महासागरीय धाराओं और उनकी विविधताओं की संक्षिप्त चर्चा

प्रश्न: वे कौन-से प्राथमिक बल हैं जो महासागरों में जल का समुद्री धाराओं के रूप में संचलन प्रारंभ करते हैं ? साथ ही, उदाहरण देते हुए, मानव गतिविधियों पर महासागरीय धाराओं के प्रभावों पर भी प्रकाश डालिए .

दृष्टिकोण:

  • महासागरीय धाराओं और इनकी विविधताओं की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
  • उन प्राथमिक बलों की चर्चा कीजिए जो महासागरों में जल का धाराओं के रूप में संचलन प्रारंभ करते हैं। 
  • मानवीय गतिविधियों पर समुद्र की धाराओं के प्रभावों को उपयुक्त उदाहरणों के साथ रेखांकित कीजिए।

उत्तर:

महासागरीय धारा, निश्चित मार्ग और दिशा में जल के अत्यधिक मात्रा के नियमित प्रवाह को संदर्भित करती है। महासागरीय धाराओं को निम्नलिखित प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है:

  • उनकी गहराई के आधार पर ऊपरी अथवा सतही जलधारा (surface currents) और गहरी जलधारा (deep water currents) के रूप में।
  • तापमान के आधार पर ठंडी धाराओं और गर्म धाराओं के रूप में।

जल के संचलन को प्रारंभ करने और महासागरीय धाराओं को प्रभावित करने वाले प्राथमिक बल निम्नलिखित हैं:

  • पवन: सतही धाराओं के निर्माण में पवन एक महत्वपूर्ण कारक है। महासागर की सतह पर प्रवाहित होने वाली पवन जल को गतिमान करने हेतु जल को अपने साथ प्रवाहित करती है। महासागरीय परिसंचरण प्रतिमान पृथ्वी के वायुमंडलीय परिसंचरण प्रतिमान के लगभग समान होता है।
  • महासागरीय नितल स्थलाकृति: यदि महासागर नितल घाटी या गर्त की भांति “अवतलीय संरचना युक्त” होता है तो गतिमान जल नीचे की ओर प्रवाहित होगा। यदि समुद्र के तल में कोई कटक या पर्वत विद्यमान है तो उस पर प्रवाहित होने वाला जल ऊपर की ओर प्रवाहित होगा। जल प्रवाह की दिशा के आकस्मिक रूप से ऊपर या नीचे की ओर होने वाला परिवर्तन जल विस्थापन का कारण बनता है, जिससे जलधारा की उत्पति होती है।
  • सौर ऊर्जा से तापन के कारण जल का प्रसार होता है। यही कारण है कि विषुवत रेखा के निकट समुद्र जल का स्तर मध्य अक्षांशों की तुलना में लगभग 8 सेमी उच्च होता है। इससे अत्यल्प प्रवणता उत्पन्न होती है तथा जल ढाल के माध्यम से नीचे की ओर प्रवाहित होता है।
  • गुरुत्वाकर्षण, जल को नीचे की ओर खींचता है, जिससे एक प्रवणता उत्पन्न होती है, जो अंततः जल धारा का निर्माण करती है।

महासागरीय धाराओं के प्रभाव:

महासागरीय धाराओं के विशाल प्रवाह, ताप के वितरण में एक महत्वपूर्ण घटक हैं जो विभिन्न मानव गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली क्षेत्रीय मौसमी दशाओं को प्रभावित करते हैं-

  • गर्म जलधाराएं उच्च अक्षांशों में कुछ क्षेत्रों को अधिवास योग्य बनाने में सहायक होती हैं। उदाहरण के लिए गल्फ स्ट्रीम, मेक्सिको की खाड़ी से अमेरिका के पूर्वी तट के सहारे होते हुए अंतत: ब्रिटिश द्वीप समूह तक गर्म जल धारा को प्रवाहित करती है।
  • गर्म महासागरधाराएँ तीव्र रूप से वाष्पित होने वाले गर्म जल को प्रवाहित करती हैं, जिससे समुद्र तट पर गहन वर्षा हो सकती है और तटीय क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों में सहायता प्राप्त हो सकती है।
  • गर्म और ठंडी धाराओं के मिश्रण से मछलियों की संख्या में वृद्धि को बढ़ावा मिलता है, क्योंकि इससे ऑक्सीजन की आपूर्ति में सहायता प्राप्त होती है जो मछलियों के प्राथमिक खाद्य अर्थात पादपप्लवकों के विकास हेतु अनुकूल होती है। इसलिए विश्व के सर्वश्रेष्ठ मत्स्यन क्षेत्र मुख्य रूप से इन मिश्रण क्षेत्रों में विद्यमान हैं। उदाहरण के लिए, ब्राजील धारा के साथ फॉकलैण्ड धारा अथवा क्यूरोशिओ धारा के साथ ओयाशिओ धारा का मिश्रण है।
  • महासागरीय धाराएं कई क्षेत्रों में उद्वेलन का कारण बनती हैं जैसे कि पेरू के तट से कुछ दूर, जहां जल को तट से दूर प्रवाहित करने वाली सतहीय धाराएं पोषक तत्वयुक्त जल को समुद्र की गहराइयों से उद्वेलित करने के लिए प्रेरित करती हैं। इन क्षेत्रों में पोषक तत्वों की प्रचुरता से, केल्प संस्तरों और समुद्री मात्स्यिकी के लिए उर्वर क्षेत्र का निर्माण होता है।

दूसरी ओर यह कुछ क्षेत्रों में मानव गतिविधियों को भी बधित कर सकती हैं। उदाहरण के लिए ठंडी धाराएं तटों के तापमान को उल्लेखनीय रूप से शीतल करती हैं तथा संघनित आर्द्रता की मात्रा कृषि गतिविधि के लिए अनुकूल नहीं होती है। यही कारण है कि सामान्य रूप से महाद्वीपों के पश्चिमी किनारों पर मरुस्थल सदृश स्थितियां पाई जाती हैं जहां शीत धाराएँ निकटवर्ती तट पर शुष्कन-प्रभाव उत्पन्न करती हैं। उदाहरण के लिए चिली तट के किनारे प्रवाहित होने वाली पेरू की ठंडी जलधारा।

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