भारत में शिक्षक-शिक्षा परिवेश : बच्चों के अधिगम( Learning ) परिणामों में शिक्षकों के महत्व

प्रश्न: बच्चों के अधिगम परिणाम को प्रभावित करने में शिक्षकों के महत्व को देखते हुए, भारत में शिक्षक प्रशिक्षण की वर्तमान प्रणाली में विद्यमान समस्याओं पर चर्चा कीजिए। इनसे कैसे निपटा जा सकता है? (250 शब्द)

दृष्टिकोण

  • बच्चों के अधिगम परिणामों में शिक्षकों के महत्व पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
  • भारत में शिक्षक प्रशिक्षण से संबंधित मुद्दों को रेखांकित कीजिए।
  • भारत में शिक्षक-शिक्षा परिवेश में सुधार हेतु आवश्यक कदमों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर

एक शिक्षक की क्षमता, ज्ञान और अध्यापन-पद्धति में उनकी योग्यता, कौशल, विभिन्न विषयों से संबंधी जानकारी और ज्ञान प्रदान करने की पद्धति शामिल हैं जो बच्चों के अधिगम परिणामों में सुधार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। विभिन्न रिपोर्टों जैसे ‘प्रथम’ के ASER सर्वे के अंतर्गत भारत में निराशाजनक अधिगम परिणामों को रेखांकित किया गया है। शिक्षक प्रशिक्षण का निम्न स्तर इस स्थिति के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी है।

भारत में शिक्षक प्रशिक्षण को दो भागों में बांटा गया है:

  1.  सेवा-पूर्व प्रशिक्षण (छात्रों को शिक्षण में करियर के लिए तैयार करने हेतु) 
  2. सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण (यह सर्व शिक्षा अभियान (SSA) अथवा NFO (New Faculty Orientation) या सामाजिक उद्यमों के माध्यम से सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है)

सेवा-पूर्व प्रशिक्षण से संबंधित मुद्दे: 

  • प्रवेश:
  • प्रवेश परीक्षा की निम्न गुणवत्ता।
  • अनेक अभ्यर्थियों के लिए अध्यापन उनका मनपसंद पेशा नहीं बल्कि रोजगार के लिए अंतिम विकल्प के समान है।
  • पाठ्यक्रम:
  • वर्मा आयोग (2012) और NCERT ने यह इंगित किया है कि पाठ्यक्रम एवं कार्यक्रम संरचना केवल आधारभूत कौशल युक्त शिक्षक प्रदान करती है तथा उन शिक्षकों से यह अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी संदर्भ में अपने अधिगम को लागू करने में सक्षम होंगे।
  • यह बच्चों के सीखने की प्रक्रिया के उन मनोवैज्ञानिक पहलुओं को समझने और उनका समाधान करने में विफल रही है जो बेहतर अधिगम में योगदान करते हैं।
  • प्रशिक्षु के विषय ज्ञान के संबंध में पाठ्यक्रम उदासीन बना हुआ है जबकि यह विषय ज्ञान एक महत्वपूर्ण विचारणीय विषय होना चाहिए।
  • फील्ड अनुभव और मेंटरशिप:
  • कार्यक्रम की लघु अवधि आत्म-अवलोकन के माध्यम से सीखने, सामाजिक वास्तविकताओं को समझने, सामूहिक अधिगम (शेयर्ड लर्निंग) में सम्मिलित होने और व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करने की उम्मीदवार की क्षमता को सीमित करती है।
  • शिक्षकों की विशाल संख्या को प्रशिक्षित करने के लिए जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान'(DIET) में भी आवश्यक मानव संसाधनों की कमी है।
  • प्रशिक्षण कॉलेजों की कमजोर वित्तीय स्थिति।
  • संस्थानों को मान्यता प्रदान करना या उनका प्रत्यायन पूर्णतः भौतिक अवसंरचना पर निर्भर होता है और इसमें अधिगम परिणामों को महत्व नहीं दिया जाता है।
  • संस्थान शिक्षण विधियों के लिए नवीन प्रयोगों और नवाचारों में अधिक रूचि नहीं लेते हैं। आधुनिक अध्ययन-कक्ष के उपकरणों के विषय में उनका ज्ञान सीमित है।
  • आंध्र प्रदेश में किए गए एक अध्ययन में शिक्षण डिग्री धारण करने वाले शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए छात्रों और अन्य स्नातक डिग्री धारक शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए छात्रों के प्रदर्शन में कुछ अंतर पाया गया। यह प्रशिक्षण कार्यक्रमों की अप्रभाविता की ओर संकेत करता है।

सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण से संबंधित मुद्दे:

  • सर्व शिक्षा अभियान (SSA) के अंतर्गत सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण हेतु प्रत्येक वर्ष 20 दिन निर्धारित किए गए हैं किन्तु इन प्रशिक्षणों के परिणामों पर ध्यान नहीं दिया जाता है।
  • विभिन्न प्रकार के सेवाकालीन शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रमों में मानकीकरण की कमी है।
  • वर्मा आयोग की रिपोर्ट से स्पष्ट हआ है कि 90 प्रतिशत शिक्षक प्रशिक्षण निकाय निजी निकाय थे जो इस दिशा में सरकार के प्रयासों की कमी को दर्शाता है।
  • 2013-2014 में SSA द्वारा शिक्षकों की फंडिंग के लिए सर्वाधिक (64 प्रतिशत) वित्त आवंटित करने के बावजूद शिक्षक प्रदर्शन में अधिक सुधार नहीं हुआ है।
  • CSR व्यय में कमी – केवल 15% कंपनियों के पास शिक्षकों की क्षमता निर्माण के लिए कोई कार्यक्रम उपलब्ध था।

आवश्यक उपाय:

  • वित्तीयन, अवसंरचना, प्रौद्योगिकियों के उपयोग तथा मानव संसाधन (जैसे- प्रशिक्षकों) आदि के संदर्भ में DIET को सशक्त बनाना।
  • कुछ TEls को भूतलक्षी मान्यता प्रदान करने के एकबारगी उपाय के साथ राष्ट्रीय अध्यापक शिक्षा परिषद द्वारा TEls को मान्यता प्रदान करने जैसे विनियामक मुद्दों को सरल एवं कारगर बनाना।
  • ‘फील्ड एक्सपीरियंस’ संबंधी घटक को पुन: व्यवस्थित करना और शिक्षकों को शिक्षण की वास्तविक स्थिति से अवगत कराना। इंटर्नशिप के लिए पर्याप्त समय उपलब्ध होना चाहिए और प्रशिक्षुओं को स्कूलों के पूर्ण संचालन का अनुभव प्रदान किया जाना चाहिए।
  • भारत में शीर्ष शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों की रैंकिंग तैयार करना।
  • भौतिक और अकादमिक परिसंपत्तियों पर आधारभूत डेटा के साथ डेटा एनालिटिक्स का उपयोग करके किसी स्कूल के _प्रदर्शन और वास्तविक कक्षा परिवेश में छात्रों के प्रदर्शन का आकलन करने हेतु किया जाना चाहिए।
  • विभिन्न भारांशों- भौतिक परिसंपत्तियां (10%), अकादमिक परिसंपत्तियां (20%), शिक्षक आदान-प्रदान (30%), छात्रों के अधिगम परिणाम (40%)- के साथ ग्रेडिंग सिस्टम को पुन: व्यवस्थित करना।
  • CSR व्यय को अवसंरचना व्यय से शिक्षक प्रशिक्षण की दिशा में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
  • ‘एकीकृत शिक्षक शिक्षा’ दृष्टिकोण पर केंद्रित मुक्तांगन मॉडल का क्रमिक रूप में कार्यान्वयन। यह मॉडल एकीकृत शिक्षक शिक्षा पर संकेंद्रित है जिसके अंतर्गत स्कूल नेतृत्व, IT कौशल, अंग्रेजी दक्षता और प्रत्येक विषय से सम्बंधित अध्यापन आवश्यकताओं की समझ जैसे कौशल सम्मिलित हैं।

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