केस स्टडीज- पत्रकारिता की नैतिकता एवम अनुच्छेद 19 (1) (a)

प्रश्न: आप नागरिकों के बायोमेट्रिक आंकड़ों के संग्रहण ,भंडारण और संरक्षण हेतु उत्तरदायी एक सरकारी एजेंसी के एक वरिष्ठ अधिकारी है। परिचालन विस्तार के कारण एजेंसी,आंकड़ा संग्रह हेतु तृतीय पक्ष को नियोजित करता है। तृतीय पक्ष द्वारा पैसा के बदले सुरक्षा उल्लंघनों और आंकड़ों के लीकेज की सूचनाएं मिली हैं। एक प्रमुख समाचार पत्र के एक पत्रकार द्वारा एक स्टिंग ऑपरेशन किया जाता है और चल रहे भ्रष्टाचार को प्रदर्शित करने वाले एवं सार्वजनिक आंकड़े सुरक्षित रखने में एजेंसी की अक्षमता उजागर करने वाले कुछ आंकड़े आम जनता के सम्मुख जारी किए जाते हैं। आपको एजेंसी के अध्यक्ष द्वारा इसे अनधिकृत पहुँच वाला का एक कार्य मानते हुए पत्रकार के विरुद्ध एक FIR दर्ज कराने और और उसके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई करने के लिए कहा जाता है।

(a) क्या आप वरिष्ठ पत्रकार के विरुद्ध अध्यक्ष द्वारा चाही गयी कार्रवाई से सहमत है? अपने उत्तर के लिए उचित कारण बताइए।

(b) यदि आप असहमत है, तो आपकी क्या कार्यवाही होगी ?

(c) क्या आप मानते हैं कि पत्रकार का कार्य उचित है ?

दृष्टिकोण

  • भाग (a) के लिए, चर्चा कीजिए कि क्या आप अध्यक्ष के विचार से सहमत हैं। उचित कारण दीजिए। चर्चा कीजिए कि किस प्रकार प्रेस और वाक की स्वतंत्रता पत्रकारों को इस तरह के स्टिंग ऑपरेशन करने की अनुमति प्रदान करती है।
  • भाग (b) के लिए, भाग (a) के अनुरूप उत्तर लिखिए एवं तदनुसार तर्क दीजिए।
  • भाग (c) के लिए, उचित कारणों सहित निरीक्षण कीजिए कि पत्रकार द्वारा कोई सतर्कता अपनाई जानी चाहिए या नहीं। व्यापक संदर्भ में स्टिंग ऑपरेशन की चर्चा कीजिए।

उत्तर

पत्रकारिता की नैतिकता सत्य को सामने लाना और यदि कुछ गलत हो रहा है तो उसका खुलासा करना है। एक स्वतंत्र मीडिया,लोक अधिकारियों के गलत कार्यो की जांच करते हुए लोगों को शिक्षित कर लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाता है। अनुच्छेद 19 (1) (a) के तहत संविधान द्वारा प्रेस की स्वतंत्रता की गारंटी प्रदान की गयी है। हालांकि, कानून-प्रवर्तन के स्वीकार्य सिद्धांत के रूप में स्टिंग के प्रयोग पर प्रश्न चिह्न लग सकता है और विधिक/न्यायिक जांच की आवश्यकता हो सकती है।

इस विशेष मामले में, हितधारकों में पत्रकार,सरकारी एजेंसी के अधिकारी और देश के नागरिक सम्मिलित हैं जिनके निजी डेटा को सरकार को सौंपा गया है। अध्यक्ष ने अनधिकृत पहंच के आधार पर पत्रकार के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के लिए कहा है। अनधिकृत पहुंच के आधार पर पत्रकार के विरुद्ध अध्यक्ष द्वारा की गयी कार्रवाई विधिक प्रशासनिक आवश्यकता है और संगठनात्मक नैतिकता को बनाए रखने के लिए इसका अनुसरण किया जाना चाहिए।

जैसा कि पहले उल्लेख किया गया है, अध्यक्ष द्वारा की गई कार्रवाई का कानूनी आधार है और इसलिए मैं उनसे सहमत हूं। लेकिन केवल पत्रकार तक कार्रवाई को सीमित करना अदूरदर्शिता प्रदर्शित कर रहा है और सरकारी एजेंसी की अखंडता पर संदेह व्यक्त करता है। अतः मैं निम्नलिखित कार्यवाही का अनुसरण करूंगा:

  • अनधिकृत पहुंच के आधार पर पत्रकार के विरुद्ध प्रथिमिकी दर्ज करना
  • पत्रकार की भूमिका (एक व्हिसलब्लोवर या एक लाभार्थी) को समझने के लिए एक जांच समिति का गठन करना
  • पत्रकार की रिपोर्ट द्वारा उठाए गए दावों और सम्बंधित मुद्दों को सत्यापित करने के लिए तीसरे पक्ष द्वारा कार्यशैली की जांच करना।
  • जाँच के आधार पर व्यवहारिक कानूनी कार्रवाईयों हेतु प्रयास करना।
  • सभी कमियों को नियंत्रित करने हेतु दीर्घकालिक तंत्र पर कार्य करना और इस प्रकार की घटनाओं के पुनरावृत्ति को रोकने के लिए संगठनात्मक व्यवस्था में पर्याप्त प्रतिक्रिया/ शिकायत /सुझाव तंत्र प्रदान करना।

मेरा मानना है कि, इस तरह की कार्यवाही न केवल कानून व्यवस्था को बनाए रखेगी बल्कि सरकारी एजेंसी में लोगों के विश्वास की बहाली भी सुनिश्चित करेगी।

प्रश्नगत स्टिंग ऑपरेशन न्यायोचित है या नहीं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि अन्य उपलब्ध विधिक तंत्र समाप्त हो गए अथवा नहीं। इसके साथ ही यह पत्रकार के वास्तविक उद्देश्य पर भी निर्भर करता है। उदाहरण के लिए, व्हिसलब्लोवर प्रोटेक्शन एक्ट, 2011 लोक सेवकों द्वारा कथित भ्रष्टाचार और सत्ता के दुरुपयोग की जांच करने हेतु एक तंत्र प्रदान करता है, और सरकार में कथित भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले किसी भी व्यक्ति को संरक्षण प्रदान करता है।

पत्रकारिता की भूमिका सार्वजनिक एजेंसियों को जवाबदेह बनाए रखने के लिए लोगों की क्षमता का निर्माण करना है। केवल सनसनीखेज खबरों हेतु स्टिंग ऑपरेशन पत्रकारिता की नैतिकता के विरुद्ध है। पत्रकारिता के अधिकारियों को इस तथ्य के प्रति संवेदनशील होना चाहिए कि स्टिंग ऑपरेशन सार्वजनिक अशांति का कारण बन सकता है और किसी के निजता के अधिकार का उल्लंघन करके हानि पहुंचा सकता है।

इस प्रकार, मीडिया को संविधान और अन्य विधियों द्वारा निर्धारित सीमाओं के भीतर कार्य करना चाहिए। ऐसे संवेदनशील मामलों पर रिपोर्ट करते समय उन्हें राज्य और उसके नागरिकों की सुरक्षा के प्रति सावधान रहना चाहिए। चौथे स्तंभ को एक उत्तरदायी भूमिका का निर्वहन करना चाहिए और स्वयं के लिए उत्तरदायित्व के उच्च मानकों को बनाए रखना चाहिए। इससे न केवल इसकी स्वतंत्रता सुनिश्चित होगी बल्कि इसमें लोगों का विश्वास भी बना रहेगा।

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