1. एक स्वस्थ व्यक्ति का हृदय एक मिनट में औसतन कितने बार घड़कता है?
(a) 86
(b) 98
(c) 72
(d) 64
[M.P.P.C.S. (Pre) 2000 Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2007]
उत्तर – (c) 72
- एक स्वस्थ व्यक्ति के हृदय की धड़कन (Heart Beats) एक मिनट में लगभग 72-75 बार होती है।
- वृद्धों में यह कम जबकि बच्चों में यह सबसे ज्यादा होती है। हमारा हृदय प्रति मिनट 5-6 लीटर रुधिर पम्प करता है।
- हृदय में एक स्पंदन (Beat) की समाप्ति से लेकर अगले स्पंदन की समाप्ति तक एक हृदयी-चक्र (Cardiac Cycle) होता है।
- हृव स्पंदन की दर स्टेथोस्कोप द्वारा मापी जाती है, जिसमें रोगी के दिल की धड़कन की ध्वनि डॉक्टर के कानों तक ध्वनि के बहुपरावर्तन पहुंचती है।
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2. स्टेथोस्कोप में, रोगी की दिल की धड़कन की ध्वनि डॉक्टर के कानों तक पहुंचती है-
(a) ध्वनि के बहु विवर्तन द्वारा
(b) ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा
(c) ध्वनि के ध्रुवण द्वारा
(d) ध्वनि के बहु अपवर्तन द्वारा
[R.A.S./R.T.S. (Pre) 2021]
उत्तर – (b) ध्वनि के बहु परावर्तन द्वारा
- हृदय स्पंदन की दर स्टेथोस्कोप द्वारा मापी जाती है, जिसमें रोगी के दिल की धड़कन की ध्वनि डॉक्टर के कानों तक ध्वनि के बहुपरावर्तन पहुंचती है।
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3. हृदय कब आराम करता है?
(a) कभी नहीं
(b) सोते समय
(c) दो घड़कनों के बीच
(d) योगिक आसन करते समय
[U.P.P.C.S. (Pre) 2008, U.P. Lower Sub. (Pre) 2004]
उत्तर – (c) दो घड़कनों के बीच
- हृदय एक मांसल तंत्र है।
- सामान्यतया यह व्यस्क मनुष्य में 72-75 बार प्रति मिनट धड़कता है।
- हृदय दो घड़कनों के बीच आराम करता है।
- दो संकुचनों के बीच का काल विश्राम अथवा शिथिलन काल कहलाता है।
- इसमें संकुचन के दौरान आगे बढ़ा हुआ रक्त जब धमनियों के रिक्त स्थान में प्रवेश पाता है, तब धमनी की दीवार और रक्त में संघर्ष होता है और रक्त का दबाव बढ़ जाता है।
- अतः हृदय के दो संकुचनों के बीच धमनियों में जो रक्त भार रहता है, उसे विश्रामकालीन रक्तचाप कहते हैं।
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4. निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण हृदयाघात (Heart Attack) से संबंधित नहीं है?
(a) सीने में दर्द
(b) पसीना एवं जी मचलाना
(c) बांह में दर्द एवं झंझनाहट
(d) टांगों में दर्द
[M.P.P.C.S. (Pre) 2000]
उत्तर – (d) टांगों में दर्द
- सीने में दर्द, पसीना एवं जी मचलाना, बांह में दर्द तथा झंझनाहट इत्यादि लक्षण हृदयाघात या हृदयरोग से संबंधित हैं, जबकि टांगों में दर्द होना हृदयाघात से संबंधित नहीं है।
- मोटापा, उच्च तनाव, धूम्रपान, स्थानबद्ध जीवन शैली, वसायुक्त आहार इत्यादि इस रोग के प्रमुख कारण होते हैं, जिसके उपचार हेतु रुधिर स्कंदनरोधी ओषधियों का उपयोग किया जाता है।
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5. निम्न में से कौन हृदयाघात के सटीक लक्षण हैं?
(1) जी मिचलाना
(2) तेज पसीना आना
(3) सिर दर्द
(4) सीने में तेज दर्द
दिए गए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए:
(a) 1, 2, 3
(b) 2, 3, 4
(c) 1,3,4
(d) 1, 2, 4
[Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002]
उत्तर – (d) 1, 2, 4
- सीने में दर्द, पसीना एवं जी मचलाना, बांह में दर्द तथा झंझनाहट इत्यादि लक्षण हृदयाघात या हृदयरोग से संबंधित हैं।
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6. हृदय में कितने कक्ष होते हैं?
(a) 2
(b) 4
(c) 6
(d) 8
[M.P.P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर – (b) 4
- मानव हृदय, छाती के मध्य में थोड़ा-सा बाई ओर स्थित होता है।
- यह 1 दिन में लगभग । लाख बार धड़कता है। एक सामान्य मनुष्य का हृदय प्रति मिनट 72-75 बार घड़कता है।
- हृदय चार प्रमुख कक्षों में विभाजित होता है।
- दो ऊपरी कक्षों को दायां तथा बायां अलिंद या एट्रियम (कभी-कभी इसे Auricle भी कहते हैं) कहते हैं, जबकि दो निचले कक्षों को दायां एवं बायां निलय या वेंट्रिकल्स कहते हैं।
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7. हृदय स्पंदन एक विद्युतीय तरंग द्वारा निष्पादित होता है, जो उपजती है:
(a) मस्तिष्क में
(b) रुधिर में
(c) हृदय में
(d) मेरुरज्जु में
[Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2002]
उत्तर – (c) हृदय में
- हृदय में ऐसी कोशिकाएं होती हैं, जो विद्युतीय तरंग उत्पन्न करती हैं।
- इन्हें पेसमेकर कोशिकाएं कहते हैं।
- हृदय स्पंदन इन्हीं विद्युतीय तरंगों द्वारा निष्पादित होता है।
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8. मानव कलाई में नाड़ी स्पंदन करती है-
(a) हृदय से तेज
(b) हृदय से मंद
(c) हृदय के बराबर
(d) हृदय से स्वतंत्र होकर
[U.P.P.C.S. (Mains) 2008, 2010]
उत्तर – (c) हृदय के बराबर
- चिकित्सा विज्ञान में हृदय की धड़कन के कारण धमनियों में होने वाली हलचल को नाड़ी कहते हैं।
- सामान्यतः नाड़ी स्पंदन की दर हृदय के घड़कने की दर के बराबर होती है।
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9. एक स्वस्थ वयस्क मनुष्य में रक्त का कुल परिमाप होता है –
(a) 5-6 लीटर
(b) 3-4 लीटर
(c) 8-10 लॉटर
(d) 10-12 लीटर
[56 to 59 B.P.S.C. (Pre) 2015]
उत्तर – (a) 5-6 लीटर
- रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।
- यह रक्त वाहिनियों के अंदर विभिन्न अंगों में नियमित रूप से गतिशील रहता है।
- मनुष्य के शरीर में रक्त की मात्रा शरीर के भार का लगभग 7 से 8% होती है।
- अतः एक 70 किलोग्राम भार वाले स्वस्थ वयस्क मनुष्य के शरीर में लगभग 5 से 6 लीटर रक्त होता है, जो उसके संपूर्ण शरीर के भार का लगभग 1/13 वां भाग होता है।
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10. एक सामान्य 70 किग्रा. भार वाले वयस्क मनुष्य में रक्त की कुल मात्रा होती है, लगभग
(a) 6000 मिली.
