मध्यप्रदेश : वन तथा वन्यजीव

  • एक क्षेत्र जहाँ वृक्षों का घनत्व अत्यधिक रहता है, उसे वन कहते हैं । वन एक बीहड क्षेत्र है।
  • वन अधिनियम 1927 के अनुसार- भू-मण्डल का वह भाग, जो वृक्षों से ढका हुआ है, वन कहलाता है।
  • भारत के वन संसाधनों की आँकलन की वन स्थिति रिपोर्ट 2017 वन एवं पर्यावरण मंत्रालय द्वारा 12 फरवरी, 2018 को जारी की गई।
  • भारत वन स्थिति रिपोर्ट-2017 के अनुसार कुल वनों का दायरा 7, 08, 273 वर्ग किलोमीटर है जो देश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 21.54 प्रतिशत है।
  • देश में सबसे बड़ा वन्य क्षेत्र मध्यप्रदेश में है, जहाँ इसका रकबा 77414 वर्ग किलोमीटर है । इसके बाद अरुणाचल प्रदेश 66964 वर्ग किलोमीटर तथा छत्तीसगढ़ 55547 वर्ग किलोमीटर आते हैं |
  • प्रतिशत के अनुसार सबसे अधिक वनों का दायरा 90.33 प्रतिशत लक्षद्वीप में है। इसके बाद 86.27 प्रतिशत के साथ मिजोरम का स्थान आता है।
  • यह द्विवार्षिक रिपोर्ट भारतीय वन सर्वेक्षण संस्थान देहरादून द्वारा तैयार की जाती है।
  • भारत वनरोपण 2017 इस श्रृंखला की 15 वीं रिपोर्ट है । यह रिसोर्ससैट-2 उपग्रह के संवेदी आँकड़े एलआईएसएस-3 पर आधारित है।
  • वन स्थिति रिपोर्ट 2017 के अनुसार म.प्र. के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 25.11 प्रतिशत वन क्षेत्र है। वन स्थिति रिपोर्ट 2017 के अनुसार प्रदेश का कुल वन क्षेत्र 77414 वर्ग किलोमीटर है, जो वर्ष 2015 की वन स्थिति रिपोर्ट में 77462 वर्ग किलोमीटर था । इस प्रकार 2015 की तुलना में वर्ष 2017 की रिपोर्ट में प्रदेश का 48 वर्ग किलोमीटर वनक्षेत्र कम हुआ है।
  • भारत में कुल वन आवरण 7,08,273 वर्ग किलोमीटर है जो कि देश के कुल वन क्षेत्र का 21.54 प्रतिशत है।
  • कुल वन और वृक्ष आच्छादनः देश के कुल भौगोलिक क्षेत्र का कुल वन और वृक्ष आच्छादन 24.39 प्रतिशत है ।
  • रिपोर्ट के अनुसार देश में कुल वन और पेड़ के आवरण में 8,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक की वृद्धि हुई है, जो 2015 के मुकाबले एक प्रतिशत की वृद्धि प्रदर्शित करता है।

वनों की स्थिति पर राज्यवार आँकड़े (2017)

क्षेत्रफल की वृष्टि से सर्वाधिक वनावरण वाले 5 राज्य हैं-

  1. मध्यप्रदेश (77,482 वर्ग किमी.)
  2. अरूणाचल प्रदेश (66,688 वर्ग किमी.)
  3. छत्तीसगढ़ (55,611 वर्ग किमी.)
  4. ओडिशा (51,619 वर्ग किमी.)
  5. महाराष्ट्र (50,778 वर्ग किमी.)

