मृदा द्रवीकरण की अवधारणा की संक्षिप्त व्याख्या : भूकंपीय घटनाओं के दौरान यह कैसे प्रकट होता है।

प्रश्न: मृदा द्रवीकरण की अवधारणा की व्याख्या कीजिए। उदाहरण प्रस्तुत करते हुए समझाइए कि भूकंपीय घटनाओं के दौरान यह कैसे प्रकट होता है। इसके प्रभावों को कम करने के लिए कौन-से सुरक्षात्मक कदम उठाए जा सकते हैं? (150 शब्द)

दृष्टिकोण

  • मृदा द्रवीकरण की अवधारणा की संक्षिप्त व्याख्या कीजिए।
  • इसके घटित होने के लिए पूर्वापेक्षित परिस्थितियों तथा संबंधित द्रवीकरण प्रवण क्षेत्रों का उल्लेख कीजिए।
  • एक विवरणात्मक चित्र के साथ सविस्तार वर्णन कीजिए कि भूकंपीय घटनाओं के दौरान यह कैसे प्रकट होता है।
  • इसके प्रभावों को कम करने हेतु उठाए जा सकने योग्य कुछ सुरक्षात्मक कदमों को रेखांकित कीजिए।

उत्तर

  • मृदा द्रवीकरण एक परिघटना है जिसमें तनाव की स्थिति में किसी व्यावहारिक या अकस्मात परिवर्तन की प्रतिक्रियास्वरूप किसी संतृप्त या आंशिक रूप से संतृप्त मृदा की सुदृढ़ता तथा कठोरता का काफी हद तक क्षय हो जाता है। इस परिघटना के परिणामस्वरूप मृदा एक ‘द्रव‘ की भांति व्यवहार करती है।
  • सामान्यत: इस घटना को गाद एवं बजरी जैसी ख़राब जल निकास युक्त उथली, शिथिल तथा मध्यम संतृप्त रवेदार मृदा में देखा जा सकता है। इनमें से अधिकांश क्षेत्र अंतःस्थलीय जल निकायों के निकट अवस्थित होते हैं।
  • वे क्षेत्र जहाँ मृदा द्रवीकरण की घटनाएं होती हैं भौगोलिक दृष्टि से भिन्न-भिन्न स्थानों पर तथा मुख्यतः सक्रिय भूकंपीय क्षेत्रों में अवस्थित होते हैं।

भूकंपीय घटनाओं के दौरान प्रकटीकरण

  • भूकंपीय घटनाएँ जल दबाव में अत्यधिक वृद्धि करती हैं। इससे मृदा के कण आसानी से एक दूसरे से अलग हो सकते हैं।
  • भूकंप के समय धरातल पर निर्मुक्त शक्तिशाली कंपन जल भराव को प्रेरित कर सकता है जिससे मृदा की द्रवता में वृद्धि होती है। मृदा कणों के मध्य सम्पर्क बल (contact forces) मृदा निक्षेप को कमजोर बना देता है, जिससे यह आधार पर अपने भार के दबाव को सहने में सक्षम नहीं रह पाती है।
  • इसके परिणामस्वरूप मृदा की ससंजकता समाप्त हो जाती है और मृदा निक्षेप की इसके ऊपर किए गए निर्माण को सहारा देने की क्षमता में कमी आ जाती है, परिणामस्वरूप निर्मित संरचनाएं विफल हो जाती हैं।
  • यह नगरीय भूकंपीय जोखिमों में वृद्धि करता है, क्योंकि इस घटना का परिणाम बृहद जमाव,बलुआ पंक प्रभाव, भूमि प्रसार, रेत के ज्वालामुखियों के निर्माण, मृदा को स्थिर रखने वाली दीवार (रिटेनिंग वाल) की विफलता तथा धारण क्षमता के ह्रास के रूप में होता है।

प्रभावों के न्यूनीकरण हेतु सुरक्षात्मक उपाय:

  • द्रवीकरण प्रवण मृदा में निर्माण गतिविधियों पर रोक लगाना: क्षेत्र प्रतिबंध (zone restrictions) के अनुपालन तथा मृदा मानचित्रण के माध्यम से।
  • द्रवीकरण-रोधी संरचनाओं का निर्माण: यदि इमारतों का निर्माण जोखिम प्रवण क्षेत्र में किया ही जाना हो तो इन्हें द्रवीकरण-रोधी अवश्य होना चाहिए।
  • द्रवीकरण प्रतिरोधकता में वृद्धि: द्रवीकरण प्रवण मृदा की परत को स्थायित्व प्रदान करने हेतु मृदा में ग्राउट (grout) भरकर मौजूदा इमारतों को क्षतिग्रस्त होने से बचाया जा सकता है।
  • मृदा सघनीकरण (soil compaction) तकनीकी को अपनाकर: मृदा की शक्ति और गुणवत्ता में वृद्धि करने हेतु वाइब्रो कॉम्पैक्शन (डेप्थ वाइब्रेटरों के माध्यम से मृदा का सघनीकरण), डाइनैमिक कॉम्पैक्शन तथा वाइब्रो स्टोन कॉलम जैसे उपायों को अपनाना।
  • भूकंप निकास: ये एक वाइब्रेटिंग मैन्ड्रल (धुरे) के साथ ग्रिड पैटर्न में स्थापित लहरदार पाइप होते हैं, जो एक फ़िल्टर फैब्रिक में लिपटे हुए होते हैं। ये भूकम्प के दौरान अतिरिक्त रंध्र दबाव के तीव्र गति से निकास हेतु एक मार्ग प्रदान करते हैं, जिससे द्रवीकरण को कम करने हेतु पर्याप्त निस्सरण क्षमता प्राप्त हो जाती है।

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