भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र : चुनौतियों के समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदम

प्रश्न: एक बड़े बाजार की उपस्थिति के बावजूद, भारत में रियल एस्टेट क्षेत्रक को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। सविस्तार वर्णन कीजिए। साथ ही, इनके समाधान हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी विवेचना कीजिए। क्या 2022 तक सभी के लिए आवास इस संबंध में निर्णायक सिद्ध हो सकता है?

दृष्टिकोण

  • भारत में रियल एस्टेट क्षेत्रक की सामान्य स्थिति का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  • उन चुनौतियों का उल्लेख कीजिए, जिनका भारत में रियल एस्टेट क्षेत्रक द्वारा सामना किया जा रहा है। 
  • इन चुनौतियों से निपटने हेतु सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की भी विवेचना कीजिए।
  • रियल एस्टेट क्षेत्रक के लिए सभी के लिए आवास किस प्रकार निर्णायक सिद्ध हो सकता है, अपने दृष्टिकोण को पुष्ट कीजिए।

उत्तर

रियल एस्टेट क्षेत्रक में चार उप क्षेत्र यथा आवास, खुदरा, आतिथ्य और वाणिज्यिक शामिल हैं। यह FDI (विदेशी प्रत्यक्ष निवेश) अन्तर्वाह के संदर्भ में चौथा सबसे बड़ा क्षेत्र है। एकल परिवारों का उदय, तीव्र नगरीकरण और बढ़ती घरेलू आय जैसे कारकों के परिणामस्वरूप वर्ष 2028 तक सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में इस क्षेत्र के योगदान में 7% से 13% तक की वृद्धि जोने की संभावना है। हालांकि, राष्ट्रीय आवास बैंक के अनुसार, 2013 से 2017 के मध्य संपत्तियों की कीमतों में वृद्धि दर मंद रही थी।

चुनौतियां:

  • भूमि की लागत: अनुदान की स्वीकृति में विलंबता सहित अर्थव्यवस्था की विकासशील प्रकृति भारत में भूमि की लागत को उच्च बनाए रखती है।
  • फंड की उपलब्धता: खरीदारों और डेवलपर्स स्तर पर फंड का आभाव, अल्प-विकसित अवसंरचना और कुशल श्रमशक्ति के अभाव का कारण बनता है।
  • मांग: जहां सस्ते आवास की मांग में वृद्धि हो रही है, वहीं डेवलपर्स द्वारा मध्यम श्रेणी, लक्जरी और प्रीमियम-आवास परियोजनाओं पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
  • आपूर्ति: डेवलपर्स स्तर पर अत्यधिक इन्वेंट्री और अति आपूर्ति की स्थिति बनी हुई है। FDI: भूमि अतिक्रमण तथा विनियमन का अभाव, विदेशी निवेशकों के लिए अवरोध उत्पन्न कर रहे हैं।
  • काला धन: रियल एस्टेट को सबसे भ्रष्ट क्षेत्रों में एक माना जाता है, क्योंकि इस क्षेत्र में अत्यधिक काले धन का उपयोग किया जाता है, जिसके परिणामस्वरूप रियल एस्टेट की कीमतों में वृद्धि हो जाती है।
  • कराधान: पूर्व में सेवा कर की प्रभावी दर संपत्ति के कुल मूल्य का 4.5% थी; परंतु वर्तमान में इनपुट टैक्स क्रेडिट के साथ GST (वस्तु एवं सेवा कर) की प्रभावी दर 12% है।
  • उच्च लेनदेन लागत: GST एवं अन्य शुल्कों सहित राज्यों द्वारा सामान्यतः 5% से 8% के मध्य स्टाम्प शुल्क आरोपित किया जाता है। यह संपत्ति के कुल मूल्य का लगभग 20% का है, यह स्थिति इस क्षेत्रक को निवेशकों के लिए अनाकर्षक बनाती है।
  • वित्तीय अनुशासन का अभाव (Financial Indiscipline): यूनिटेक और आम्रपाली डेवलपर्स के मामलों में न्यायपालिका ने पाया कि डेवलपर्स के लालच, अति-महत्वाकांक्षा और वित्तीय अनुशासन के अभाव के कारण खरीदारों को फ्लैटों के का स्वामित्व प्राप्त करने में विलंब हुआ है।