सर्वाधिक वनावरण प्रतिशतता वाले 5 राज्य/संघीय क्षेत्र हैं-

  1. मिजोरम (85.41 प्रतिशत)
  2. अरुणाचल प्रदेश (79.63 प्रतिशत)
  3. मेघालय (76.33 प्रतिशत)
  4. मणिपुर (75.46 प्रतिशत)
  5. नगालैंड (75.31 प्रतिशत)।
  • रिपोर्ट के ताजा आंकलन के अनुसार देश के 15 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों का 33% भू-भाग वनों से घिरा है।
  • इनमें से 7 राज्यों और संघ शासित प्रदेशों जैसे- मिजोरम, लक्षद्वीप, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, नागालैंड, मेघालय और मणिपुर का 75% से अधिक भू-भाग वनाच्छादित है ।
  • जबकि त्रिपुरा, गोवा, सिक्किम, केरल, उत्तरांखड, दादरा नगर हवेली, – छत्तसगढ़ और असम का 33 से 75% के बीच का भू-भाग वनों से घिरा है। देश का 40% वनाच्छादित क्षेत्र 10 हजार वर्ग किलोमीटर या इससे अधिक के 9 बड़े क्षेत्रों के रूप में मौजूद है।
  • म.प्र. में वनों का घनत्व राज्य में एक समान नहीं है। बालाघाट, मण्डला, डिण्डोरी, बैतूल, सिवनी, छिंदवाड़ा शहडोल, हरदा, श्योपुर, सीधी जिलों में घने वन दिखाई देते हैं । राज्य के ज्यादातर वन दक्षिणी और पूर्वी इलाके में बसे हुए है | श्योपुर और पन्ना उल्लेखनीय अपवाद रहे हैं।
  • मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वेक्षण रिपोर्ट 2018-19 के अनुसार सकल राज्य परेल उत्पाद में वानिकी क्षेत्र का अंश वर्ष 2018-19 में 2.35 प्रतिशत है। 

सर्वाधिक वनक्षेत्र वाले जिले (वन रिपोर्ट 2017)

  • बालाघाट- 4934 वर्ग किलोमीटर
  • छिंदवाड़ा- 4560 वर्ग किलोमीटर
  • बैतूल- 3653 वर्ग किलोमीटर
  • श्योपुर-3486 वर्ग किलोमीटर
  • सिवनी-3103 वर्ग किलोमीटर

सर्वाधिक वन प्रतिशत वाले जिले (2017)

  • बालाघाट- 53.46%
  • श्योपुर- 52.77%
  • उमरिया -49.85%
  • मण्डला-44.29%
  • डिण्डोरी-40.52%

न्यूनतम वन क्षेत्रफल वाले जिले- (2017)

  • उज्जैन – 27 वर्ग किमी
  • शाजापुर (अविभाजित) – 46 वर्ग किमी
  • रतलाम-55 वर्ग किमी
  • भिण्ड-108 वर्ग किमी
  • राजगढ़-168 वर्ग किमी

न्यूनतम वन प्रतिशत वाले जिले- (2017)

  • उज्जैन – 0.44%
  • शाजापुर (अविभाजित)-0.74%
  • रतलाम-1.13%
  • भिण्ड-2.43%
  • राजगढ़-2.73%