(b) 5000 मिली.
(c) 4000 मिली.
(d) 3000 मिली.
[R.O./A.R.O. (Pre) Exam. 2017]
उत्तर – (a) 6000 मिली.
- एक 70 किलोग्राम भार वाले स्वस्थ वयस्क मनुष्य के शरीर में लगभग 5 से 6 लीटर रक्त होता है, जो उसके संपूर्ण शरीर के भार का लगभग 1/13 वां भाग होता है।
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11. रक्त होता है-
(a) एक संयोजी उत्तक
(b) एक उपकलित ऊतक
(c) उपर्युक्त दोनों
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर – (a) एक संयोजी उत्तक
- रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।
- रक्त वाहिनियों में प्रवाहित होने वाला यह गाढ़ा, कुछ चिपचिपा, लाल रंग का द्रव्य एक जीवित ऊतक है।
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12. हीमोग्लोबिन क्या है?
(a) पौधों की पत्तियों में पाया जाने वाला पदार्थ
(b) बोन मेरो में पाया जाने वाला पदार्थ
(c) मानव रक्त में पाया जाने वाला पदार्थ
(d) पिट्यूटरी ग्रंथि से निकलने वाला साव
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 1992]
उत्तर – (c) मानव रक्त में पाया जाने वाला पदार्थ
- “हीमोग्लोबिन’ (Haemoglobin) एक प्रोटीन है, जो कि मानव रक्त में पाया जाता है तथा इसके रासायनिक संयोजन में ‘ग्लोबिन’ (Globin) नामक ‘प्रोटीन’ हीम नामक लाल रंग के पदार्थ से जुड़ी रहती है।
- रुधिर का लाल रंग हीम (haeme) के कारण ही होता है।
- हीम की वलय (Ring) में केंद्रीय भाग लौह (Iron) का होता है।
- एक सामान्य व्यक्ति में हीमोग्लोबिन की औसतन मात्रा 15 ग्राम / 100 मिलीलीटर रुधिर होती है तथा यह शरीर में गैसों के परिवहन कर कार्य करता है।
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13. हीमोग्लोबिन के संबंध में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही नहीं है?
(a) यह लाल रंग का होता है।
(b) यह फेफड़ों से कोशिकाओं तक ऑक्सीजन का वाहक होता है।
(c) यह कुछ अम्लीय होता है।
(d) यह ऊतकों से फेफड़ों तक कार्बन डाइऑक्साइड को पहुंचाता है।
[U.P.B.E.O. (Pre) 2019]
उत्तर – (c) यह कुछ अम्लीय होता है।
- हीमोग्लोबिन का pH मान 7.1 से 7.4 के मध्य होता है।
- अर्थात हीमोग्लोबिन कुछ क्षारीय होता है।
- प्रश्नगत अन्य विकल्प सही है।
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14. रुधिर वर्णिका के संबंध में निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए तथा नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए-
1. इसमें लौह होता है।
2. यह रक्त को लाल रंग प्रदान करता है।
3. यह कुछ रोगों के प्रति प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
4. यह रक्त में ऑक्सीजन का वाहक है।
कूट :
(a) 1, 2, व 3
(b) 2, 3 व 4
(c) 1, 2 एवं 4
(d) 1, 2, 3 एवं 4
[U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2001, U.P.P.C.S. (Pre) 2005, 2001 U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004]
उत्तर – (c) 1, 2 एवं 4
- कुल रुचिर का लगभग 55 प्रतिशत भाग प्लाज्मा तथा शेष 45 प्रतिशत भाग रुधिराणु होता है।
- रुधिराणु तीन प्रकार के होते हैं- (1) लाल रक्त कणिकाएं, (2) श्वेत रुधिराणु तथा (3) प्लेटलेट्स।
- प्लाज्मा में लगभग 91 प्रतिशत जल तथा शेष 9 प्रतिशत भाग में विभिन्न प्रकार के अकार्बनिक और कार्बनिक पदार्थ होते हैं।
- लाल रुधिराणु कुल रुधिर का लगभग 40 प्रतिशत भाग होता है। यह रुधिर का कोशिकीय भाग है।
- रुधिराणु की लगभग 90 प्रतिशत लाल रक्त कणिकाएं होती हैं। ये केवल कशेरुकी प्राणियों में ही पाए जाते हैं।
- लाल रुधिराणुओं में हीमोग्लोबिन नामक प्रोटीन पाई जाती है।
- हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन कापरिवहन करता है, इसमें हीम (Haem) नामक लाल रंग का पदार्थ पाया जाता है, जो इसे लाल रंग प्रदान करता है।
- रोगों के प्रति प्रतिरक्षा प्रदान करने का कार्य श्वेत रक्त कणिकाएं करती है, जिन्हें ‘वीर सिपाही’ की संज्ञा से अभिहित किया जाता है।
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15. हीमोग्लोबिन के बारे में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए।
1. यह रक्त में ऑक्सीजन का संचार करता है।
2. यह लौह युक्त यौगिक है।
3. यह कुछ रोगों के प्रति, प्रतिरक्षा प्रदान करता है।
4. यह रक्त को लाल रंग प्रदान करता है।
इनमें से सही कथन है-
(a) 1, 2 और 3
(b) 1,3 और 4
(c) 2, 3 और 4
(d) 1, 2 और 4
[U.P.P.C.S. (Pre) 2016]
उत्तर – (d) 1, 2 और 4
- हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन का परिवहन करता है, इसमें हीम (Haem) नामक लाल रंग का पदार्थ पाया जाता है, जो इसे लाल रंग प्रदान करता है।
- इसमें लौह होता है।
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16. शरीर में हीमोग्लोबिन का कार्य है-
(a) ऑक्सीजन का परिवहन
(b) जीवाणु का नष्ट करना
(c) रक्ताल्पता को रोकना
(d) लौह का उपयोग
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2007]
उत्तर – (a) ऑक्सीजन का परिवहन
- हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन का परिवहन करता है।
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17. निम्नलिखित में से किस प्राकृतिक पदार्थ में लौह (Fe) विद्यमान होता है?
