भारत में विज्ञान तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षेत्र के महत्व के विषय में संक्षिप्त परिचय

प्रश्न: भारत में विज्ञान तथा R&D को उन्नत बनाने के प्रयासों को व्यय के प्रश्नों से परे जाने की आवश्यकता है। टिप्पणी कीजिए।

दृष्टिकोण

  • भारत में विज्ञान तथा अनुसंधान एवं विकास (R&D) क्षेत्र के महत्व के विषय में संक्षिप्त परिचय दीजिए।
  • भारत में R&D क्षेत्र द्वारा अनुभव की जाने वाली समस्याओं पर संक्षिप्त चर्चा कीजिए।
  • उपर्युक्त समस्याओं के समाधान हेतु कुछ नवीन उपायों को सुझाइए।
  • उपर्युक्त बिंदुओं के आधार पर सकारात्मक निष्कर्ष दीजिए।

उत्तर

विज्ञान, प्रौद्योगिकी एवं नवाचार आर्थिक निष्पादन और सामाजिक कल्याण के प्रमुख घटक हैं। विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में से एक होने के कारण, भारत को ज्ञान के विशुद्ध उपभोक्ता से विशुद्ध उत्पादक बनने हेतु आगे बढ़ने की आवश्यकता है। इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए R&D क्षेत्र सफलता का साधन सिद्ध हो सकता है।

परन्तु भारतीय R&D क्षेत्र को वैज्ञानिक अनुसंधान और ज्ञान के विस्तार की निम्न गति की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यद्यपि R&D पर सकल व्यय (Gross Expenditure on R&D: GERD) में सांकेतिक रूप से निरंतर वृद्धि हुई है, तथापि सकल घरेलू उत्पाद के एक अंश के रूप में अनुसंधान पर सार्वजनिक व्यय 0.6-0.7% के मध्य स्थिर बना हुआ है। यह प्रमुख देशों जैसे- अमेरिका (2.8), चीन (2.1), इज़राइल (4.3) और कोरिया (4.2) से भी काफी कम है। हालांकि, एक विकासशील देश के रूप में विभिन्न बाधाओं पर विचार करते हुए, भारत को R&D को प्रभावित करने वाले अन्य कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है। जैसे:

  • निम्न स्तरीय उपयोग: परिणाम और निष्पादन के स्थान पर व्यय पर अधिक ध्यान देने के साथ ही उपलब्ध अल्प निधि का उपयोग न्यायसंगत रूप से नहीं किया जाता है।
  • निजी क्षेत्र की भूमिका: अधिकांश देशों में, निजी क्षेत्र द्वारा R&D पर अधिक निवेश किया जाता है परंतु भारत में R&D में निवेश का प्राथमिक स्रोत सार्वजनिक क्षेत्रक है।
  • सरकारी व्यय में कमी: R&D के अंतर्गत सरकारी निवेश का लगभग 3/5वां भाग परमाणु ऊर्जा, अंतरिक्ष, भू-विज्ञान, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा जैव-प्रौद्योगिकी से संबंधित बड़ी सरकारी परियोजनाओं में प्रयोग किया गया है, जबकि लघु प्रायोगिक परियोजनाओं को कम वित्त पोषण प्राप्त होता है।
  • भारतीय युवाओं द्वारा इंजीनियरिंग, चिकित्सा, प्रबंधन तथा सरकारी नौकरियों में करियर को उच्च प्राथमिकता प्रदान की जाती है।
  • विश्वविद्यालयों की भूमिका: शिक्षण से शोध को अलग करने के कारण भारत में विश्वविद्यालयों द्वारा R&D में अपेक्षाकृत निम्न भूमिका निभाई जाती है।
  • R&D के लिए कुशल कार्यबल अन्य महत्वपूर्ण आगत है जिसके अंतर्गत Ph.D. छात्र भी विशेष रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • नीतिगत सहायता: R&D पर कंपनियों द्वारा किए जाने व्यय पर कर प्रोत्साहन को वर्ष 2017-18 से कम कर दिया गया।

इसलिए, भारत को व्यय के प्रश्नों से परे जाने के लिए निम्नलिखित विकल्पों की खोज करने की आवश्यकता है:

  • विभिन्न दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित करना: अन्वेषक-उन्मुख अनुसंधान को प्रोत्साहित करना और ब्लैक पार्टिकल, जीनोमिक्स, ऊर्जा, कृषि, गणित इत्यादि जैसे क्षेत्रों में व्यापक मिशन-आधारित दृष्टिकोण को अपनाना।
  • नवीन ज्ञान प्रणालियों पर ध्यान केंद्रित करना: राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को विश्वविद्यालयों से जोड़ना, जिससे शोध को बढ़ावा दिया जा सके।
  • अन्य हितधारकों पर ध्यान केंद्रित करना: उदाहरणार्थ- निजी क्षेत्रक, राज्य सरकारें, डायस्पोरा इत्यादि।
  • R&D संबंधी अनुकूल परिवेश पर ध्यान केंद्रित करना: “इज़ ऑफ़ डूइंग बिज़नस” से लेकर “इज़ ऑफ़ डूइंग साइंस” सूचकांक जैसे क़दमों में सुधार के माध्यम से।
  • अनुसंधान एवं व्यापक सार्वजनिक जुड़ाव की संस्कृति को बढ़ावा देना, देश की बौद्धिक संपदा अधिकार व्यवस्था को सुदृढ़ बनाना तथा पेटेंट की गुणवत्ता में सुधार करना इत्यादि।

वस्तुतः यह भारत में विज्ञान तथा अनुसंधान एवं विकास क्षेत्र के विकास को सुनिश्चित करेगा जो देश के दीर्घकालिक विकास और गतिशीलता के अभिन्न अंग हैं।

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