सरकार द्वारा किए गए उपाय

  • रियल एस्टेट (विनियमन और विकास) अधिनियम, 2016 का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, नागरिक केंद्रित, जवाबदेही तथा वित्तीय अनुशासन के प्रोत्साहन द्वारा भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र में सुधार करना है।
  • दिवाला और शोधन अक्षमता कोड (IBC): भ्रष्ट डेवलपर्स के विरुद्ध दिवाला संबंधी कार्यवाहियों को प्रारंभ किया गया है।
  • रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (REITS) फंड जुटाने और वैकल्पिक निवेश की सुविधा प्रदान करता है।
  • वहनीय आवास पर सरकार द्वारा पुनः ध्यान दिया जाना और वेयरहाउस को ‘अवसंरचनात्मक दर्जा’ ने व्यावसायिक अवसरों को प्रोत्साहित किया है।
  • 2022 तक सभी के लिए आवास: यह परियोजना प्रति वर्ष 60% तक की अपेक्षित वृद्धि के साथ इस क्षेत्रक को अत्यधिक बढ़ावा देगी।
  • नगर भूमि (अधिकतम सीमा एवं विनियमन) अधिनियम, 1976 को अधिकांश राज्यों द्वारा निरस्त कर दिया गया है।
  • टाउनशिप एवं आवासों के विकास के लिए FDI सीमा को बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दिया गया है। विशेष आर्थिक क्षेत्र (SEZs) के अंतर्गत रियल एस्टेट परियोजनाओं के लिए 100 प्रतिशत FDI की स्वीकृति प्रदान की गई है।

2022 तक सभी के लिए आवास: क्या यह एक निर्णायक सिद्ध होगा?

  • 2022 तक सभी के लिए आवास परियोजना का लक्ष्य रियल एस्टेट क्षेत्र में वित्तीय, नीतिगत तथा नियामक संबंधी समर्थन प्रदान कर शहरी क्षेत्रों में 1.2 करोड़ आवासीय इकाइयों का निर्माण करना है।
  • इस योजना का उद्देश्य 12 लाख रूपये तक का ऋण प्रदान करके आर्थिक रूप से कमजोर समूहों को भी शामिल करना है।
  • अवसंरचना का दर्जा, डेवलपर्स को बाह्य वाणिज्यिक उधार (ECBs) सहित वित्तपोषण के सस्ते स्रोतों तक पहुंच प्रदान करना है।
  • प्रमोटरों को परियोजना को पूरा करने के लिए अधिक समय प्रदान किया गया है।
  • वहनीय आवास के लिए दीर्घकालिक पूंजीगत लाभ की समयावधि को कम कर दिया गया है।
  • परियोजनाओं को आर्थिक रूप से व्यवहार्य बनाने हेतु यदि आवश्यक हो तो अतिरिक्त FSI/TDR/FAR आरोपित किया जाएगा।
  • 1,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के साथ मध्यम आय वर्ग के लिए क्रेडिट लिंक्ड सब्सिडी स्कीम (CLSS) का क्रियान्वयन।
  • यह अभियान 1.5 लाख रुपये प्रति EWS घर की दर से वित्तीय सहायता प्रदान करता है।

उपर्युक्त पहलों ने निवेशकों के विश्वास में वृद्धि की है तथा डेवलपर्स को समृद्ध ग्राहक सेगमेंट से इतर ग्राहकों के लिए कार्य करने हेतु प्रोत्साहन प्रदान किया गया है। यदि उपर्युक्त चुनौतियों का समाधान किया जाता है, तो ‘2022 तक सभी के लिए आवास’ परियोजना भारत में रियल एस्टेट क्षेत्र की विकास क्षमता में वृद्धि कर सकती है।

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