केस स्टडीज : बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016

प्रश्न: आप एक ऐसे जिले के जिला मजिस्ट्रेट हैं जो माचिस और पटाखे जैसी दहनशील वस्तुएं बनाने के लिए प्रसिद्ध है। बाल श्रम (निषेध एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2016 के अनुसार ऐसी खतरनाक गतिविधियों में बच्चों का नियोजन निषिद्ध है। इस संबंध में, सरकार ने एक अधिसूचना भी जारी की है कि इन विनिर्माण इकाइयों के स्वामियों को वार्षिक रूप से अपने कर्मचारियों के प्रोफाइल पर एक प्रतिवेदन (रिपोर्ट) प्रस्तुत करना होगा क्योंकि इन उद्योगों में बाल श्रम प्रचलित रहा है। सरकार के निर्देशों का पालन करते हुए, ये विनिर्माण इकाइयां वार्षिक रूप से ऐसा प्रतिवेदन प्रकाशित करती हैं और बाल श्रम का नियोजन सफलतापूर्वक समाप्त करने का दावा करती हैं। हालांकि, आपके संज्ञान में यह लाया गया है कि ये कंपनियां इस कानून की कमियों का लाभ उठा रही हैं। वे स्वतंत्र ठेकेदारों से अपनी भर्तियां आउटसोर्स कर रही हैं जो व्यवसाय में परिवारों को संलग्न करते हैं। ये परिवार अपनी आय के अनुपूरक के तौर पर बाल श्रम का उपयोग करना जारी रखे हुए हैं और साथ ही श्रम को लागत प्रतिस्पर्धी भी बनाए रखते हैं ताकि वे ऐसे और अधिक अनुबंध प्राप्त कर पाएं। चूंकि वे आधिकारिक रूप से कंपनियों के भुगतान रजिस्टर पर दर्ज नहीं हैं, इसलिए वे कानूनी दायित्वों से भी मुक्त हैं।

(a) इस प्रकरण में निहित नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।

(b) आप यह समस्या कैसे सुलझाएंगे और आपकी कार्यवाही के प्रमुख तत्व क्या होंगे ?

दृष्टिकोण

  • बाल श्रम की प्रथा और इसके प्रभावों का संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  • दिए गए मामले में इस प्रथा से सम्बद्ध नैतिक मुद्दों की पहचान कीजिए।
  • स्थिति में सुधार करने संबंधी उपायों पर चर्चा कीजिए।

उत्तर

बच्चों द्वारा पारिवारिक श्रम और उद्यम में योगदान करना सभ्यता के आरंभ से ही विद्यमान है। औपचारिक शिक्षा, प्रौद्योगिकी एवं प्रगति के साधनों के प्रति जागरुकता के आगमन के साथ, यह अनुभव किया गया कि भावी पीढ़ी के हित शिक्षा, स्वास्थ्य और उन्नति के लिए आवश्यक कौशल प्राप्त करने में निहित हैं। यह एक दुर्भाग्यपूर्ण वास्तविकता है कि बच्चों को प्रायः शारीरिक, मनोवैज्ञानिक और नैतिक रूप से हानि पहुंचाने वाले कार्य करने के लिए बाध्य किया जाता है। भारत अनेक कार्यरत कानूनों और नीतियों के बावजूद बाल श्रम की समस्या का सामना कर रहा है। बाल श्रम निर्धनता का कारण और परिणाम दोनों ही है। बच्चे शिक्षा प्राप्त करने के अवसर से वंचित हो रहे हैं, जो पीढ़ी दर पीढ़ी परिवार की निर्धनता में वृद्धि कर रहा है। यह सुनिश्चित करना राज्य का दायित्व है कि कोई भी बच्चा खतरनाक रोजगार में नियोजित न किया जाए, साथ ही यह कि वह बेहतर भविष्य के अवसर से वंचित न हो।

(a) इस प्रकरण में निहित नैतिक मुद्देः 

  • आजीविका का मुद्दा: आजीविका के साधनों के अभाव में, परिजन नियोजन संबंधी खतरों से अवगत होने के बावजूद श्रम में सहायता प्रदान करने हेतु अपने बच्चों का उपयोग करते हैं। यदि अधिकांश मामलों में नहीं भी, तो भी अनेक मामलों में अधिकारों और ऐसी परिस्थितियों में बच्चों के लिए सर्वोत्तम क्या होगा, इस सम्बन्ध में अनभिज्ञता विद्यमान होती है। किसी व्यक्ति को बच्चों की सहायता न लेने के लिए बाध्य करना स्थितियों को प्रभावित कर सकता है और आजीविका संबंधी संघर्ष को बढ़ा सकता है।
  • मानवता को एक साधन के रूप में मानना: इस प्रकरण में बच्चों को आर्थिक लक्ष्यों की प्राप्ति का साधन माना जा रहा है और उन्हें संकल्प स्वातंत्र्य के आधार पर निर्णय लेने का अवसर नहीं प्रदान किया जा रहा है, जो संपूर्ण प्रक्रिया को अनैतिक बनाता है। यह उनके विकास में बाधा उत्पन्न करता है, जिससे संभावित रूप से आजीवन बनी रहने वाली कोई शारीरिक या मनोवैज्ञानिक क्षति पहुंच सकती है। साथ ही यह उनकी गरिमा और आत्मविश्वास को भी क्षति पहुंचाता है तथा उन्हें असामाजिक गतिविधियों में शामिल होने के प्रति भी सुभेद्य बनाता है।
  • विनिर्माताओं द्वारा जानबूझकर की जाने वाली उपेक्षा: किसी भी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से बचने के लिए चातुर्यपूर्ण तरीकों का उपयोग।
  • भावी पीढ़ियों पर पड़ने वाला प्रभाव: उन्हें प्रदत्त परिवेश, उनकी भावी पीढ़ियों के साथ समान व्यवहार किए जाने को वैधता प्रदान करता है।
  • समाज के साथ-साथ राष्ट्र के प्रति किसी कंपनी/संस्था के दायित्वों की अवहेलना: कई कंपनियों और लोगों द्वारा बाल श्रम का उपयोग राष्ट्र के दीर्घकालिक विकास को प्रभावित करता है। साथ ही, यह परिवार को निर्धनता के चक्र से निकालने में भी सहायक नहीं होता है।

