित नीतियाँ।
  • वृद्ध होती जनसंख्या के लिए विशेष अवसंरचना, पेंशन योजनाएं आदि।
  • जनसंख्या वृद्धि दर में कमी लाने हेतु परिवार नियोजन संबंधी शिक्षा।

उपर्युक्त उपायों के साथ-साथ, कार्यशील आयु वर्ग में जनसंख्या का अधिक संकेन्द्रण देशों को जनसांख्यिकीय लाभ प्राप्त करने और आर्थिक विकास को तीव्रता प्रदान करने में सक्षम बनाएगा। इसके अतिरिक्त प्रवासन के द्वारा विप्रेषण, कौशल हस्तांतरण और अन्य लाभों को प्राप्त करने में भी सहयोग प्राप्त होगा।

विकसित देशों में जनसंख्या गतिकी

वर्तमान में, विकसित देशों में तीव्र आयु वृद्धि की और जापान जैसे कुछ देशों जनसंख्या में गिरावट की प्रवृत्ति विद्यमान है। इसके अतिरिक्त, यहाँ उपस्थित अन्य सम्बद्ध जोखिमों में जीवनशैली के कारण उत्पन्न अवसाद जैसी बीमारियां, शहरों से वापस गांवों की और पलायन, श्रम शक्ति में कमी, आर्थिक गतिविधियों में गिरावट आदि शामिल हैं।

इन समस्याओं के समाधान हेतु, भविष्य की विकास रणनीतियों को निम्नलिखित मुद्दों पर केंद्रित होना चाहिए:

  • नौकरियों के स्वचालन (ऑटोमेशन) में निवेश,
  • जनसंख्या में गिरावट को नियंत्रित करने हेतु नीतिगत परिवर्तन,
  • अन्य देशों के कुशल मानव संसाधन को आकर्षित करने हेतु आव्रजन नीतियों का निर्माण। इसके अतिरिक्त, देश विशेष की परिस्थितियों के अनुसार डायस्पोरा के हित में संशोधित नीति के निर्माण की आवश्यकता है।

SDGs में 169 लक्ष्यों का निर्धारण किया गया है जिन पर बिना अपेक्षित मानकों के निगरानी रखना विकासशील देशों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। साथ ही, SDGs में पर्याप्त प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, वित्त एवं उत्तरदायी व्यवस्था की कमी है। इसके अतिरिक्त, सीरिया जैसे संघर्षरत देशों के लिए विशिष्ट लक्ष्यों की आवश्यकता होती है।

अतः, उचित रणनीतियां न केवल एक परिवर्तनशील जनसंख्या गतिकी की बढ़ती आवश्यकताओं एवं अपेक्षाओं की पूर्ति के लिए, बल्कि प्रगतिशील और सतत विकास प्राप्त करने हेतु मौजूदा उत्पादन एवं खपत पैटर्न में संशोधन के लिए भी आवश्यक हैं।

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