भूकंपीय तरंगों की परिभाषा : भूकंप विज्ञान (सिस्मोलॉजी) के माध्यम से अध्ययन की जाने वाली विभिन्न प्रकार की तरंगों और इनके अनुप्रयोग

प्रश्न: व्याख्या कीजिए कि कैसे भूकंपीय तरंगों के विश्लेषण से पृथ्वी के आंतरिक भाग की वैज्ञानिक समझ में सुधार आया है। (150 शब्द)

दृष्टिकोण

  • भूकंपीय तरंगों की परिभाषा के साथ शुरुआत कीजिए।
  • भूकंप विज्ञान (सिस्मोलॉजी) के माध्यम से अध्ययन की जाने वाली विभिन्न प्रकार की तरंगों और इनके अनुप्रयोगों को रेखांकित कीजिए।
  • आधुनिक अनुप्रयोगों के साथ निष्कर्ष दीजिए।

उत्तर

भूकंपीय गतिविधियों का विश्लेषण पृथ्वी के आंतरिक भाग का अध्ययन करने वाले अप्रत्यक्ष स्रोतों में से एक है। एक भूकंपीय तरंग भूकंप, ज्वालामुखीय विस्फोट, मैग्मा के संचलन, वृहत भूस्खलन या विस्फोट इत्यादि के आवेग द्वारा उत्पन्न प्रत्यास्थ तरंग होती है। ये तरंगे ऊर्जा का रूप होती हैं जो पृथ्वी के आंतरिक (भूगर्भ) भाग से होते हुए गति करती हैं। इन्हें सिस्मोग्राफ (seismograph) नामक भूकंपमापी यंत्र अभिलेखित करता है। भूकंपीय तरंगें जब विभिन्न प्रकार के पदार्थों से होकर गुजरती हैं तो वे भिन्न-भिन्न गति से संचालित होती हैं, इसलिए सिस्मोग्राफ के अध्ययन द्वारा वैज्ञानिक पृथ्वी की आंतरिक संरचना के बारे में बहुत कुछ ज्ञात कर सकते हैं।

भूकंपीय तरंगों के अध्ययन का महत्व 

  • भूकंपों का विश्लेषण: भूकंप के दौरान विरूपित हुए खंडों के संचलन के कारण निर्मित भ्रंश के साथ-साथ ऊर्जा निर्गमित होती है। ये खंड अंततः आकस्मिक रूप से एक-दूसरे की ओर गति करते हैं जिसके परिणामस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है और ये ऊर्जा तरंगें सभी दिशाओं में संचारित होती है। इस विश्लेषण ने अवकेंद्र (Hypocentre) और अधिकेंद्र (Epicentre) जैसी अवधारणाएँ प्रदान की है।
  • विभिन्न प्रकार की भूकंपीय तरंगों का विश्लेषण: भूकंपीय तरंगें मूल रूप से दो प्रकार की होती हैं – भूगर्भिक तरंगें (Body Waves) एवं धरातलीय तरंगें (Surface Waves)। सिस्मोग्राफ धरातल तक पहुंचने वाली तरंगों को अभिलेखित करता है। भूगर्भिक तरंगें पृथ्वी की आंतरिक परतों से होकर गुजरती हैं, जबकि धरातलीय तरंगे जल की लहरों की भांति केवल पृथ्वी की सतह पर ही संचारित होती हैं। भूकंप, भूगर्भिक और धरातलीय दोनों प्रकार की तरंगों के रूप में भूकंपीय ऊर्जा को प्रसारित करता है।
  • पृथ्वी की आंतरिक संरचना के संबंध में जानकारी: भूकंपीय तरंगें पृथ्वी की आंतरिक संरचना की विभिन्न परतों की एक पूर्ण तस्वीर प्रस्तुत करती हैं। प्राथमिक (Primary: P) और द्वितीयक (Secondary: S) तरंगों के असमान व्यवहार द्वारा ज्ञात होता है कि ठोस क्रस्ट के नीचे कुछ प्लास्टिक जैसी संरचना विद्यमान है, जिसे एस्थेनोस्फीयर कहा जाता है। छाया क्षेत्र (पृथ्वी का वह क्षेत्र जहाँ P या S भूकंपीय तरंगें नहीं पहुँच पाती हैं) का अध्ययन तथा P एवं S भूकंपीय तरंगों की गति से यह ज्ञात होता है कि पृथ्वी का आंतरिक भाग तीन परतों में विभाजित है – सबसे ऊपरी ठोस परत क्रस्ट, अर्द्ध-तरल एस्थेनोस्फीयर युक्त मेंटल (जो कि ज्वालामुखीय गतिविधियों का भी स्रोत है) तथा कोर (आंतरिक भाग ठोस तथा बाह्य भाग तरल)।
  • तेल एवं गैस के अन्वेषण में भूकंप विज्ञान के अनुप्रयोग: तेल एवं गैस के अन्वेषण के लिए भूकंपीय तरंगों को पृथ्वी की गहराई में प्रसारित किया जाता है। ये तरंगे वहां से टकराकर वापस आ जाती हैं। भूभौतिक विज्ञानियों द्वारा पृथ्वी की गहराई में स्थित तेल एवं गैस के भंडारों के बारे में जानकारी प्राप्त करने हेतु इन तरंगों को रिकॉर्ड किया जाता है।

इस प्रकार भूकंपीय तरंगों की खोज के साथ ही पृथ्वी की भूपर्पटी के पीछे निहित विज्ञान और मोहोरोविसिक असंबद्धता, ज्वालामुखीय विस्फोट जैसी अवधारणाओं की जानकारी भी प्राप्त की जा सकती है।

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