(a) क्लोरोफिल
(b) कोलेजन
(c) केरोटिन
(d) मायोग्लोबिन
[U.P. P.C.S. (Pre) 2020]
उत्तर – (d) मायोग्लोबिन
- मायोग्लोबिन (Myoglobin) लगभग सभी स्तनधारियों, सामान्यतः कशेरुकी प्राणियों के पेशीय ऊतकों में पाया जाने वाला एक प्रोटीन है।
- लौह (Fc) इसका आवश्यक घटक है।
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18. किस प्राणी के जीवद्रव्य में हीमोग्लोबिन का विलय हो जाता है?
(a) मेंढक
(b) मत्स्य
(c) मानव
(d) केंचुआ
[I.A.S. (Pre) 1994]
उत्तर – (d) केंचुआ
- केंचुआ (Earthworm) एक एनीलिड (Annelid) प्राणी है, जिसमें हीमोग्लोबिन प्लाज्मा में घुला होता है, जबकि अन्य कशेरुकियों में यह प्रोटीन (हीमोग्लोबिन) लाल रुधिर कणिकाओं में पाया जाता है।
- केंचुए में रुधिराणु रंगहीन तथा केंद्रकयुक्त (Nucleated) होते हैं और इस जंतु में परिसंचरण तंत्र बंद प्रकार (Closed Type) का होता है।
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19. रक्त में लाल रंग निम्न में से किसके कारण होता है?
(a) प्लाज्मा
(b) हीमोग्लोबिन
(c) हीमोसायनिन
(d) डब्ल्यू.बी.सी.
[U.P.P.C.S. (Pre) 1990]
उत्तर – (b) हीमोग्लोबिन
- रक्त में लाल रंग ऑक्सी हीमोग्लोबिन युक्त रुधिर कणिकाओं (R.B.C.) के कारण होता है।
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20. लाल रक्त कणिकाओं (R.B.Cs.) का रंग होता है-
(a) क्यूटिन के कारण
(b) क्लोरोफिल के कारण
(c) हीमोसायनिन के कारण
(d) हीमोग्लोबिन के कारण
[Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003]
उत्तर – (d) हीमोग्लोबिन के कारण
- लाल रक्त कणिकाओं (R.B.Cs.) का रंग लाल उनमें हीमोग्लोबिन (Haemoglobin) नामक प्रोटीन के ऑक्सीजन से संयुक्त होने के कारण होता है।
- लाल रुचिर कणिकाओं को एरिथ्रोसाइट्स (Erythrocytes) भी कहते हैं, जो कि सिर्फ कशेरुकियों (Vertebrates) के रुधिर में होते हैं।
- मनुष्य में ये केंद्रक विहीन तथा इनकी औसतन संख्या पुरुषों में 54 लाख तथा स्त्रियों में 48 लाख प्रति क्यूबिक मिमी. रक्त होती है।
- शरीर में ये गैसों के परिवहन का कार्य करती है।
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21. रक्त शरीर में क्या कार्य करता है?
(a) सारे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है।
(b) तरलता बनाता है।
(c) भोजन पाचन में सहायक है।
(d) खड़े होने में सहायता करता है।
[M.P.P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर – (a) सारे शरीर में ऑक्सीजन पहुंचाता है।
- रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है, जो रक्त वाहिनियों के अंदर विभिन्न अंगों में लगातार बहता रहता है।
- लाल रक्त कणिकाएं रक्त का एक महत्वपूर्ण घटक हैं, जो फेफड़ों से ऑक्सीजन और हीमोग्लोबिन शरीर के अन्य भागों में ले जाने के लिए जिम्मेदार होती हैं।
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22. मनुष्य का औसत रक्तचाप होता है-
(a) 60/100
(b) 20/80
(c) 60/140
(d) 120/80
[U.P.P.C.S. (Pre) 1993]
उत्तर – (d) 120/80
- मनुष्य का औसत रक्तचाप 120/80 होता है।
- धमनियों में रक्त दाब की दो अवस्थाएं होती हैं।
- पहले को प्रकुंचन दाब (Systolic Pressure) तथा दूसरे को प्रसारण दाब (Diastolic Pressure) कहते हैं।
- सामान्य तौर पर प्रकुंचन दाब 120 मिली. Hg तथा प्रसारण दाब 80 मिली. Hg होता है।
- रक्तचाप को डॉक्टर स्फिग्मोमैनोमीटर यंत्र द्वारा मापता है।
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23. स्वस्थ मनुष्य का रक्तचाप (सिस्टॉलिक व डाइस्टॉलिक) होता है।
(a) 120 मिमी. व 80 मिमी.
(b) 201 मिमी. व 110 मिमी.
(c) 90 मिमी. व 60 मिमी.
(d) 85 मिमी. व 55 मिमी.
[U.P.P.C.S. (Pre) 1991, Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2005]
उत्तर – (a) 120 मिमी. व 80 मिमी.
- मनुष्य का औसत रक्तचाप 120/80 होता है।
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24. इनमें से रक्त दाब का मापक यंत्र कौन-सा है?
(a) स्फेरोमीटर
(b) अनिमोमीटर
(c) स्फिग्मोमैनोमीटर
(d) एम मीटर
[48 to 52 B.P.S.C. (Pre) 2008]
उत्तर – (c) स्फिग्मोमैनोमीटर
- रक्तचाप को डॉक्टर स्फिग्मोमैनोमीटर यंत्र द्वारा मापता है।
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25. किसी व्यक्ति का रक्तचाप 140 एम. एम. Hg है, तो इस उल्लेख में Hg से तात्पर्य है-
(a) हाइड्रोजन से
(b) मर्करी से
(c) हाइग्रोमीटर से
(d) हीलियोग्राफ से
[U.P.P.C.S. (Pre) (Re. Exam) 2015]
उत्तर – (b) मर्करी से
- मनुष्य का औसत रक्तचाप 120/80 होता है।
- जब कोई डॉक्टर हमारा रक्तचाप नापता है, तो वह वायुमंडलीय दाब के सापेक्ष होता है।
- यदि किसी व्यक्ति का रक्तचाप 140 mm Hg है, तो इसमें Hg से तात्पर्य रासायनिक तत्व मर्करी अर्थात पारे से है।
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26. जब एक व्यक्ति वृद्ध होते जाता है. तो सामान्यतया उसका रक्त का दाब-
(a) घट जाता है।
(b) बढ़ जाता है।
(c) उतना ही रहता है।
(d) बदलता रहता है।
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2007]
उत्तर – (b) बढ़ जाता है।
- उम्र के बढ़ने के साथ-साथ मानव में रक्त दाब (Blood Pressure) बढ़ जाता है।
- सामान्य रक्त दाब (B.P.) 120/80 होता है, किंतु इससे अधिक होने पर उच्च रक्त दाब (High Blood Pressure), जबकि 120/80 से कम होने पर निम्न रक्त दाब (Low Blood Pressure) हो जाता है।
- रक्त दाब को स्फिग्मोमैनोमीटर नामक यंत्र से मापते हैं।
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27. नीचे चार व्यक्तियों के रक्त दाव का मान दिया है:
| श्रीमती (X) |
90/60 |
| श्री (X) |
160/120 |
| श्री (Y) |
120/80 |
| श्रीमती (Y) |
140/100 |
निम्नलिखित में से किसका रक्त दाव सामान्य है?
