आधुनिक भारत के इतिहास में डॉ. अम्बेडकर के प्रमुख योगदान

प्रश्न: डॉ. बी. आर. अम्बेडकर का मानना था कि दीर्घस्थायी असमानताएं राष्ट्र और लोगों के आर्थिक एवं सामाजिक कल्याण के समक्ष बुनियादी चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं। इस संदर्भ में, आधुनिक भारत के इतिहास में डॉ. अम्बेडकर के प्रमुख योगदानों की चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • पहले भाग में, चर्चा कीजिए कि डॉ अम्बेडकर के अनुसार किस प्रकार असमानताएं नागरिकों एवं राष्ट्र के समक्ष मौलिक  चुनौतियां प्रस्तुत करती हैं।
  • इस संबंध में, आधुनिक भारत के इतिहास (स्वतंत्रता से पूर्व एवं स्वतंत्रता के पश्चात की अवधि) में अम्बेडकर के योगदानों को सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर

डॉ. बी. आर. अम्बेडकर ने प्रत्येक क्षेत्र (सामाजिक, आर्थिक तथा राजनीतिक) में समानता एवं लोकतंत्र का समर्थन किया। उनके अनुसार जब समाज के किसी विशेष वर्ग को संसाधनों, बाजारों, स्वास्थ्य एवं शिक्षा जैसी मूलभूत सेवाओं तथा उन मंचों तक पहुंच से प्रतिबंधित किया गया हो जिनके माध्यम से उनकी आवाज को नीति निर्माण प्रक्रिया में सुना जा सकता है, तो असमानता एवं निरंतर गरीबी की स्थिति उत्पन्न होती है। इसके परिणामस्वरूप हिंसा और घृणा फैलती है, जो किसी भी लोकतांत्रिक देश के लिए अति आवश्यक- सामाजिक न्याय, समानता, स्वतंत्रता तथा बंधुता के समक्ष खतरा उत्पन्न कर सकती हैं ।

समानता को बढ़ावा देने हेतु डॉ.अम्बेडकर के योगदान:

स्वतंत्रता-पूर्व:

उन्होंने अस्पृश्यता के विरुद्ध सक्रिय आंदोलन का नेतृत्व करते हुए मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय का समर्थन किया। उनके प्रमुख योगदान हैं:

  • उन्होंने दलितों अथवा अस्पृश्यों के लिए शिक्षा-आंदोलन-संगठन की एक त्रि-स्तरीय प्रक्रिया को आरंभ किया ताकि वे सामाजिक बाधाओं को दूर कर सकें।
  • उन्होंने आत्म सम्मान आंदोलन तथा दलितों के उत्थान हेतु ‘बहिष्कृत हितकारिणी सभा’ नामक संस्था की स्थापना की।
  • दलितों के लिए पंच-सूत्र : आत्म-सुधार, आत्म-प्रगति, आत्म-निर्भरता, आत्म-सम्मान एवं आत्मविश्वास, का प्रतिपादन किया।
  • इसके साथ ही उन्होंने समाज के सबसे निचले वर्ग के लिए सार्वजनिक पेयजल संसाधनों/मंदिरों को खोलने के लिए सार्वजनिक आन्दोलनों एवं पद यात्राओं का आयोजन किया। उदाहरण के लिए, महाड़ में सत्याग्रह।
  • पूना पैक्ट- इसके तहत चुनावी निर्वाचन क्षेत्रों पर समझौते के अतिरिक्त अश्पृश्यों के लिये सरकारी नौकरियों एवं विधानसभाओं में आरक्षण के प्रावधान पर सहमति स्थापित हुई।
  • उन्होंने दलितों को राजनीतिक रूप से लामबंद करने हेतु इंडिपेंडेंट लेबर पार्टी की स्थापना की।

स्वतंत्रता-पश्चात भारत:

  • भारतीय संविधान का मसौदा तैयार करने में प्रमुख भूमिका: अम्बेडकर ने संविधान में बहुलवाद एवं समावेशन के सिद्धांत सम्मिलित किए और संविधान में अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों तथा पिछड़े वर्गों हेतु सामाजिक न्याय को सुनिश्चित करने के प्रावधान किए।
  • महिलाओं के अधिकार: इन्होंने हिंदू विवाह अधिनियम (जिसने महिलाओं के लिए कानूनी रूप से तलाक लेना संभव बनाया) के साथ ही हिंदू दत्तक तथा भरण-पोषण अधिनियम (इसमें कन्या शिशु को गोद लेने एवं उसकी देख-रेख हेतु विस्तृत रूप में विधिक प्रावधान किये गए हैं) के पारित होने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जाति, धर्म, दर्शन, संविधान, शासन, अर्थशास्त्र और सामाजिक न्याय के विभिन्न क्षेत्रों पर स्वतंत्रता से पूर्व एवं स्वतंत्रता के पश्चात उनके लेखन एवं कार्य, ज्ञान और बुद्धिमत्ता के भण्डार हैं।

इस प्रकार अम्बेडकर ने आधुनिक भारतीयों के मध्य विधि का शासन, बंधुता, समानता और स्वतंत्रता को समाविष्ट किया। उनके कार्य एवं सिद्धांत एक यथार्थ और समतामूलक समाज के संदर्भ में आज भी प्रासंगिक बने हुए हैं।

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