महात्मा गांधी तथा रवींद्रनाथ टैगोर के विचार : शिक्षा

प्रश्न: “कई अर्थों में रवींद्रनाथ टैगोर और महात्मा गांधी शिक्षा के बारे में एक जैसा सोचते थे। हालाँकि, उनमें अंतर भी थे।” स्पष्ट कीजिए। (150 words)

दृष्टिकोण

  • शिक्षा प्रणाली पर महात्मा गांधी तथा रवींद्रनाथ टैगोर के विचारों का उल्लेख करते हुए भूमिका लिखिए।
  • उनके विचारों में समानताओं तथा असमानताओं का विश्लेषण कीजिए।
  • एक उपयुक्त निष्कर्ष प्रस्तुत करते हुए उत्तर का समापन कीजिए।

उत्तर

महात्मा गांधी तथा रवींद्रनाथ टैगोर दोनों शिक्षा को मानवीय मस्तिष्क तथा चेतना के विकास के एक उपकरण के रूप में देखते थे तथा उनका मानना था कि साक्षर होने या केवल लिखने-पढ़ने की प्रक्रिया को ही शिक्षा नहीं माना जा सकता है।

इस संदर्भ में: गांधीजी के विचार:

  • महात्मा गांधी का मानना था कि औपनिवेशिक शिक्षा ने भारतीयों के मस्तिष्क में हीनता की भावना का विकास किया है।
  • इस कारण वे पश्चिमी संस्कृति को श्रेष्ठतर समझने लगे और उनमें अपनी संस्कृति के प्रति गौरव की भावना समाप्त हो गई।
  • परिणामस्वरूप शिक्षित भारतीय ब्रिटिश शासन की प्रशंसा करने लगे।
  • उन्होंने इस बात पर अत्यधिक बल दिया कि शिक्षा का माध्यम भारतीय भाषा होना चाहिए, क्योंकि अंग्रेज़ी शिक्षा जन सामान्य को एक दूसरे से जोड़ नहीं पाती।
  • उनके विचार में पश्चिमी शिक्षा वास्तविक अनुभवों तथा व्यावहारिक ज्ञान की बजाय पढ़ने और लिखने (अर्थात् सैद्धांतिक ज्ञान) पर केन्द्रित थी तथा इस कारण इसमें कौशल विकास का अभाव है।

टैगोर के विचार:

  • टैगोर के अनुसार, बाल्यावस्था में विद्यालयी शिक्षा प्रणाली के कठोर तथा सीमाबद्ध अनुशासन के बजाय स्व-अध्ययन पर जोर दिया जाना चाहिए।
  • शिक्षक को बालक को समझने हेतु अधिक कल्पनाशील होना चाहिए ताकि वह उनकी जिज्ञासाओं को विकसित करने में सहायता कर सके।
  • उनके विचार में रचनात्मक शिक्षा को केवल प्राकृतिक परिवेश में ही प्रोत्साहित किया जा सकता है।
  • उन्होंने शांति निकेतन में कला, संगीत तथा नृत्य की शिक्षा के साथ विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी की शिक्षा प्रदान करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

उनके विचारों में समानताएं:

  • दोनों का यह विश्वास था कि मानव व्यक्तित्व के समन्वित विकास के एक साधन के रूप में शिक्षा अत्यंत आवश्यक है।
  • दोनों का यह मानना था कि शिक्षा व्यावहारिक ज्ञान से अवश्य संबद्ध होनी चाहिए तथा शिक्षा में मातृभाषा के महत्व पर विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
  • दोनों ने ही औपनिवेशिक शिक्षा प्रणाली की आलोचना की।

उनके विचारों में असमानताएं :

  •  महात्मा गांधी पश्चिमी शिक्षा के कटु आलोचक थे, परन्तु रवींद्रनाथ टैगोर पश्चिमी शिक्षा के सर्वोत्तम तत्वों को भारतीय शिक्षा प्रणाली में समाहित करना चाहते थे।
  • महात्मा गाँधी मशीनों एवं प्रौद्योगिकी के आलोचक थे, जबकि रवींद्रनाथ टैगोर परम्परागत ज्ञान के साथ आधुनिक विज्ञान की शिक्षा में भी विश्वास करते थे।
  • टैगोर ने शिक्षा के साधन के रूप में जिज्ञासा सृजित करने की प्लेटो की पद्धति को अपनाया, किन्तु महात्मा गाँधी अपनी “नई तालीम” की अवधारणा के माध्यम से क्रियाकलाप के माध्यम से शिक्षा’ (learning by activity) में विश्वास करते थे।

इस प्रकार, टैगोर और गांधीजी के शिक्षा सम्बन्धी विचारों में समानताएं तथा असमानताएं दोनों विद्यमान थीं। इस सम्बन्ध में उनके विचार उनकी भिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक विचारों तथा जीवन के अनुभवों से प्रभावित थे।

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