(a) श्रीमती X
(b) श्री X
(c) श्रीमती Y
(d) श्री Y
[I.A.S. (Pre) 1993]
उत्तर – (d) श्री Y
- श्री (Y) का रक्त दाब (Blood pressure) सामान्य है, क्योंकि एक स्वस्थ वयस्क मानव का रक्तदाब लगभग 120/80 होता है, जिसमें प्रकुंचन दाब (Systolic pressure) 120 मिमी. Hg है, जबकि प्रसारण या अनुशिथिलन दाब (Diastolic pressure) 80 मिमी. Hg है।
- श्रीमती (X) का रक्तचाप सामान्य से कम है, जबकि श्री (X) और श्रीमती (Y) के रक्तचाप सामान्य से अधिक है।
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28. हमारे शरीर में रक्त का दाब होता है-
(a) वायुमंडलीय दाब से कम
(b) वायुमंडलीय दाब से अधिक
(c) वायुमंडलीय दाब के बराबर
(d) उपर्युक्त में से कोई नहीं
[Uttarakhand P.C.S. (Mains) 2006]
उत्तर – (b) वायुमंडलीय दाब से अधिक
- जब कोई डॉक्टर हमारा रक्तदाब नापता है, तो वह वायुमंडलीय दाब के सापेक्ष होता है।
- उदाहरण के तौर पर यदि डॉक्टर द्वारा नापा गया रक्तदाब 120 mmHg है, इसका अर्थ यह है कि यह दाब वायुमंडलीय दाब से 120 mmHg अधिक है।
- रक्तदाब का मापन वायुमंडलीय दाब के सापेक्ष होता है, जबकि वायुमंडलीय दाब निर्वात के सापेक्ष मापा जाता है।
- अतः निर्वात के सापेक्ष रक्तचाप होगा 760+120=880 mmHg निरपेक्ष।
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29. निम्न रक्त वर्ग सार्वत्रिक दाता (Universal donor) होता है-
(a) B
(b) O
(c) A
(d) AB
[40 B.P.S.C. (Pre) 1995, 43 B.P.S.C. (Pre) 1999, U.P.U.D.A./L.D.A. (Pre) 2003, M.P. P.C.S. (Pre) 2000]
उत्तर – (b) O
- रक्त वर्ग ‘O’ सार्वत्रिक दाता (Universal donor) होता है, क्योंकि इसमें कोई प्रतिजन (Antigen) नहीं होता है।
- अतः इसका रुधिर सभी वर्ग के व्यक्तियों को चढ़ाया जा सकता है।
- दूसरी ओर इस वर्ग के प्लाज्मा (Plasma) में दोनों प्रतिरक्षियों (Antibodies) की उपस्थिति के कारण, किसी भी अन्य वर्ग के व्यक्ति का रुधिर इस वर्ग के व्यक्तियों को नहीं चढ़ा सकते हैं।
- रक्त वर्ग AB सर्वग्राही (Universal recipient) होता है।
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30. मानव रक्ताधान के लिए कौन-सा रक्त समूह सार्वत्रिक दाता (यूनिवर्सल डोनर) होता है?
(a) B’ समूह
(b) O समूह
(c) AB समूह
(d) A समूह
[M.P.P.C.S. (Pre) 2015, U.P.P.C.S. (Pre) 2016]
उत्तर – (b) O समूह
- रक्त वर्ग ‘O’ सार्वत्रिक दाता (Universal donor) होता है।
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31. अनिकथन (A): ‘ए-बी’ रक्त समूह के लोग सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता होते हैं।
कारण (R): रक्त समूह “ए-वी” की लाल रक्त कोशिका में कोई एंटीजन नहीं होता एवं इसीलिए अन्य किसी रक्त समूह के साथ समूहन (एग्लूटिनेशन)नहीं होता।
कूट:
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, तथा (R), (A) का सही कारण है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं परंतु (R), (A) का सही कारण नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
[M.P.P.C.S. (Pre) 2008]
उत्तर – (c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
- AB रक्त समूह के लोग सार्वभौमिक प्राप्तकर्ता (Universal recipient) होते हैं, क्योंकि इनमें एंटीजन और के दोनों होते हैं तथा कोई Antibody नहीं होता है, जिसके कारण एग्लूटिनेशन नहीं होता है।
- अतः AB रक्त वर्ग वाले व्यक्तियों को किसी भी रक्त वर्ग का रक्त दिया जा सकता है।
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32. वर्ग AB रक्त वाला व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति का रक्त ले सकता है, जिसका रक्त वर्ग………….. हो-
(a) मात्र A
(b) मात्र B
(c) मात्र AB
(d) कोई भी वर्ग
[Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2003]
उत्तर – (d) कोई भी वर्ग
- वर्ग AB रक्त वाला व्यक्ति किसी ऐसे व्यक्ति का रक्त ले सकता है, जिसका रक्त वर्ग कोई भी हो।
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33. AB रक्त वर्ग वाले व्यक्ति को कभी-कभी सार्विक रक्त आदाता कहा जाता है, क्योंकि-
(a) उसके रक्त में प्रतिजन (एंटीजन) का अभाव हो जाता है।
(b) उसके रक्त में प्रतिपिंड (एंटीबाडी) का अभाव होता है।
(c) उसके रक्त में प्रतिजन और प्रतिपिंड दोनों का अभाव होता है।
(d) उसके रक्त में प्रतिपिंड उपस्थित होते हैं।
[I.A.S. (Pre) 1995]
उत्तर – (b) उसके रक्त में प्रतिपिंड (एंटीबाडी) का अभाव होता है।
- AB रक्त समूह के लोग सार्विक रक्त आदाता होते हैं, क्योंकि इनमें एंटीजन और के दोनों होते हैं तथा कोई Antibody नहीं होता है, जिसके कारण एग्लूटिनेशन नहीं होता है।
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34. एक व्यक्ति, जिसका रक्त समूह ‘A’ है, सड़क दुर्घटना में गंभीर रूप से घायल हो जाता है तथा चिकित्सक रक्ताचान की सलाह देते हैं। उसके संबंधियों को रक्तदान हेतु कहा जाता है, जिनके रक्त समूह इस प्रकार पाए गए–
(i) पत्नी- ‘0’
(ii) माई – ‘AB’
(iii) पुत्र ‘A’
(iv) पुत्री – ‘O’
उपरोक्त में से कौन-से संबंधी उस घायल व्यक्ति को रक्ताधान हेतु रक्तदान कर सकते हैं?