(b) इस मामले में, हितधारकों में शामिल हैं:

  • वे बच्चे, जिनके अधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है।
  • बच्चों के परिजन या परिवार के सदस्य, जिनके लिए बच्चे अतिरिक्त कार्यबल के रूप में कार्य कर रहे हैं और पारिवारिक आय में योगदान दे रहे हैं।
  • पटाखों का निर्माण करने वाली कंपनियां।
  • सरकार, जिसका उद्देश्य बाल श्रम का उन्मूलन करना है।

प्रत्येक हितधारक के संबंध में मुद्दों को ध्यान में रखते हुए, कार्रवाई के अंतर्गत निम्नलिखित मुख्य बिंदु सम्मिलित होंगे: 

  • जोखिमपूर्ण कार्यों में बच्चों के नियोजन की जांच करने के लिए सख्त निगरानी और नियमित जांच। बाल श्रम की सत्यता और उसके विस्तार का पता लगाने के लिए जांच की जानी चाहिए। अपराधियों, मध्यस्थों और कारखाना मालिकों की पहचान की जानी चाहिए जो जोखिमपूर्ण कार्यों में परिवारों और उनके बच्चों के नियोजन के लिए उत्तरदायी हैं और उनके विरुद्ध कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • कंपनी के साथ कार्य करने वाले उप-ठेकेदारों (sub-contractors) को विनियमित करना: कमियों के दुरुपयोग की जांच के लिए उप-ठेकेदारों के कार्यों को भी नियमित किया जाना चाहिए। परिवारों को उचित परिश्रम के बिना नियोजित करने के लिए ठेकेदारों को चेतावनी दी जानी चाहिए और उनके विरुद्ध आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • नियमित अनुवर्ती कार्यवाही के साथ बच्चों का पुनर्वास और उनके मध्य जागरुकता का प्रसार: उन्हें बाल श्रम अधिनियम के साथ ही शिक्षा का अधिकार अधिनियम के तहत उन्हें मिलने वाले अधिकारों से अवगत होना चाहिए। जोखिमपूर्ण नियोजन से मुक्त कराए गए बच्चों को नागरिक समाज समूहों, कॉर्पोरेट क्षेत्र और स्थानीय सरकार की भागीदारी के साथ सुव्यवस्थित तरीके से पुनर्वासित किया जाना चाहिए।
  • जहाँ परिवार के वयस्क सदस्यों के श्रम का उत्पादक ढंग से उपयोग किया जा सकता है, वहां आजीविका के वैकल्पिक साधन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। सरकार के विभिन्न कौशल विकास कार्यक्रमों के संबंध में परिवारों के मध्य जागरुकता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
  • परिवारों को शिक्षित करना: ऐसी प्रथाओं में संलग्न परिवारों को कानूनी परिणामों से अवगत कराने की आवश्यकता है (यदि वे पहले से अवगत न हों)।
  • पूर्व में बाल श्रमिक रहे बच्चों को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने हेतु स्कूलों द्वारा विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए और यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि वे समय से पहले स्कूल न छोड़े। इन बच्चों के मध्य व्यावसायिक प्रशिक्षण को प्रोत्साहित किया जाना चाहिए, ताकि बाद में उन्हें इस तरह के जोखिमपूर्ण नियोजन से गरिमामय कार्यों में नियोजित किया जा सके।

इसके अतिरिक्त, बाल श्रम के उन्मूलन हेतु किसी भी प्रकार कि अन्य कमियां, जिनका लाभ कंपनियां उठा रही हों, की पहचान करने के लिए जांच की जानी चाहिए तथा सभी स्तरों पर आपूर्ति श्रृंखला को त्रुटिरहित बनाने के लिए अभिनव उपायों को अपनाया जाना चाहिए। साथ ही, इस मुद्दे के प्रति सहिष्णुता के स्तर को शून्य तक कम किया जाना चाहिए और इस मुद्दे से जुड़ी किसी कार्रवाई में भी यही दृष्टिकोण परिलक्षित होना चाहिए।

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