समाज को बाधित करने वाली सामाजिक बुराई : सामाजिक अनुनय

प्रश्न: समाज को बाधित करने वाली कुछ सामाजिक बुराइयों का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए चर्चा कीजिए कि किस प्रकार सामाजिक अनुनय उन्हें दूर करने की एक प्रभावी तकनीक हो सकता है।

दृष्टिकोण

  • सामाजिक अनुनय का संक्षेप में वर्णन कीजिए। 
  • कुछ सामाजिक कौशलों का उल्लेख करते हुए, चर्चा कीजिए कि सामाजिक अनुनय उन्हें दूर करने में किस प्रकार एक प्रभावी तकनीक हो सकता है।

उत्तर

सामाजिक अनुनय एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें संप्रेषक चयन की स्वतंत्रता वाले परिवेश में, किसी संदेश के प्रसारण के माध्यम से किसी घटना या मुद्दे के प्रति अन्य लोगों की अभिवृत्ति या व्यवहार को परिवर्तित करने हेतु उन्हें मनाने की कोशिश करते हैं।

सामाजिक अनुनय का उद्देश्य लोगों की विश्वास प्रणाली को इस तरह परिवर्तित करना है कि वांछित व्यवहार नवीन ऽदृढ़ विश्वासों के माध्यम से उत्पन्न हो। अतः सामाजिक कुरीतियों को दूर करने के लिए इसे प्रभावी रूप से उपयोग में लाया जा सकता है। साथ ही यह अन्य तरीकों जैसे गैर-अनुपालन की स्थिति में दंड दिए जाने सम्बन्धी भय उत्पन्न करने, वित्तीय लाभ को बढ़ाने के माध्यम से लोगों को अभिप्रेरित करने तथा आत्म-विनियमन आदि से बेहतर हो सकता है।

सामाजिक कुरीतियों से निपटने हेतु सामाजिक अनुनय:

  • सामाजिक असाम्यता या समरसता का अभाव: धार्मिक या जातिगत पहचान को कथित रूप से खतरा होने, भ्रामक समाचार (फेक न्यूज़) आदि के कारण धार्मिक और जातिगत तनाव उत्पन्न हो सकते हैं। एकता को बढ़ावा देने तथा सामाजिक मतभेदों एवं समरसता को और बिगड़ने से रोकने के लिए सरकार भाषणों, साक्षात्कारों आदि के रूप में सामाजिक अनुनय का उपयोग कर सकती है।
  • मादक द्रव्यों का सेवन: साथियों का दबाव/प्रभाव और मीडिया द्वारा किया गया महिमामंडन युवाओं को मादक द्रव्यों के सेवन की ओर मोड़ सकता है। हालांकि, अध्ययन से पता चला है कि धूम्रपान छोड़ने से होने वाले तत्काल स्वास्थ्य लाभों को दर्शाने वाली चित्रात्मक चेतावनी, इसे छोड़ने के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण उत्पन्न कर सकती है। इसके अतिरिक्त, स्वास्थ्य पेशेवरों, गैर सरकारी संगठनों आदि द्वारा जागरुकता अभियानों के माध्यम से धूम्रपान के हानिकारक प्रभावों के बारे में सूचनाओं का प्रसार, मादक द्रव्यों के सेवन करने वाले व्यक्तियों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकता है।
  • पितृसत्तात्मक अभिवृत्ति: समाज में प्रचलित पितृसत्तात्मक अभिवृत्ति महिलाओं के व्यक्तित्व सम्बन्धी विकास में बाधा उत्पन्न करती है। सिनेमा, विज्ञापनों, सोशल मीडिया आदि में महिलाओं के लैंगिक रूप से रूढ़िवादी प्रस्तुतीकरण से भीअनुनयन पर प्रभाव पड़ता है, जो लैंगिक असमानता के प्रति अभिवृत्ति और व्यवहार को आधार प्रदान करता है। हालाँकि, ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ जैसी योजनाओं को लोकप्रिय बनाने में मशहूर हस्तियों द्वारा किया जाने वाला सामाजिक अनुनय जागरुकता उत्पन्न करने, आम जनता को संवेदनशील बनाने और महिलाओं से संबंधित समस्याओं के बारे में समझ को बेहतर बनाने में प्रभावी हो सकता है।
  • युवाओं में कट्टरता: ISIS जैसे आतंकवादी संगठनों द्वारा युवाओं को उनके संगठन में शामिल होने के लिए प्रेरित करने हेतु सोशल मीडिया का इस्तेमाल एक माध्यम के रूप में किया गया है। इसी माध्यम का उपयोग ऐसे आतंकवादी संगठनों के भ्रामक प्रचार का रहस्योद्घाटन करने, कट्टरता को कम करने और धार्मिक उन्माद को रोकने तथा उदारवाद एवं धर्मनिरपेक्ष विचारधारा को लोकप्रिय बनाने के लिए भी किया जा सकता है।
  • स्वच्छता: इस सन्दर्भ में अनुनय एक ऐसी मानसिकता का निर्माण कर सकता है जो शौचालय को एक अनिवार्यता मानती हो। सामाजिक एवं डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म सफाई और स्वच्छता सम्बन्धी जागरुकता के प्रसार में सहायता करते हैं और इस प्रकार ‘स्वच्छ भारत मिशन’ जैसी पहल को सुदृढ़ बनाते हैं। “टॉयलेट- एक प्रेम कथा” जैसी फिल्मों द्वारा अनुनय, विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में, घरों के भीतर शौचालयों के निर्माण और उपयोग सम्बन्धी वर्जनाओं को दूर करने में सहयोग करता है।

सामाजिक अनुनय बड़ी संख्या में लोगों के व्यवहार एवं अभिवृत्ति को प्रभावित करने का एक महत्वपूर्ण तरीका है। हालांकि, लोगों को सूचनाओं की यथार्थता, स्रोत और निहित परिणामों के बारे में सतर्क रहने की आवश्यकता है।

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