CAASTA Act का उल्लेख : भारतीय हितों पर प्रतिबंधों के संभावित प्रभावों का विवरण

प्रश्न: चर्चा कीजिए कि अमेरिका द्वारा अपने विरोधियों पर लगाए जाने वाले प्रतिबंध भारत को किस प्रकार प्रभावित करते हैं। CAATSA का उदाहरण लेते हुए, विश्लेषण कीजिए कि किस प्रकार भारत ऐसे प्रतिबंधों की स्थिति में अपने रणनीतिक हितों की रक्षा कर सकता है। (250 शब्द)

दृष्टिकोण

  • एक संक्षिप्त परिचय देते हुए भारतीय हितों पर प्रतिबंधों के संभावित प्रभावों का विवरण दीजिए।
  • CAASTA (Countering America’s Adversaries Through Sanctions Act) का उल्लेख कीजिए और इससे छूट प्राप्त कर राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने में भारत की सफलता को रेखांकित कीजिए।
  • प्रतिबंधों के संदर्भ में अपने हितों की रक्षा करने में भारत के कूटनीतिक प्रयासों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

अमेरिका द्वारा प्रतिबंधों का उपयोग एक महत्वपूर्ण साधन के रूप में अपने विरोधियों को प्रभावहीन बनाने के लिए किया जाता है। अंतरराष्ट्रीय राजनीति में अमेरिका के व्यापक प्रभाव के कारण, प्रत्यक्ष तौर पर प्रतिबंधों का सामना करने वाले देशों के परे अन्य देशों पर भी इन प्रतिबंधों का गंभीर प्रभाव पड़ता है।

भारत पर प्रतिबंधों के संभावित प्रभाव:

  • ईरान में चाबहार बंदरगाह जैसे सामरिक निवेश अपनी पूर्ण क्षमता को प्राप्त नहीं कर पाएंगे।
  • तेल आयातों के मूल्यों में वृद्धि जो घरेलू मुद्रास्फीति के स्तर के साथ-साथ भारतीय रुपये के मूल्य को भी प्रभावित करेगी।
  • व्यापार संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा ,क्योंकि रुपये में भारतीय निवेश करने और नए नए बैंकिंग चैनलों को आरंभ करने की अनुमति प्रदान करने सहित वित्तीय लेन-देन के निपटान के नए तरीके को संस्थागत बनाया जाना आवश्यक होगा।
  • अंतरराष्ट्रीय उत्तर-दक्षिण परिवहन गलियारे (INSTC) की प्रगति अवरुद्ध हो सकती है, विशेषत: यदि इस मार्ग पर अवस्थित किसी देश अथवा INSTC योजना से संबंधित बैंकिंग और बीमा कंपनियों द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने पर अमेरिकी प्रतिबंधों का पालन करने का निर्णय लिया जाता है।
  • नए अंतरराष्ट्रीय समीकरण: शंघाई सहयोग संगठन (SCO) जैसे बहुपक्षीय संगठनों (जिसका नेतृत्व चीन और रूस करते हैं) को अमेरिका विरोधी संगठनों के रूप में देखा जाएगा तथा ये संगठन भारत की अन्य पहलों जैसे – अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और जापान के साथ इंडो पैसिफ़िक क्वाड्रीलैटरल (Indo-Pacific quadrilateral) के विरोध में कार्य करने लगेंगे;
  • नियम-आधारित व्यवस्था की खोज: पूर्व प्रतिबद्धताओं और अंतरराष्ट्रीय समझौतों को पलटने की अमेरिका की नई प्रवत्ति नई दिल्ली को वाशिंगटन के साथ अपने संबंधों की एक नई समझ पर विचार करने के लिए बाध्य करेगी।

जनवरी 2018 में अमेरिकी सीनेट ने काउंटरिंग अमेरिका एडवर्सरीज श्रू सैंक्शन्स एक्ट (CAASTA) पारित किया। इस अधिनियम के अंतर्गत रूस, ईरान और उत्तरी कोरिया को विरोधियों के रूप में चिन्हित किया गया परन्तु ये प्रतिबंध उनके साथ लेन-देन में शामिल तीसरे पक्षों को भी प्रभावित कर सकते हैं। भारत रक्षा सौदों और रक्षा उपकरणों के उन्नयन के लिए रूस पर निर्भर है।

हालांकि, हाल ही में भारत ने CAASTA के तहत भारत के लिए छूट प्राप्त करके एक राजनयिक सफलता हासिल की है क्योंकि अमेरिकी कांग्रेस ने रक्षा व्यय विधेयक पारित किया जो अमेरिका के भारत जैसे रणनीतिक साझेदारों को दंडनीय प्रतिबंधों से छट प्रदान करता है।

प्रतिबंधों के संदर्भ में अपने हितों की रक्षा करने के लिए भारत के राजनयिक प्रयास

  • रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखना: भारत सरकार ने UNSC द्वारा अनुमोदित प्रतिबंधों को छोड़कर किसी भी देश द्वारा एकतरफा आरोपित प्रतिबंधों का पालन न करने की नीति का अनुसरण किया है। भारत ने अपनी रणनीतिक बाध्यता के कारण इन प्रतिबंधों का समर्थन करने से मना कर दिया है और कहा है कि ऐसे मुद्दों को द्विपक्षीय कूटनीतिक समझ के माध्यम से हल किया जा सकता है।
  • भारतीय डायस्पोरा के साथ जुड़ाव: उदाहरण के लिए U.S में भारत की सशक्त लॉबी का उपयोग भारत द्वारा असैन्य परमाणु समझौते के अंतर्गत रियायत प्राप्त करने हेतु अमेरिकी संसद पर दबाव डालने के लिए किया गया था।
  • विभिन्न क्षेत्रों में अमेरिका के साथ आर्थिक और सैन्य सहयोग में वृद्धि: रूस के साथ भारत का रक्षा व्यापार 79% से घट कर 62% के स्तर पर आ गया है। इस प्रकार रक्षा के क्षेत्र में रूस पर हमारी निर्भरता कम हो गयी है। वहीं दूसरी ओर अमेरिका से रक्षा आपूर्ति पिछले पांच वर्ष में 2.4% से बढ़कर 15% हो गई है।
  • भारत और USA बहुआयामी और आशाजनक संबंध साझा करते हैं। हालांकि संयुक्त राज्य अमेरिका द्वारा आरोपित प्रतिबन्धों का अन्य देशों के साथ भारत के संबंधों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस संदर्भ में 2 + 2 वार्ता जैसे मौजूदा मंचों के माध्यम से निरंतर संपर्क के साथ-साथ वार्षिक शिखर सम्मेलन स्तर की वार्ता की संभावनाएं तलाश करना सहायक सिद्ध हो सकता है।

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