(a) (i) व (ii)
(b) (ii) व (iii)
(c) (ii), (iii) व (iv)
(d) (i), (iii) व (iv)
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 2013]
उत्तर – (d) (i), (iii) व (iv)
- एक व्यक्ति, जिसका रक्त समूह ‘A’ है, वह रक्त समूह A या रक्त समूह AB वाले व्यक्ति को रक्तदान कर सकता है।
- इसी प्रकार, A रक्त समूह वाला व्यक्ति, रक्त समूह A या रक्त समूह ‘0’ के व्यक्ति से रक्त प्राप्त कर सकता है।
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35. एक मनुष्य दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है और उसे रक्ताधान की आवश्यकता होती है, किंतु उसके रक्त समूह का परीक्षण करने का समय नहीं है। निम्नलिखित में से कौन-सा रक्त समूह उसे दिया जा सकता है?
(a) O
(b) O
(c) AB
(d) AB
[U.P.P.C.S. (Pre) 2006]
उत्तर – (b) O
- 1900 ई. में कार्ल लैंडस्टीनर ने चार रक्त सूमहों (A, B, AB तथा 0) की खोज की।
- बाद में रीसस बंदर में एक अलग फैक्टर ढूंढा गया, जिसे Rh फैक्टर नाम दिया गया।
- जहां रक्त समूह A में एंटीजन a पाया जाता है, वहीं रक्त समूह B में b एंटीजन उपस्थित रहता है. जबकि AB समूह में a और b एंटीजन दोनों तथा O में कोई एंटीजन नहीं पाया जाता।
- किसी खास रक्त समूह के रक्त को जब विपरीत रक्त समूह से मिलाया जाता है, तो रक्त थक्के के रूप में जमने लगता है, जिसे रक्त स्कंदन (Blood Clotting) कहते हैं।
- चूंकि O- समूह के रक्त में न तो कोई एंटीजन उपस्थित रहता है और न ही आर.एच. फैक्टर, अतः इस रक्त समूह का रक्त किसी व्यक्ति को देने पर कोई स्कंदन नहीं होगा।
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36. अज्ञात रुधिर-वर्ग का एक व्यक्ति गंभीर रूप से दुर्घटनाग्रस्त हो जाता है और उसे तुरंत रक्त-आधान (Blood Transfusion) की जरूरत पड़ती है अस्पताल में आसानी से उपलब्ध निम्नलिखित रुधिर वर्गों में से किस एक का रक्त आधान के लिए उपयोग सुरक्षित होगा?
(a) O, Rh-
(b) O, Rh+
(c) AB, Rh-
(d) AB, Rh+
[I.A.S. (Pre) 2001]
उत्तर – (a) O, Rh-
- रक्त वर्ग ‘O’ सार्वत्रिक दाता (Universal donor) होता है, क्योंकि इसमें कोई प्रतिजन (Antigen) नहीं होता है।
- अतः इसका रुधिर सभी वर्ग के व्यक्तियों को चढ़ाया जा सकता है।
- रीसस बंदर में एक अलग फैक्टर ढूंढा गया, जिसे Rh फैक्टर नाम दिया गया।
- जहां रक्त समूह A में एंटीजन a पाया जाता है, वहीं रक्त समूह B में b एंटीजन उपस्थित रहता है. जबकि AB समूह में a और b एंटीजन दोनों तथा O में कोई एंटीजन नहीं पाया जाता।
- किसी खास रक्त समूह के रक्त को जब विपरीत रक्त समूह से मिलाया जाता है, तो रक्त थक्के के रूप में जमने लगता है, जिसे रक्त स्कंदन (Blood Clotting) कहते हैं।
- चूंकि O- समूह के रक्त में न तो कोई एंटीजन उपस्थित रहता है और न ही आर.एच. फैक्टर, अतः इस रक्त समूह का रक्त किसी व्यक्ति को देने पर कोई स्कंदन नहीं होगा।
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37. एक व्यक्ति दुर्घटना में घायल हो गया है। उसके रक्त समूह की जांच के लिए समय नहीं है। उसे निम्न में से कौन-सा खून दिया जाना चाहिए?
(a) AB. Rh+
(b) O, Rh+
(c) O, Rh-
(d) AB, Rh-
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 2013]
उत्तर – (c) O, Rh-
- किसी खास रक्त समूह के रक्त को जब विपरीत रक्त समूह से मिलाया जाता है, तो रक्त थक्के के रूप में जमने लगता है, जिसे रक्त स्कंदन (Blood Clotting) कहते हैं।
- चूंकि O- समूह के रक्त में न तो कोई एंटीजन उपस्थित रहता है और न ही आर.एच. फैक्टर, अतः इस रक्त समूह का रक्त किसी व्यक्ति को देने पर कोई स्कंदन नहीं होगा।
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38. रक्त समूहों की खोज की-
(a) अलेक्जेंडर फ्लेमिंग ने
(b) विलियम हार्वे ने
(c) रॉबर्ट कौंच ने
(d) कार्ल लैंडस्टीनर ने
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2007, U.P. Lower Sub. (Pre) 2004 U.P.P.C.S. (Pre) 2003]
उत्तर – (d) कार्ल लैंडस्टीनर ने
- 1900 ई. में कार्ल लैंडस्टीनर ने चार रक्त सूमहों (A, B, AB तथा 0) की खोज की।
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39. Rh कारक का नाम संबंधित है, एक प्रकार के-
(a) कपि से
(b) मानव से
(c) बंदर से
(d) चूहा से
[U.P.U.D.A./L.D.A. (Mains) 2010]
उत्तर – (c) बंदर से
- इसका नाम RH कारक है, जो रीसस बंदर से प्राप्त किया गया है।
- रीसस (आरएच) कारक लाल रक्त कोशिकाओं की सतह पर पाया जाने वाला एक आनुवंशिक प्रोटीन है।
- यदि हमारे रक्त में प्रोटीन है, तो हम आरएच पॉजिटिव हैं।
- यदि हमारे रक्त में प्रोटीन की कमी है, तो हम Rh-negative हैं।
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40. माता गर्भस्थ शिशु Rh रक्त प्रकार विसंगति की समस्या उत्पन्न हो सकती है, यदि माता…………….. है एवं उसका गर्भस्थ शिशु…………….
