भारत को आपदा के प्रति प्रत्यास्थ या सुनम्य बनाना

प्रश्न: बताइए कि राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (2016) का उद्देश्य किस प्रकार से भारत को आपदा प्रत्यास्थ बनाना है?

दृष्टिकोण:

  • राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना की आवश्यकता को रेखांकित करते हुए उत्तर आरंभ कीजिए।
  • चर्चा कीजिए कि इसका उद्देश्य किस प्रकार से भारत को आपदा के प्रति प्रत्यास्थ या सुनम्य बनाना है।
  • उपर्युक्त बिंदुओं के आधार पर निष्कर्ष प्रस्तुत कीजिए।

उत्तरः

भारत विश्व के शीर्ष दस सर्वाधिक आपदा प्रवण देशों में शामिल है। यह अपनी अद्वितीय भू-जलवायवीय और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में प्राकृतिक और मानव जनित आपदाओं के प्रति सुभेद्य है। देश में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में से 27 आपदा के प्रति प्रवण हैं।

इस आलोक में, सरकार द्वारा वर्ष 2016 में राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन योजना (National Disaster Management Plan: NDMP) जारी की गई। इस योजना में पर्याप्त रूप से आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लक्ष्य को प्राप्त करने और उल्लेखनीय रूप से जीवन, आजीविका तथा संपत्तियों (आर्थिक, भौतिक, सामाजिक,सांस्कृतिक और पर्यावरणीय आदि) की क्षति को कम करते हुए भारत को आपदा जोखिम के प्रति सुनम्य बनाने की परिकल्पना की गई है। इसका उद्देश्य प्रशासन के सभी स्तरों पर तथा समुदायों के मध्य आपदाओं से निपटने की क्षमता को अधिकतम करना है।

NDMP का लक्ष्य निम्नलिखित तरीकों से भारत को आपदा के प्रति सुनम्य बनाना है:

आपदा जोखिम न्यूनीकरण (DRR) के लिए एक फ्रेमवर्क बनाकर: इसके अंतर्गत पाँच विषयगत क्षेत्रों में कार्रवाई की जाती है

  • जोखिम को समझना
  • अंतर-एजेंसी समन्वय 
  • DRR में निवेश – संरचनात्मक उपाय
  • DRR में निवेश – गैर-संरचनात्मक उपाय
  • क्षमता विकास

इसमें आपदा प्रबंधन के सभी चरण अर्थात रोकथाम (Prevention), शमन (Mitigation), अनुक्रिया (Response) और पुनर्बहाली (Recovery) शामिल हैं। यह मानव प्रेरित आपदाओं जैसे रासायनिक तथा परमाणु आपदाओं आदि को भी कवर करता है तथा इसके अंतर्गत आपदाओं के शमन के लिए लघु (5 वर्ष), मध्यम (10 वर्ष) और दीर्घ (15 वर्ष) अवधि की योजनाएं बनाई गई है।

  • भूमिका स्पष्टता के साथ एक एकीकृत दृष्टिकोण प्रदान करके: यह सरकार की एजेंसियों और विभागों के मध्य क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर एकीकरण प्रदान करता है तथा आपदा प्रबंधन चक्र के सभी चरणों के लिए उनकी भूमिकाओं और उत्तरदायित्वों को निर्धारित करता है।
  • सूचना और मीडिया विनियमन द्वारा: यह समुदायों को आपदाओं से निपटने के लिए तैयार करता है तथा सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) की आवश्यकता पर बल प्रदान करता है। यह मीडिया को ऐसी अवधि के दौरान आपदाओं की कवरेज और स्व-विनियमन के लिए नैतिक दिशा-निर्देशों को अपनाने के लिए निर्देशित करता है।
  • क्षमता निर्माण द्वारा: यह कर्मियों के प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करता है। यह इस संबंध में सर्वोत्तम अंतर्राष्ट्रीय पद्धतियों को भी शामिल करता है।
  • विकास योजनाओं के साथ आपदा प्रबंधन को संरेखित करके: NDMP विकास संबंधी योजनाओं के साथ संरेखित करके आपदा जोखिम न्यूनीकरण की आवश्यकताओं को मुख्यधारा में शामिल करता है।

NDMP आपदा जोखिम न्यूनीकरण के लिए सेंडाई फ्रेमवर्क, सतत विकास लक्ष्यों (2015-2030) और COP-21 में जलवायु परिवर्तन पर पेरिस समझौते में निर्धारित लक्ष्यों और प्राथमिकताओं के साथ व्यापक स्तर पर संरेखित है।

हालांकि, इस योजना में कुछ कमियां भी विद्यमान हैं। इसके तहत आपदा जोखिम शमन जैसे-तत्परता (preparedness), पुनर्निर्माण (reconstruction) आदि के लिए केंद्र और राज्यों की सरकारों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों के संबंध में एक स्पष्ट और व्यावहारिक रोडमैप निर्धारित नहीं किया गया है। इसके अतिरिक्त वित्त के स्रोतों, इसकी निगरानी और मूल्यांकन के लिए रूपरेखा के संबंध में स्पष्टता का अभाव है।

NDMP को स्पष्ट उद्देश्यों, लक्ष्यों, समय सीमा तथा इसके कार्यान्वयन के लिए संसाधनों के संग्रहण पद्धति आदि से संबंधित विचारों के साथ आपदा के प्रति सुनम्य बनाने वाले एक रोडमैप के माध्यम से पूरकता प्रदान की जानी चाहिए।

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