वलित पर्वतों के निर्माण के लिए उत्तरदायी क्रियाविधि

प्रश्न : वलित पर्वतों के निर्माण के लिए उत्तरदायी क्रियाविधि की व्याख्या कीजिए। ये अधिकांशतः महाद्वीपों की सीमाओं पर क्यों पाए जाते हैं?

दृष्टिकोण:

  • वलित पर्वतों के निर्माण के लिए उत्तरदायी क्रियाविधि की विस्तार से चर्चा कीजिए।
  • महाद्वीपों की सीमाओं के साथ वलित पर्वतों के निर्माण की व्याख्या कीजिए।
  • विश्व में महाद्वीपीय सीमाओं पर वलित पर्वतों के वितरण का आरेखीय निरूपण कीजिए।

उत्तरः

वलित पर्वत ऐसे पर्वत हैं जिनका निर्माण विवर्तनिक प्लेटों के संपीडन के कारण होता है। यह संपीडन भू-पर्पटी पर बृहद वलित संरचनाओं के निर्माण को प्रेरित करता है। हिमालय, एंडीज और आल्प्स सक्रिय वलित पर्वतों के कुछ उदाहरण हैं।

वलित पर्वतों के निर्माण की क्रियाविधि:

इनका निर्माण भू-पर्पटी में उत्पन्न तनाव के परिणामस्वरूप व्यापक पैमाने पर होने वाले भूसंचलनों द्वारा होता है। ये तनाव ऊपरी चट्टानों के बढ़ते भार, मेंटल में प्रवाह संचलनों (flow movements), पर्पटी में मैग्मा के अंतर्वेधन या पृथ्वी के किसी भाग के प्रसार/संकुचन के कारण उत्पन्न हो सकते हैं। जब इस प्रकार के तनाव उत्पन्न होने की स्थिति में चट्टानों पर संपीडक बल अधिरोपित होता है जो दुर्बलता रेखा (lines of weakness) के सहारे मोड़ या वलन उत्पन्न करता है।

ये वलन अपनति (anticlines-ऊपर उठा हुआ भाग) और अभिनति (synclines- नीचे धंसा हुआ भाग) की एक श्रृंखला का निर्माण करते हैं। संपीड़न बलों की जटिलता विभिन्न प्रकार के वलित पर्वतों जैसे- साधारण वलित पर्वत, जटिल वलित पर्वत इत्यादि का निर्माण करती है। साधारण वलित पर्वतों में वलन अपनतियों और अभिनतियों की सुव्यवस्थित प्रणाली के साथ तरंगवत प्रतिरूप में व्यवस्थित होते हैं। जबकि जटिल वलित पर्वतों में, अत्यधिक संपीडन बलों के कारण वलन की क्रिया जटिल हो जाती है और विभिन्न वलनों का निर्माण होता है जैसे- अतिवलन, परिवलित वलन और ग्रीवाखंड (nappe)।

महाद्वीपों की सीमाओं पर वलित पर्वतों की अवस्थिति के कारण:

वलित पर्वत मुख्यतः महाद्वीपीय पर्पटी से सम्बंधित होते हैं। इनका निर्माण दो महाद्वीपीय प्लेटों के मध्य अथवा महासागरीय और महाद्वीपीय प्लेट के मध्य अभिसरण के कारण होता है। यह अभिसरण, अभिसरण प्लेट सीमांत पर होता है, जिसे महाद्वीपीय टकराव क्षेत्र या संपीडन क्षेत्र भी कहा जाता है।

दो महाद्वीपीय प्लेटों का अभिसरण उन दोनों प्लेटों के मध्य विद्यमान अवसादों को संपीड़ित और उत्थित करता है जिससे प्लेट सीमा पर वलित पर्वतों का निर्माण होता है। इसी प्रकार, जब महासागरीय-महाद्वीपीय प्लेटों का अभिसरण होता है, तो अधिक घनत्व की महासागरीय प्लेट निमज्जित हो जाती है और महाद्वीपीय प्लेट को ऊपर की ओर धकेलती है जिससे महाद्वीपीय प्लेट की सीमा पर वलित पर्वत का निर्माण होता है। इस कारण से, अधिकांश वलित पर्वत महाद्वीपीय प्लेट सीमाओं पर या पूर्ववर्ती सीमाओं पर पाए जाते हैं, जैसा कि नीचे दिए गए मानचित्र में दर्शाया गया है।

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