(a) Rh सहित; Rh हीन
(b) Rh हीन; Rh सहित
(c) Rh हीन; Rh हीन
(d) Rh सहित; Rh सहित
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 2021]
उत्तर – (b) Rh हीन; Rh सहित
- Rh-तत्व का लक्षण भी आनुवंशिक होता है।
- इसकी वंशागति मेंडेलियन नियमों के अनुसार, दो एलीली जीन्स (R, r) द्वारा होती है।
- इसमें जीन (Rh+ लक्षण) जीनr(Rh- लक्षण) पर प्रबल (Dominant) होता है।
- Rh हीन (Rh-) माता→ जीनोटाइप rr
Rh सहित (Rh+) पिता →जीनोटाइप RR या Rr
माता के अण्डाणु→
पिता के शुक्राणु ↓ सभी सताने Rh+ आधी सताने Rh+तथा उब्वी Rh-
- अतः माता गर्भस्थ शिशु Rh रक्त प्रकार विसंगति (एरिथ्रोब्लास्टोसिस फीटैलिस) की समस्या उत्पन्न हो सकती है, यदि माता Rh हीन (Rh-) एवं उसका गर्भस्थ शिशु Rh सहित (Rh+) हो।
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41. एक विवाहित दंपति ने एक बालक को गोद लिया। इसके कुछ वर्ष उपरांत उन्हें जुड़वां पुत्र हुए। दंपति में एक का रक्त वर्ग AB पॉजिटिव है और दूसरे का निगेटिव है। तीनों पुत्रों में से एक का रक्त वर्ग A पॉजिटिव, दूसरे का B पॉजिटिव और तीसरे का 0 पॉजिटिव है। गोद लिए गए पुत्र का रक्त वर्ग कौन-सा है?
(a) O पॉजिटिव
(b) A पॉजिटिव
(c) B पॉजिटिव
(d) उपलब्ध जानकारी के आधार पर कहा नहीं जा सकता
[I.A.S. (Pre) 2011]
उत्तर – (a) O पॉजिटिव
- दंपति में एक का रक्त वर्ग AB पॉजिटिव एवं दूसरे का निगेटिव होने पर उनके जुड़वां पुत्रों के रक्त वर्ग A पॉजिटिव या B पॉजिटिव होंगे।
- इस प्रकार स्पष्ट है कि तीसरे (गोद लिए) पुत्र का रक्त वर्ग O पॉजिटिव है।
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42. यदि एक पिता का रक्त वर्ग A है और माता का O तो बताइए कि उनके पुत्र का निम्नलिखित में से कौन-सा रक्त वर्ग हो सकता है?
(a) B
(b) AB
(c) O
(d) B, AB अथवा O
[I.A.S. (Pre) 1994]
उत्तर – (c) O
- यदि जनक (Parents) में से पिता का रक्त वर्ग (Blood Group) A है तथा माता का रक्त वर्ग हो तो, उनके पुत्र का रक्त वर्ग ‘0’ अथवा ‘A’ होगा।
- बर्नस्टीन (Bernstein 1924) ने पता लगाया कि A. B, O रुधिर वर्ग मनुष्य का एक आनुवंशिक लक्षण होता है।
- अतः यह संतानों में मेंडल के नियमों के अनुसार, जनक से प्राप्त जीन्स के आधार पर ही विकसित होता है।
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43. किसी एक सामान्य व्यक्ति के रक्त का pH स्तर क्या होता है?
(a) 4.5-4.6
(b) 6.45-6.55
(c) 7.35-7.45
(d) 8.25-8.35
[I.A.S. (Pre) 2008, U.P.P.C.S. (Mains) 2007, M.P.P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर – (c) 7.35-7.45
- रक्त का सामान्य pH स्तर 7.35 से 7.45 के मध्य अर्थात 7.4 होता है।
- एसिडोसिस एवं अल्कालोसिस (Acidosis and Alcalosis) से पीड़ित रोगियों का pH स्तर इस सीमा से बाहर होता है।
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44. रक्त का pH मान है-
(a) 5.0
(b) 6.4
(c) 7.4
(d) 8.0
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]
उत्तर – (c) 7.4
- रक्त का सामान्य pH स्तर 7.35 से 7.45 के मध्य अर्थात 7.4 होता है।
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45. प्रतिजन (Antigen) वह पदार्थ है, जो :
(a) हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करता है।
(b) विषाक्तता के उपचार के लिए प्रयुक्त होता है।
(c) शरीर के ताप को कम करता है।
(d) प्रतिपिंड (Antibody) के निर्माण को उद्दीप्त करता है।
[I.A.S.(Pre) 2001]
उत्तर – (d) प्रतिपिंड (Antibody) के निर्माण को उद्दीप्त करता है।
- प्रतिजन (Antigens) वे पदार्थ हैं, जो प्रतिपिंड या प्रतिरक्षी (Antibody) के निर्माण को उद्दीप्त करते हैं तथा प्रतिरक्षा तंत्र को प्रवर्तित करते हैं।
- प्रतिजन दो प्रकार की ग्लाइकोप्रोटीन्स (Glycoproteins) के रूप में होते हैं- ‘ए’ तथा ‘बी’ (A and B)। एंटीबॉडी भी दो प्रकार के होते है- a-रोधी (Anti-A or a) तथा b-रोधी (Anti-B or b), किंतु ये विशुद्ध प्रोटीन्स (Pure Proteins) के रूप में होते हैं।
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46. प्रतिजन ऐसा पदार्थ है, जो-
(a) शरीर ताप का कम करता है।
(b) हानिकारक बैक्टीरिया को नष्ट करता है।
(c) प्रतिरक्षा तंत्र को प्रवर्तित करता है।
(d) विष के प्रतिकारक के रूप में प्रयोग किया जाता है।
[I.A.S. (Pre) 1997]
उत्तर – (c) प्रतिरक्षा तंत्र को प्रवर्तित करता है।
- प्रतिजन (Antigens) वे पदार्थ हैं, जो प्रतिपिंड या प्रतिरक्षी (Antibody) के निर्माण को उद्दीप्त करते हैं तथा प्रतिरक्षा तंत्र को प्रवर्तित करते हैं।
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47. निम्न में से एंटिजन्स की मूल विशेषता क्या है?