पर्यावरणीय दृष्टि से 33 % वनों का होना आवश्यक है।

  • मध्यप्रदेश देश का सर्वाधिक वनाच्छादित राज्य है ।
  • मध्यप्रदेश के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल 3,08,252 वर्ग किलोमीटर में से 94.69 वर्ग किलोमीटर पर वन क्षेत्र हैं।
  • राज्य के कुल भौगोलिक क्षेत्रफल का 30.72% भाग वन क्षेत्र के तहत आता है।
  • राज्य के कुल वनक्षेत्र का 65% आरक्षित वन, 33% संरक्षित वन एवं 2% क्षेत्रफल अवर्गीकृत वनों के अंतर्गत आता है।
  • वैधानिक दृष्टिकोण से वन क्षेत्र के वर्गीकरण के अंतर्गत 61886.49 वर्ग किमी. आरक्षित वन, 31098.04 वर्ग किमी. क्षेत्र में संरक्षित वन तथा 1704.85 वर्ग किमी क्षेत्र में अवर्गीकृत हैं
  • राज्य के कुल 52 जिलों को 16 क्षेत्रीय वन वृत्त तथा 62 क्षेत्रीय वन मण्डल में विभाजित किया गया है।
  • राज्य में कुल 925 वन ग्राम हैं, जिनमें 98 वन ग्राम राष्ट्रीय वन उद्यानों अभ्यारण्यों में स्थित, वीरान अथवा विस्थापित है।
  • मध्यप्रदेश में ऊष्णकटिबंधीय वन पाये जाते हैं।
  • कर्क रेखा से 23 ऊपर तथा नीचे वाले क्षेत्र को ऊष्ण कटिबंधीय कहा जाता है।
  • मध्यप्रदेश में कुल भू-क्षेत्रफल का लगभग 35% वन भूमि क्षेत्र के अंतर्गत है।
  • मध्यप्रदेश में 8697 हजार हेक्टेयर वन भूमि है। मध्यप्रदेश के वनों का वर्गीकरण पाँच आधारों यथा-प्रादेशिक आधार, भौगोलिक आधार, प्रजाति आधार, शासकीय आधार तथा वन विभाग के आधार पर किया गया है।
  • ऊष्ण कटिबंधीय अर्द्धपर्णपाती वन 100 से 150 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं।
  • मध्यप्रदेश में सर्वाधिक वन वृक्ष सागौन के हैं। दूसरे स्थान पर साल वन है।
  • मध्यप्रदेश में साल वृक्षों में कीट (साल बोरर) लगने से 10 लाख पेड़ों को काटना पड़ा था।

म.प्र. के वन संस्थान

  • वन अनुसंधान संस्थान देहरादून का क्षेत्रीय कार्यालय मध्यप्रदेश के जबलपुर में स्थित है।
  • इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ फॉरेस्ट मैनेजमेंट भोपाल में है।
  • प्रदेश के बालाघाट में “वन राजकीय महाविद्यालय” की स्थापना (1979) की गई है।
  • प्रदेश का दूसरा वन राजिक महाविद्यालय 1980 में बैतूल में स्थापित किया गया।
  • मध्यप्रदेश के शिवपुरी में प्रादेशिक वन स्कूल स्थापित है। प्रदेश के शिवपुरी, अमरकंटक, गोविंदगढ़ व लखनादौन में वनपाली व वन संरक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाता है ।
  • वन पहरेदारों का ट्रेनिंग स्कूल प्रदेश के बैतूल तथा रीवा में है।
  • वनों का शत-प्रतिशत राष्ट्रीयकरण करने वाला देश का प्रथम राज्य मध्यप्रदेश है।
  • प्रदेश में वनों का राष्ट्रीयकरण वर्ष 1970 में किया गया ।
  • प्रदेश में वनों के राष्ट्रीयकरण के तहत् सर्वप्रथम “तेंदूपत्ता” का राष्ट्रीयकरण किया गया था।
  • प्रदेश के खण्डवा, बैतूल, होशंगाबाद व बालाघाट जिलों की 50% से भी अधिक भूमि वन आच्छादित है।
  • सर्वाधिक आरक्षित वन खण्डवा वन वृत्त में हैं।
  • उज्जैन वन वृत्त में सबसे कम आरक्षित वन हैं ।
  • संरक्षित वन सर्वाधिक इंदौर वनवृत्त में तथा सबसे कम संरक्षित वन खण्डवा वन वृत्त में हैं।
  • मध्यप्रदेश वन विकास निगम की स्थापना 1975 में की गई।
  • प्रदेश में वन जीव संरक्षण अधिनियम 1974 में पारित हुआ ।
  • मध्यप्रदेश के जिन जिलों में वन क्षेत्र 33% से कम है, उनमें वनरोपण हेतु सन् 1976-77 से पंचवन योजना प्रारंभ की गई।
  • प्रदेश में सामाजिक वानिकी योजना 1976 में प्रारंभ की गई।
  • मध्यप्रदेश देश के 60% तेंदूपत्ता का उत्पादन करता है । तेंदूपत्ता उत्पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है।
  • प्रदेश के सागर, जबलपुर, छिंदवाड़ा, छतरपुर, पन्ना, बैतूल, सिवनी, होशंगाबाद जिलों में ऊष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
  • प्रदेश के बालाघाट, मण्डला, सीधी, शहडोल जिलों में ऊष्ण कटिबंधीय अर्द्ध पर्णपाती वन पाए जाते हैं।
  • ऊष्ण कटिबंधीय शुष्क पर्णपाती वन राज्य के श्योपुर, शिवपुरी, रतलाम, मंदसौर, टीकमगढ़, दतिया, ग्वालियर व खण्डवा जिलों में पाए जाते हैं।
  • मध्यप्रदेश का सम्पूर्ण वन क्षेत्र वन विभाग के नियंत्रण में है।
  • प्रदेश का मुख्य वन संपदा में सागौन, साल तथा बाँस शामिल है।
  • गौण वन संपदा में तेंदू पत्ता, लाख, हर्रा, खैर, गोंद आदि हैं ।
  • तेंदूपत्ता संग्रहण का मुख्य क्षेत्र सागर, जबलपुर व शहडोल है ।
  • मध्यप्रदेश में खैर से कत्था बनाया जाता है।
  • मध्यप्रदेश शासन द्वारा 1988 में तेंदू पत्ता नीति में बिचौलियों की संख्या समाप्त कर दी गयी है।
  • लाख उत्पादन में म.प्र. का बिहार के बाद दूसरा स्थान है ।
  • भिलावा का उपयोग स्याही और पेन्ट बनाने में होता है ।
  • हर्रा का उपयोग चर्मशोधन प्रिंटिंग प्रेस व दवाईयाँ बनाने में होता है।
  • प्रदेश में हर्रा का उत्पादन बालाघाट, मण्डला, छिंदवाड़ा, जबलपुर, सतना, बैतूल, पन्ना आदि जिलों में होता है ।
  • प्रदेश में बवूल, खैर व धावड़ा से गोंद प्राप्त किया जाता है।
  • सबसे कम वन होशंगाबाद वन वृत्त में है।
  • मध्यप्रदेश के होशंगाबाद जिले में साल वृक्षों की सघनता अधिक है।
  • मध्यप्रदेश शासन की पहली वननीति सन् 1952 में बनी थी तथा र वन नीति 2005 में बनी।
  • मध्यप्रदेश देश का कुल लकड़ी उत्पादन में 20% योगदान करता है।

