सिंधु घाटी सभ्यता की महत्त्वपूर्ण विशेषतायें

प्रश्न: प्रमुख पुरातात्विक खोजों से उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सिंधु घाटी सभ्यता की महत्त्वपूर्ण विशेषताओं को स्पष्ट कीजिए।

दृष्टिकोण

  • सिंधु घाटी सभ्यता का संक्षिप्त विवरण प्रस्तुत कीजिए।
  • प्रमुख पुरातात्विक खोजों के उदाहरण प्रस्तुत करते हुए सिंधु घाटी सभ्यता की प्रमुख विशेषताओं का वर्णन कीजिए।

उत्तर

सिंधु घाटी सभ्यता (IVC) लगभग 2500-1700 ईसा पूर्व आधुनिक पाकिस्तान और उत्तर-पश्चिम भारत के कुछ हिस्सों में अवस्थित एक कांस्य युगीन नगरीय सभ्यता थी।

प्रमुख पुरातात्विक खोजों से प्रकाश में आयी सिंधु घाटी सभ्यता की कुछ प्रमुख विशेषताएं निम्नलिखित हैं:

  • नगर नियोजन: ईंटों से निर्मित घर ग्रिड प्रणाली का अनुसरण करते थे। इस प्रणाली में सड़कें एक दूसरे को लगभग समकोण पर काटती थीं तथा नगर को विभिन्न ब्लॉकों में बांटा गया था।
  • निकास प्रणाली: प्रत्येक घर में आंगन और स्नानागार निर्मित किए गये थे। घरों का जल ढकी हुई नालियों के माध्यम से सड़क तक प्रवाहित होता था जिसके दोनों तरफ मैनहोल युक्त नालियां निर्मित की गयी थीं।
  • पृथक्करण: हड़प्पा तथा मोहनजोदड़ो, दोनों नगरों में दुर्ग का निर्माण किया गया था। यहां संभवतः शासक वर्ग के परिवार निवास करते थे। प्रत्येक नगर में दुर्ग के बाहर एक निचला शहर था जहां सम्भवतः सामान्य जनता निवास करती थी।
  • सार्वजनिक संरचनाएं: विशाल सार्वजनिक स्नानागार मोहनजोदड़ो का सबसे महत्त्वपूर्ण सार्वजनिक स्थल था। मोहनजोदड़ो और हड़प्पा से विशाल अन्नागार भी प्राप्त हुए हैं।
  • कृषि: लोथल और बनावली से मिले साक्ष्य प्रदर्शित करते हैं कि यहाँ गेहूँ, जौ, राई, मटर आदि का उत्पादन किया जाता था। कपास का उत्पादन सर्वप्रथम सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों द्वारा ही किया गया था।
  • पशु पालन: सिंधु घाटी सभ्यता के लोगों ने ऊँट, हाथी आदि पशुओं को पालतू बना लिया था। ।
  • लिपि: पत्थरों, मुहरों आदि पर हड़प्पा लिपि के लगभग 4,000 नमूने प्राप्त हुए हैं। हालाँकि इस लिपि को अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।
  • मूर्तियाँ: अनेक मूर्तियाँ जैसे कांसे से निर्मित नर्तकी की मूर्ति, बैल की तांबे की आकृतियां तथा पुजारी की सेलखड़ी से निर्मित प्रतिमाएं प्राप्त हुई हैं। इन प्रतिमाओं से लॉस्ट वैक्स कास्टिंग (cire-perdue) तकनीक का ज्ञान होने का भी साक्ष्य प्राप्त होता है।
  • मुहरें: विभिन्न स्थलों से सेलखड़ी (स्टीटाइट) और तांबे से निर्मित लगभग 2000 मुहरें पायी गयी हैं। इन पर बैल, गैंडे आदि की आकृतियाँ चित्रित है एवं अनेक अभिलेख उत्कीर्ण हैं।
  • वजन और माप प्रणाली: इस सभ्यता के लोगों द्वारा वजन मापने के लिए कई उपकरण प्रयोग में लाये जाते थे जो 16 के गुणज पर आधारित थे। इसके अतिरिक्त कई स्थलों से मापक दंड भी मिले हैं।
  • टेराकोटा की मूर्तियाँ: इनका उपयोग खिलौने या पूजा की वस्तुओं के रूप में किया जाता था।
  • मृदभांड: बर्तन सामान्यतः कुम्हार के चाक के प्रयोग के माध्यम से बनाये जाते थे और अधिकांशतः लाल मिट्टी से निर्मित होते थे।
  • वस्त्र, सौंदर्य प्रसाधन और आभूषण: ऊन और कपास हेतु प्रयुक्त तकलियाँ भी प्राप्त हुई हैं। लोगों द्वारा सिन्दूर व सुरमे (काजल) का प्रयोग किया जाता था और आभूषणों के रूप में मनकों से निर्मित हार, ताबीज आदि धारण किये जाते थे। यहां तक कि मृतकों को भी आभूषणों के साथ दफनाया जाता था।
  • धर्म: लोगों द्वारा मातृ देवी, पशुपति, वृक्ष और पशुओं की पूजा की जाती थी।
  • व्यापार: अधिकांश व्यापार वस्तु विनिमय प्रणाली के माध्यम से किया जाता था, हालाँकि मुहरों के उपयोग के भी कुछ साक्ष्य प्राप्त हुए हैं। सिंधु सभ्यता के लोग व्यापार के लिए पहिया गाड़ी, नौचालन आदि का उपयोग करते थे।

इस प्रकार, मेसोपोटामिया जैसी समकालीन सभ्यताओं की तुलना में सिंधु घाटी सभ्यता एक अधिक उन्नत प्राचीन सभ्यता के रूप में वर्णित की जा सकती है।

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