(a) वे हीमोग्लोचिन के निर्माण को प्रेरित करते हैं।
(b) वे प्रतिरक्षियों के निर्माण को प्रेरित करते हैं।
(c) वे इन्सुलिन को नष्ट करते हैं।
(d) वे प्रतिरक्षियों के विरुद्ध कार्य करते हैं।
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003]
उत्तर – (b) वे प्रतिरक्षियों के निर्माण को प्रेरित करते हैं।
- एंटिजन्स वे पदार्थ हैं, जो प्रतिरक्षियों के निर्माण को प्रेरित करते हैं।
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48. शरीर में निम्न में से कौन-सा संक्रमण से हमारी रक्षा करता है?
(a) आर. बी. सी.
(b) डब्ल्यू. बी. सी.
(c) रक्त प्लाज्मा
(d) हीमोग्लोबिन
[R.A.S./R.T.S. (Pre) 1999]
उत्तर – (b) डब्ल्यू. बी. सी.
- डब्ल्यू. बी. सी. (श्वेत रक्त कणिकाएं) विशेष रुधिर कणिकाएं होती है, जो कि शरीर के किसी रोग से संक्रमित होने पर उस विशेष संक्रमित स्थल पर पहुंच कर हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria), विषाणुओं (Viruses) कवकों (Fungi) इत्यादि का भक्षण करके शरीर को संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करती हैं।
- इसके अलावा ये शरीर के प्रतिरक्षण, एलर्जी तथा अति संवेदनशीलता (Hypersensitivity) की स्थिति में महत्वपूर्ण कार्य करती है।
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49. सफेद रक्त कण का मुख्य कार्य है-
(a) ऑक्सीजन दोना
(b) कार्बन डाइऑक्साइड दोना
(c) रोग प्रतिरोधक क्षमता धारण करना
(d) उपरोक्त में से कोई नहीं
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003]
उत्तर – (c) रोग प्रतिरोधक क्षमता धारण करना
- सफेद रक्त कण का मुख्य कार्य शरीर के किसी रोग से संक्रमित होने पर उस विशेष संक्रमित स्थल पर पहुंच कर हानिकारक जीवाणुओं (Bacteria), विषाणुओं (Viruses) कवकों (Fungi) इत्यादि का भक्षण करके शरीर को संक्रमण से सुरक्षा प्रदान करना हैं।
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50. रुधिर के प्लाज्मा में निम्नलिखित में से किसके द्वारा एंटीबॉडी निर्मित होती है?
(a) मोनोसाइट
(b) लिम्फोसाइट
(c) इयोसिनोफिल
(d) न्यूट्रोफिल
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2003]
उत्तर – (b) लिम्फोसाइट
- रुधिर के प्लाज्मा (Plasma) में लिम्फोसाइट्स (Lymphocytes) द्वारा एंटीबॉडी या प्रतिरक्षी प्रोटीन्स निर्मित होती हैं, जो कि विष पदार्थों को निष्क्रिय (Inactive) करती हैं।
- लिम्फोसाइट्स सबसे छोटे श्वेत रुधिराणु किंतु संख्या में अधिक (कुल W.B.Cs. का 20-30%) होते है।
- इनका केंद्रक बड़ा और गोल या एक ओर कुछ चिपटा-सा होता है।
- लिम्फोसाइट्स गश्ती सेना की भांति समस्त शरीर में घूमती रहती हैं तथा सुरक्षा तंत्र के सारे भागों के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।
- ये प्रायः रक्त के संचलन में भी सहायक होते हैं।
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51. निम्नलिखित में से कौन रक्त के संचलन में मदद करता है?
(a) लिम्फोसाइट
(b) मोनोसाइट
(c) एरिथ्रोसाइट
(d) रक्त प्लेटलेट
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं उपर्युक्त में से एक से अधिक
[66 B.P.S.C. (Pre) (Re. Exam) 2020]
उत्तर – (a) लिम्फोसाइट
- लिम्फोसाइट्स गश्ती सेना की भांति समस्त शरीर में घूमती रहती हैं तथा सुरक्षा तंत्र के सारे भागों के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।
- ये प्रायः रक्त के संचलन में भी सहायक होते हैं।
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52. मनुष्य के शरीर के किस अंग में लिम्फोसाइट्स का निर्माण होता है?
(a) यकृत
(b) अस्थिमज्जा
(c) तिल्ली
(d) अग्न्याशय
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
[B.P.S.C. (Pre) 2019]
उत्तर – (e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/ उपर्युक्त में से एक से अधिक
- मनुष्य के शरीर में तिल्ली या प्लीहा (Spleen) थाइमस ग्रंथि, अस्थिमज्जा (Bone marrow) आदि में लिम्फोसाइट्स का निर्माण होता है।
- लिम्फोसाइट्स एक प्रकार की श्वेत रक्त कणिकाएं (W.B.C.) होती हैं, जो गश्ती सेना की भांति समस्त शरीर में घूमती रहती हैं तथा सुरक्षा तंत्र के सारे भागों के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।
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53. प्रतिरक्षा (असंक्राम्यता) का सर्वाधिक संबंध है-
(a) लिम्फोसाइट्स से
(b) मोनोसाइट्स से
(c) लाल रुधिर कणों से
(d) थाम्बोसाइट्स से
[R.A.S./R.T.S. (Pre) 1993]
उत्तर – (a) लिम्फोसाइट्स से
- लिम्फोसाइट्स एक प्रकार की श्वेत रक्त कणिकाएं (W.B.C.) होती हैं, जो गश्ती सेना की भांति समस्त शरीर में घूमती रहती हैं तथा सुरक्षा तंत्र के सारे भागों के बीच सामंजस्य स्थापित करती हैं।
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54. मानव रक्त की श्यानता का कारण है।
(a) रक्त में प्रोटीन
(b) प्लाज्मा में बिम्बाणु
(c) रक्त में आर.बी.सी. तथा डब्ल्यू, बी.सी.
(d) उपर्युक्त सभी
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]
उत्तर – (a) रक्त में प्रोटीन
- मानव रक्त की श्यानता मुख्यतः प्लाज्मा में प्रोटीन, हीमाटोक्रिट (रक्त में लाल रुधिर कणिकाओं का आयतन प्रतिशत) आदि पर निर्भर करती है।
- रक्त में श्वेत रुधिर कणिकाओं एवं प्लेटलेट्स (बिम्बाणु) की उपस्थिति का उसकी श्यानता पर कोई खास प्रभाव नहीं पड़ता है।
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55. मानव के श्वेत रक्त कणों (डब्ल्यू. बी.सी.) का व्यास होता है. लगभग-
(a) 0.007 मिमी.