मध्यप्रदेश में ऊष्ण कटिबंधीय वन

1.उष्ण कटिबंधीय पर्णपाती वन

  • ये वन पानी की कमी होने पर पत्ते गिरा देते हैं । ये वन औसत वर्षा 50 से 100 सेमी. हो, वहाँ पाये जाते हैं । ये वन इमारती लकड़ी सागौन शीशम, नीम, पीपल आदि के लिए प्रसिद्ध हैं।
  • ये वन प्रदेश के वन क्षेत्र के सर्वाधिक भाग पर पाये जाते हैं ।
  • ये वन प्रदेश के सागर, जबलपुर, दमोह, छिंदवाड़ा, पन्ना, छतरपुर होशंगाबाद, सिवनी आदि जिलों में पाये जाते हैं ।

2.ऊष्ण कटिबंधीय अर्द्ध-पर्णपाती वन

  • ये वन 100-150 सेमी. वर्षा वाले क्षेत्रों में पाये जाते हैं।
  • ये वन पूर्ण पत्तों को नहीं गिराते हैं । इनमें सागौन, साल, बाँस मुख्यतः पाये जाते हैं।
  • ये वन प्रदेश के मण्डला, बालाघाट, शहडोल, सीधी आदि जिलों में पाए जाते हैं।

3.ऊष्ण कटिबंधीय शुष्क वन

  • ये वन 75 सेमी. से कम वर्षा वाले क्षेत्रों में पाए जाते हैं । इन वनों को कँटीले वन भी कहते हैं । हर्रा, बबूल, शीशम, किकर, पलाश, तेंदू, धीरा  इनकी मुख्य प्रजातियाँ हैं।
  • ये वन प्रदेश के शिवपुरी, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर, रतलाम आदि जिलों में पाए जाते हैं।

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