भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को प्रभावित करने वाले प्रमुख अवरोध : अधिमानता की सामान्यीकृत प्रणाली (जनरलाईज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस: GSP)

प्रश्न: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों को प्रभावित करने वाले प्रमुख अवरोधों पर प्रकाश डालिए। हाल ही में, अधिमानता की सामान्यीकृत प्रणाली (जनरलाईज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस: GSP) की समाप्ति से भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर क्या संभावित प्रभाव पड़ सकता है?(150 words)

दृष्टिकोण

  • भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों की वर्तमान स्थिति का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
  • व्यापार संबंधों में प्रमुख अवरोधों का उल्लेख कीजिए।
  • GSP की अवधारणा को समझाते हुए, भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर इसकी समाप्ति के प्रभावों की चर्चा कीजिए।

उत्तर

भारत के लिए अमेरिका, शीर्ष वस्तु व्यापार भागीदार और सबसे बड़े निर्यात बाजार के रूप में उभरा है। वर्ष 2014 में दोनों देशों द्वारा अपने द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ाकर 500 बिलियन अमेरिकी डॉलर करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया था। हालांकि, अमेरिका और भारत के मध्य व्यापारिक संबंधों के समक्ष निम्नलिखित अवरोध विद्यमान हैं:

  • संरक्षणवाद: ट्रंप प्रशासन के तहत व्यापार में समता स्थापित करने हेतु प्रशुल्कों (उदाहरण के लिए – स्टील और एल्यूमीनियम पर) में वृद्धि की गई है। इसके प्रत्युत्तर में भारत द्वारा भी चयनित अमेरिकी वस्तुओं पर प्रतिरोधी प्रशुल्क (counter tariffs) अधिरोपित करने की घोषणा की गयी है। अमेरिका द्वारा यह भी आरोप लगाया गया है कि भारत द्वारा अमेरिकी उत्पादों के लिए ‘न्यायसंगत और उचित पहुंच’ प्रदान नहीं की जा रही है। इसे 2017 में भारत के पक्ष में लगभग 20 बिलियन डॉलर के व्यापार अधिशेष के संदर्भ में स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।
  • IPR और अन्य मुद्दों से संबंधित मतभेद: यूनाइटेड स्टेट ट्रेड रिप्रेजेन्टेटिव (USTR) की ‘स्पेशल 301 रिपोर्ट’ के अंतर्गत भारत को निरंतर प्रायॉरिटी वाचलिस्ट में रखा गया है। दूसरी ओर भारत और अमेरिका द्वारा सौर पैनल प्रोत्साहन से संबंधित विवाद के लिए WTO विवाद निपटान निकाय का सहारा लिया गया है।
  • H1B वीजा: अमेरिका द्वारा H1B वीजा संबंधी मानदंडों को कठोर किया गया है, जिससे भारतीय श्रमिकों और भारतीय  कंपनियों को हानि हो रही है।
  • अमेजन और फ्लिपकार्ट (अब वॉलमार्ट के स्वामित्वाधीन) जैसी दिग्गज अमेरिकी ई-कॉमर्स कंपनियों पर भारत द्वारा विनियामकीय उपाय लागू किए गए हैं, जिसमें कार्डियक स्टेंट, घुटना प्रत्यारोपण आदि जैसे कुछ चिकित्सा उपकरणों की कीमतों पर सीमा (capping) निर्धारित की गई है। इस कदम को अमेरिकी कंपनियों की बाजार पहुंच के समक्ष अवरोध के रूप में माना गया है।
  • डेटा के स्थानीयकरण सम्बन्धी मुद्दे: भारत के डेटा के स्थानीयकरण संबंधी कठोर नियमों को कथित तौर पर मास्टरकार्ड, वीज़ा आदि जैसी कंपनियों के लिए समस्याएँ उत्पन्न करने वाला माना गया है। अमेरिका द्वारा यह मांग की गई है कि उसके उन व्यवसायों को जिन्हें आकड़ों की आवश्यकता (डेटा-इंटेंसिव) अत्यधिक होती है उन्हें भारत के समृद्ध डेटा भंडार तक मुक्त पहुंच प्राप्त होनी चाहिए।
  • अमेरिका द्वारा उठाए गए कदम और इसके रणनीतिक निहितार्थ: अमेरिका ने चीन की दिग्गज प्रौद्योगिकी कंपनी हुआवेई (Huawei) पर अपने सहयोगियों के साथ व्यापार करने पर प्रतिबंध लगा दिया है, इसके परिणामस्वरूप भारत में हुआवेई द्वारा अपने व्यापार का विस्तार करना कठिन होना, ईरान से तेल आयात करने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा प्रतिबन्ध आरोपित करने का खतरा, भारत द्वारा रूसी S-400 मिसाइल को खरीदने सम्बन्धी मुद्दा आदि।

हाल ही में, अमेरिका ने व्यापार समानता स्थापित करने के अपने प्रयासों के अंतर्गत सामान्यीकृत अधिमानता प्रणाली (जनरलाईज्ड सिस्टम ऑफ़ प्रेफरेंस: GSP) के तहत भारतीय व्यापार विशेषाधिकारों को वापस ले लिया है। उल्लेखनीय है कि GSP एक व्यापार वरीयता कार्यक्रम है, जो नामित लाभार्थी देशों के उत्पादों को प्रशुल्क मुक्त प्रवेश की अनुमति प्रदान करता है। चूंकि भारत इस कार्यक्रम का सबसे बड़ा लाभार्थी देश था, इसलिए भारत के लिए निम्नलिखित संभावित दुष्परिणाम हो सकते हैं:

  •  वाणिज्य मंत्रालय के अनुसार, इससे 190 मिलियन डॉलर का निर्यात प्रभावित होगा। हालाँकि, कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत का लगभग 5 बिलियन अमेरिकी डॉलर का वार्षिक निर्यात प्रतिकूल रूप से प्रभावित हो सकता है। उल्लेखनीय है कि यह मात्रा भारत से अमेरिका को किए जाने वाले कुल निर्यात का 10% है।
  • करों की उच्च दरों के कारण, भारतीय निर्यात अधिक महंगे हो जाएंगे और अमेरिका के साथ अन्य विकासशील देशों के निर्यात के साथ-साथ प्रतिस्पर्धात्मकता समाप्त हो जाएगी
  • भारत द्वारा GSP के तहत निर्यात किए जाने वाले अधिकांश उत्पाद सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSME) क्षेत्र से सम्बंधित हैं। इस प्रकार, इस क्षेत्रक में रोजगार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।
  • वैश्विक भू-राजनीति के आलोक में, दोनों देशों को परस्पर सहयोग में वृद्धि करने की आवश्यकता है। भारत-अमेरिकी व्यापार संबंधों के समक्ष विद्यमान किसी भी विवाद का समाधान करने हेतु विश्वास और आम सहमति बनाने की आवश्यकता होगी।

अमेरिकी विदेश मंत्री जॉर्ज पोम्पिओ की हालिया भारत यात्रा के दौरान इन मुद्दों पर वार्ता की गयी है। भारत और अमेरिका के पास ‘2 + 2 फोरम’ जैसे कई संवाद तंत्र विद्यमान हैं, जिससे ऐसे मुद्दों का तत्काल और सौहार्दपूर्ण तरीके से समाधान किया जा सकता है।

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