मूल्यों के अर्थ और विभेद

प्रश्न: निम्नलिखित के मध्य विभेद कीजिए:

(a) क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर जवाबदेही

(b) नीतिपरक आचार संहिता और आचरण संहिता

(c) विश्वास और अभिवृत्ति

(d) अनुनय और व्यवहार कौशल

दृष्टिकोण:

  • दी गई शब्दावलियों के मध्य अंतर् स्पष्ट कीजिए।
  • प्रासंगिक उदाहरणों के साथ अपने उत्तर की पुष्टि कीजिए।

उत्तर:

(a) क्षैतिज और ऊर्ध्वाधर जवाबदेही

क्षैतिज जवाबदेही:  यह राज्य की संस्थाओं की वह क्षमता है जिसके माध्यम से वे अन्य सार्वजनिक एजेंसियों और सरकार के अंगों द्वारा किए गए प्राधिकार के दुरुपयोग की जाँच करती हैं। क्षैतिज जवाबदेही से आशय सामान्यतः सरकारी ढांचे के तहत विद्यमान आंतरिक तंत्रों से है। जैसे कि संसद और उच्चतर न्यायपालिका जैसे जवाबदेही के संस्थान अपने पदनामित कर्तव्यों का निष्पादन नहीं करने वाले किसी अन्य संगठन के अधिकारी से प्रश्न पूछ सकते हैं तथा अंतत: उसे दंडित कर सकते हैं।

ऊर्ध्वाधर जवाबदेही: इसका आशय उस शक्ति से है जिसके माध्यम से नागरिक, मास मीडिया और सिविल सोसाइटी, सरकारी संस्थाओं तथा उनके अधिकारियों से निष्पादन के बेहतर मानकों के प्रवर्तन की मांग करते हैं। वे अपनी शिकायतों के समाधान और सरकार द्वारा अनुचित अथवा अपर्याप्त कार्यवाही के मामले में हस्तक्षेप हेतु निर्वाचित प्रतिनिधियों के समर्थन की मांग भी कर सकते हैं।

(b) नीतिपरक आचार संहिता और आचरण संहिता

नीतिपरक आचार संहिता: यह व्यवहार को निर्देशित करने वाले सामान्य सिद्धांतों को निर्धारित करती है। यह संहिता व्यापक मुद्दों पर बल देती है तथा इसे प्राय: संगठन के ध्येय, उसके मूल्यों और उसके सदस्यों की अपेक्षाओं के संदर्भ में एक विश्वास दस्तावेज़ के रूप में निर्मित किया जाता है। ये संहिताएं आदर्शवादी, गैर-दंडनीय, सामान्य और अन्तर्निहित होती हैं। उदाहरणार्थ- जरूरतमंदों की सहायता करना, सहकर्मियों का सम्मान करना, हितों के संघर्ष से बचना आदि।

आचरण संहिता: ये संहिताएं किसी संगठन में प्रोत्साहित अथवा प्रतिबंधित किए जाने वाली निर्दिष्ट प्रथाओं और व्यवहारों की रूपरेखा तय करने वाले विशिष्ट नियमों को निर्धारित करती हैं। ये ऐसे दिशा-निर्देशों एवं प्रक्रियाओं का निर्माण करती हैं जिनसे यह तय हो सके कि इनका उल्लंघन हुआ है अथवा नहीं। साथ ही यह इनके उल्लंघनों के परिणामों को भी निर्धारित करती हैं। ऐसी संहिताएं विशिष्ट और सुस्पष्ट होती हैं तथा उल्लंघन किए जाने पर प्राय: दंड की अनुशंसा करती हैं। उदाहरणार्थ, निर्वाचन आयोग द्वारा आदर्श आचार संहिता, किसी संगठन में सेवा संबंधी नियम आदि।

(c) विश्वास और अभिवृत्ति:

विश्वास: यह किसी तथ्य की वास्तविकता के प्रति आंतरिक अनुभूति है, यद्यपि वह अप्रमाणित अथवा तर्कहीन भी हो सकती है। इसे किसी व्यक्ति द्वारा देखे, सुने व अनुभव किए गए तत्वों के आधार पर आत्मसात किया जाता है। विश्वास उन आधारों से ग्रहण किया जाता है जिन पर अभिवृत्ति आधारित होती है जैसे कि ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास, मृत्यु के पश्चात् जीवन में विश्वास इत्यादि।

अभिवृत्ति: यह घटनाओं, वस्तुओं, व्यक्तियों इत्यादि के प्रति अनुकूल या प्रतिकूल रूप से कार्य करने की एक ऐसी पूर्ववृत्ति होती है जो उस व्यक्ति के व्यवहार को निर्धारित कर सकती है। व्यक्ति को अपना विश्वास अच्छी तरह से ज्ञात होता है; इसके विपरीत अभिवृति ज्ञात अथवा अज्ञात, दोनों हो सकती है। उदाहरणार्थ, संगीत को नापसंद करने वाला एक व्यक्ति संगीत के प्रत्यक्ष प्रदर्शन के प्रति एक प्रतिकूल अभिवृत्ति रख सकता है। अभिवृत्ति किसी विषय के संदर्भ में एक मानसिक दशा, दृष्टिकोण अथवा विचारों का एक समूह होती है तथा इसमें सम्बंधित भावनाएं भी निहित होती हैं। साथ ही इसमें संबंधित विषय के प्रति एक विशेष तरीके से कार्य करने की प्रवृत्ति भी शामिल होती है।

(d) अनुनय और व्यवहार कौशल

अनुनय: यह किसी को मनाने अथवा कुछ करने या किसी चीज पर विश्वास करने हेतु आश्वासित होने से संबंधित कार्य अथवा प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य कुछ घटनाओं, वस्तुओं, विचारों या अन्य व्यक्तियों के प्रति किसी व्यक्ति के दृष्टिकोण अथवा व्यवहार को परिवर्तित करना होता है। इसके लिए सूचना, भावनाओं या तर्क-वितर्क अथवा इनके एक संयोजन को व्यक्त करने हेतु लिखित या मौखिक शब्दों का प्रयोग किया जाता है। उदाहरण के लिए, स्वास्थ्य पर धूम्रपान के दुष्प्रभावों की चर्चा करते हुए किसी व्यक्ति को इसे छोड़ने के लिए मनाना।

व्यवहार कौशल: इसका आशय किसी व्यक्ति या वस्तु को कुशलतापूर्वक सँभालने, नियंत्रित करने अथवा कुशल प्रयोग करने से है। व्यवहार कौशल एक नकारात्मक प्रयोजन रखता है। इसका तात्पर्य मूर्ख बनाने, नियंत्रण स्थापित करने अथवा किसी ऐसे कार्य को कराने हेतु छल करने के उद्देश्य के साथ अनुनय करने से है जो उस व्यक्ति को हानि पहुंचा सकता हो या उसके लिए अलाभकारी हो। उदाहरणार्थ, किसी निर्धन और अशिक्षित व्यक्ति को धन की हानि करवाने वाली किसी पोंजी स्कीम में निवेश हेतु कुशलतापूर्वक सहमत बनाना।

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