ई-कॉमर्स : वैश्विक स्तर पर भारत के हितों की सुरक्षा

प्रश्न: ई-कॉमर्स पर एक व्यापक नीति की आवश्यकता का इसके घरेलू विस्तार के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर भारत के हितों की सुरक्षा को देखते हुए परीक्षण कीजिए।

दृष्टिकोण

  • भारत में ई-कॉमर्स उद्योग की संभावनाओं और क्षमता का संक्षिप्त में वर्णन कीजिए।
  • इस क्षेत्र के घरेलू विस्तार के साथ-साथ सुरक्षा हितों को देखते हुए ई-कॉमर्स पर एक व्यापक नीति की आवश्यकता का वर्णन कीजिए।

उत्तर

भारतीय ई-कॉमर्स बाजार के 2017 के 38.5 बिलियन अमेरिकी डॉलर से बढ़कर 2026 तक 200 बिलियन अमेरिकी डॉलर तक हो जाने की उम्मीद है। ऐसे परिदृश्य ने भारत में व्यापार करने के तरीके को परिवर्तित किया है।

ई-कॉमर्स पर एक व्यापक नीति की आवश्यकता:

  • IT अधिनियम, FDI नीति आदि में निरूपित, भारत की मौजूदा ई-कॉमर्स नीति में समग्रता, अंतर्विभागीय समन्वय और प्रवर्तन क्षमताओं का अभाव है।
  • घरेलू व्यवसायों को संरक्षण प्रदान करने के लिए लघु और मध्यम उद्यम (SME) क्षेत्रक को वैश्विक कॉर्पोरेट ओलिगार्की (कुलीनतंत्र) के खतरों और कैपिटल डंपिंग से संरक्षित किए जाने की आवश्यकता है।
  • चीन की ई-कॉमर्स नीति, जिसने अलीबाबा जैसी वैश्विक दिग्गज कंपनियों के उदय को प्रोत्साहित किया है. के विपरीत भारत इस प्रकार का परिवेश प्रदान करने में विफल रहा है।
  • ग्लोबल टेक जायंट, जैसे- अमेज़न, Airbnb, ऊबर आदि के द्वारा भारत के ई-कॉमर्स क्षेत्र पर वर्चस्व स्थापित कर लिया गया है। किसी भी वैश्विक दिग्गज कंपनी के साथ समान स्तर पर प्रतिस्पर्धा करने हेतु घरेलू कंपनियों को सक्षम बनाये जाने की आवश्यकता है।
  • उन मामलों में कपटपूर्ण कॉर्पोरेट संरचना को रोकने के लिए, जहां वैश्विक दिग्गज अपने घरेलू ऑपरेटरों के माध्यम से देश के घरेलू कानूनों की मूल भावना को दरकिनार करने में सफल रहे हैं, जबकि संभवतः वे कागजों पर इन कानूनों का पालन करते प्रतीत होते हैं।
  • प्रिडेटरी प्राइसिंग (अत्यधिक कम मूल्य) और अत्यधिक छूट से पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने के लिए।

ई-कॉमर्स पर सुविचारित, व्यापक नीतियों की अनुपस्थिति का भारत पर दीर्घकालिक गंभीर और हानिकारक प्रभाव होगा। चीन और अमेरिका के समान, भारत को नीति निर्धारण के लिए एक परिणाम-आधारित दृष्टिकोण को अपनाने की आवश्यकता है।

इसे देखते हुए, हाल ही में भारत सरकार द्वारा एक नई ई-कॉमर्स FDI नीति प्रस्तावित की गई है। इसके अंतर्गत भारत में उत्पादित वस्तुओं की ऑनलाइन बिक्री को सीमित इन्वेंटरी-आधारित B2C (बिज़नेस टू कंज्यूमर) मॉडल के माध्यम से प्रोत्साहित किया जाएगा तथा विदेशी ई-कॉमर्स कंपनियों को उनके भारतीय समकक्षों के समान स्तर पर लाया जायेगा। इस प्रकार, वैश्विक स्तर पर भारत के हितों को सुरक्षित करने और इस क्षेत्र की सतत वृद्धि सुनिश्चित करने हेतु ई-रिटेल से संबंधित एक व्यापक नीति का निर्माण करना समय की आवश्यकता है।

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