समुद्री सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग के महत्व : जिबूती आचरण संहिता और इसमें संशोधन की आवश्यकता का वर्णन

प्रश्न: समुद्री सुरक्षा प्रक्षेत्र (डोमेन) गैर-पारंपरिक खतरों का सामना करने हेतु सामूहिक बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग की मांग करता है। पश्चिमी भारतीय महासागर में खतरों और जिबूती आचरण संहिता में हालिया संशोधनों के संदर्भ में चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्री सुरक्षा एवं खतरों से संबंधित अवधारणा के परिचय से उत्तर आरंभ कीजिए।
  • समुद्री सुरक्षा के लिए बहुपक्षीय और क्षेत्रीय सहयोग के महत्व पर चर्चा कीजिए।
  • जिबूती आचरण संहिता और इसमें संशोधन की आवश्यकता का वर्णन कीजिए।

उत्तर

सामुद्रिक सुरक्षा के अंतर्गत समुद्र से संबंधित उन मुद्दों को सम्मिलित किया जाता है, जिनका प्रभाव राष्ट्रीय सुरक्षा पर पड़ता है। इसमें समुद्री व्यापार एवं इसके सहायक कार्यों हेतु आधारभूत संरचना, सामुद्रिक संसाधनों का प्रबंधन, पर्यावरणीय मुद्दों तथा नौसेना की तैनाती सम्मिलित है। हाल के दिनों में, गैर-परंपरागत एवं गैर-राज्य आधारित सुरक्षा चिंताओं ने समुद्र संबधी सोच को नया स्वरुप प्रदान किया है।

इस संदर्भ में पश्चिमी हिंद महासागर क्षेत्र में कई गैर-पारंपरिक सुरक्षा समस्याएं विद्यमान हैं जैसे कि:

  • पाईरेसी (समुद्री डकैती), 
  • अवैध प्रवासन, 
  • गैरकानूनी मत्स्यन,
  • हथियार, नशीले पदार्थों की तस्करी,
  • सीरिया, यमन और सोमालिया जैसे आसपास के देशों में आतंकवाद और जातीय संघर्ष।

इन समस्याओं का समाधान करने हेतु क्षेत्रीय देशों और क्षेत्रीय सुरक्षा में हिस्सेदारी वाले लोगों के मध्य सहयोग की आवश्यकता है। भारतीय प्रधानमंत्री की हिन्द महासागर के सीमावर्ती राज्यों की यात्राओं जैसी हालिया पहलों ने IORA , बिम्सटेक जैसे अंतरराष्ट्रीय समूहों के माध्यम से द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है। IONS जैसे कार्यक्रमों द्वारा बहुपक्षीय सहयोग के माध्यम से समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने के भारतीय प्रयास सराहनीय है। इस संदर्भ में जिबूती आचरण संहिता एक महत्वपूर्ण विकास है।

जिबूती आचरण संहिता (DCoC)

जिबूती आचरण संहिता 2009 में अपनाई गई थी। सहिंता हस्ताक्षरकर्ता देशों द्वारा पश्चिमी हिंद महासागर और अदन की खाड़ी से गुजरने वाले जहाजों के खिलाफ समुद्री चोरी और सशस्त्र डाकुओं के दमन पर एक दुसरे के साथ सहयोग करना है। DCOC ने क्षेत्र में समुद्री सशस्त्र डाकुओं को दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और इसके दायरे में मानवों की अवैध तस्करी और अवैध रूप से मत्स्यन जैसी अन्य अवैध गतिविधियों को शामिल करने के लिए इसका विस्तार किया गया है।

जेद्दाह संशोधन

2017 में जेद्दाह में एक संशोधित संहिता को अपनाया गया, जिसे “जेद्दाह संशोधन” कहा जाता है। इसकी विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • DCoC में विस्तार का उद्देश्य, समुद्री क्षेत्र के सतत विकास के आधार पर व्यापक समुद्री सुरक्षा मुद्दों पर ध्यान देने के लिए राष्ट्रीय और क्षेत्रीय क्षमता का निर्माण करना है। यह स्थायी आर्थिक विकास, खाद्य सुरक्षा, रोजगार, समृद्धि और स्थिरता बनाए रखने में शिपिंग, जहाज रानी, मत्स्य पालन और पर्यटन सहित “ब्लू इकॉनमी (Blue Economy) की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है।
  • यह इस क्षेत्र के सभी देशों को एकजूट करता है और महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय सामुद्रिक अपराधों को कवर करता है
  • हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी,
  • अवैध वन्यजीव् व्यापार,
  • अवैध तेल बंकरिंग( bunkering) और चोरी,
  • मानव तस्करी एवं तस्करी और विषाक्त कचरे का अवैध डंपिंग ।
  • एक कार्य योजना को विकसित एवं प्रभावी सुरक्षा उपायों को लागू करने के लिए सदस्य देश बहु एजेंसी, बहुआयामी राष्ट्रीय समुद्री सुरक्षा और सुविधा समितियों को स्थापित करने तथा बंदरगाह स्तर पर ऐसी ही व्यवस्था हेतु प्रतिबद्ध हैं।

इस प्रकार, DCoC और जेद्दाह संशोधन समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित करने और पारंपरिक खतरों के साथ साथ पर्यावरण और टिकाऊ विकास के मुद्दों को हल करने हेतु राष्ट्रों के मध्य संस्थागत और प्रक्रियात्मक सहयोग की भूमिका को मान्यता प्रदान करता है ।

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