चीन में सांस्कृतिक क्रांति: “ग्रेट लीप फॉरवर्ड” (1958-60)

प्रश्न:चीन में सांस्कृतिक क्रांति व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा का एक उदाहरण थी, जिससे व्यापक विनाश हुआ। टिप्पणी कीजिए।

दृष्टिकोण

  • चीन में सांस्कृतिक क्रांति की संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
  • व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा के विकास पर प्रकाश डालिए।
  • चर्चा कीजिए कि किस प्रकार व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा ने व्यापक विनाश को प्रेरित किया।

उत्तर

सांस्कृतिक क्रांति की उत्पत्ति के कारणों को उसकी “ग्रेट लीप फॉरवर्ड” (1958-60) अभियान की विफलता और तत्पश्चात आर्थिक संकट के पश्चात सरकार में माओ की स्वयं की स्थिति के कमजोर होने के रूप में खोजा जा सकता है।

सांस्कृतिक क्रांति 

  • सांस्कृतिक क्रांति माओ द्वारा मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा पर ‘ग्रेट लीप’ स्थापित करने का प्रयास था। इस क्रांति के माध्यम से, माओ ने लोगों से अपील की कि वे ‘दक्षिणपंथियों के मध्य ‘परिवर्तनवादी’ प्रवृत्ति का विरोध करें, जो कम्यून के प्रकार्यों को जारी रखने हेतु प्रोत्साहन प्रदान करने और रूसी मॉडल पर औद्योगिकीकरण के साथ आगे बढ़ने हेतु एक विशेषज्ञ प्रबंधकीय वर्ग की स्थापना के लिए तर्क प्रस्तुत कर रहे थे।

व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा

  • इस क्रांति की प्रमुख विशेषताओं में से एक माओ ज़ेदोंग या माओ त्से-तुंग के व्यक्तित्व के प्रति निष्ठा थी, जो रेड गार्ड्स (विश्वविद्यालय और हाई स्कूल के छात्रों के उग्रवादी समूहों से गठित अर्द्धसैनिक इकाइयाँ), प्रो-माओ प्रचार और सूचना पर चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नियंत्रण जैसे कट्टरतावादी दृष्टिकोण से प्रेरित था।
  • माओ के प्रति निष्ठा उनके नेतृत्व के कारण क्रांति के दौरान तीव्र हो गई थी और जिसने उन्हें सम्मान और प्रशंसा का विषय बनाया।
  • माओ की उपलब्धियों को अतिरंजित किया गया जबकि उनकी कमियों को छुपाया गया, जिसके परिणामस्वरूप उनका पार्टी और देश पर पूर्ण नियंत्रण स्थापित हो गया।

व्यापक विनाश

  • क्रांति के दौरान, रेड गार्ड्स ने प्राधिकारी वर्ग, पार्टी के अधिकारियों और समाज के अभिजात वर्ग को लक्षित किया था। इनके द्वारा बीजिंग और अन्य नगरों में व्यापक पैमाने पर हत्याएं की गई। उन्होंने एक-दूसरे पर हमला भी किया।
  • गुटबंदी और सामूहिक हत्याओं में कई गुना वृद्धि हुई। लाखों लोग मारे गए और अन्य कई लाखों लोगों पर मुकदमा चलाया गया।
  • यद्यपि यह क्रांति एक दशक तक जारी रही, लेकिन शुरुआती कुछ वर्षों में ही व्यापक पैमाने पर हिंसक घटनाएँ हुई थी। यह क्रांति 1976 में माओ की मृत्यु और तत्पश्चात उनकी पत्नी सहित ‘गैंग ऑफ फोर’ की गिरफ्तारी के साथ समाप्त हो गई।
  • इस प्रकार सांस्कृतिक क्रांति मुख्य रूप से माओ त्से -तुंग के कम होते व्यक्तिगत प्राधिकार को पुनः स्थापित करने के लिए थी और यह क्रांति 1976 में माओ की मृत्यु तक विभिन्न चरणों में जारी रही थी। इस क्रांति का संताप और हिंसक विरासत की छाप अभी भी चीनी राजनीति और समाज में व्याप्त है।

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