(b) 0.7 मिमी.
(c) 0.07 मिमी.
(d) 0.0007 मिमी.
[Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2008]
उत्तर – (a) 0.007 मिमी.
- श्वेत रक्त कण (WB.C.) प्रायः मनुष्यों में पाए जाते हैं। इनकी संख्या लाल रक्त कणों से कम होती है।
- ये दो प्रकार के होते हैं-कणिकामय तथा कणिकाविहीन।
- श्वेत रक्त कण हमारे शरीर का प्रतिरक्षा तंत्र बनाते हैं।
- ‘लिम्फोसाइट’ (Lymphocyte) एक प्रकार की श्वेत रक्त कणिकाएं होती हैं, जिनका व्यास लगभग 7 माइक्रोमीटर (0.007 मिलीमीटर) होता है।
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56. रुधिर में श्वेत रक्त कणिकाओं की अत्यधिक मात्रा में उपस्थिति को रोग विज्ञान की भाषा में कहते हैं-
(a) एनोक्सिया
(b) ल्यूकेमिया
(c) एनीमिया
(d) सेप्टीमीसिया
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2007]
उत्तर – (b) ल्यूकेमिया
- ल्यूकेमिया (Leukemia) को रक्त कैंसर (Blood Cancer) कहते हैं, जिसमें रुधिर में श्वेत रक्त कणिकाओं (White Blood Corpuscles- W.B.Cs.) की संख्या आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती है।
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57. लाल रक्त कणिकाएं मुख्यतया बनती हैं-
(a) यकृत में
(b) गुर्दे में
(c) हृदय में
(d) अस्थि मज्जा में
[Uttarakhand U.D.A./L.D.A. (Mains) 2006, Uttarakhand Lower Sub. (Pre) 2010]
उत्तर – (d) अस्थि मज्जा में
- लाल रक्त कणिकाएं श्वसन अंगों से ऑक्सीजन लेकर इसे सारे शरीर में पहुंचाने का कार्य करती हैं।
- लाल रक्त कणिकाएं अस्थि मज्जा (Bone marrow) में विकसित होती हैं तथा मनुष्य के शरीर में लगभग 120 दिनों तक प्रसारित होती रहती हैं।
- तिल्ली या प्लीहा (Spleen) पुरानी रक्त कणिकाओं को नष्ट करने का कार्य करता है।
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58. WBC का बनना तथा RBC का विनाश होता है-
(a) लसिका ग्रंथि में
(b) प्लीहा में
(c) पेंक्रियाज़ में
(d) यकृत में
[U.P.P.C.S. (SpL.) (Mains) 2008]
उत्तर – (b) प्लीहा में
- शरीर में लाल रक्त कणिकाओं का जीवनकाल लगभग 120 दिनों का होता है, इसके बाद प्लीहा में इनका विनाश हो जाता है।
- लिम्फोसाइट्स तथा न्यूट्रोफिल्स श्वेत रक्त कणिकाओं के दो प्रमुख प्रकार हैं।
- लिम्फोसाइट्स का निर्माण प्लीहा, लसिका ग्रंथि तथा थाइमस ग्रंथि में होता है।
- न्यूट्रोफिल्स का निर्माण अस्थि मज्जा में होता है।
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59. रक्त ग्लूकोज स्तर सामान्यतः व्यक्त किया जाता है-
(a) Hg के mm में
(b) मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में
(c) भाग प्रति मिलियन में
(d) ग्राम प्रति लीटर में
[I.A.S. (Pre) 2000]
उत्तर – (b) मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में
- रक्त ग्लूकोज या शर्करा का स्तर मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में व्यक्त किया जाता है।
- रक्त में ग्लूकोज (Glucose) की सामान्य मात्रा 100 मिग्रा. (0.1ग्राम) प्रति 100 मिली. होती है।
- रक्त ग्लूकोज के नियमन के लिए ‘अग्न्याशय’ (Pancreas) से इंसुलिन (Insulin) नामक हॉ मॉन का स्राव होता है।
- इस हॉर्मोन की कमी से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा 300-500 मिग्रा. प्रति 100 मिली. रुधिर तक बढ़ जाती है. जिससे मधुमेह (Diabetes mellitus) का रोग हो जाता है।
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60. रक्त में शर्करा का स्तर सामान्यतया प्रदर्शित किया जाता है-
(a) एनएम ऑफ Hg के रूप में
(b) मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के रूप में
(c) पार्ट्स प्रति मिलियन के रूप में
(d) ग्राम प्रति लीटर के रूप में
[U.P.P.C.S. (Pre) 2021]
उत्तर – (b) मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर के रूप में
- रक्त ग्लूकोज या शर्करा का स्तर मिलीग्राम प्रति डेसीलीटर में व्यक्त किया जाता है।
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61. हृदय को रक्त का संमरण करने वाली धमनियां कहलाती हैं-
(a) ग्रीवा धमनियां
(b) यकृत धमनियां
(c) हृदय धमनियां
(d) फुफ्फुस धमनियां
[I.A.S. (Pre) 1997]
उत्तर – (c) हृदय धमनियां
- हृदय (Heart) को रक्त का संमरण करने वाली धमनियां हृदय धमनियां (Coronary Arteries) कहलाती हैं, जो कि शुद्ध रुधिर को स्वयं हृदय की दीवार तक पहुंचाने का कार्य करती हैं।
- स्तनियों का हृदय चार कोष्ठकों (Chambers) में बंटा होता है, जिसमें दो अलिन्द तथा दो निलय पाए जाते हैं, जबकि फुफ्फुस धमनियां हृदय से फेफड़ों तक रक्त पहुंचाती है।
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62. रक्त का थक्का बनने में फाइब्रिनोजिन को फाइब्रिन के परिवर्तन में भाग लेने वाला एंजाइम है-
(a) पेप्सिन
(b) माल्टेज
(c) थ्रॉम्बिन
(d) प्रोधौम्बिन
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 1999]
उत्तर – (c) थ्रॉम्बिन
- रक्त का थक्का (Blood Clotting) बनने की प्रक्रिया एक जटिल रासायनिक प्रक्रिया होती है, जिसे तीन चरणों (Steps) में बांटा गया है।
- इसके अंतिम चरण में थ्रॉम्बिन (Thrombin) एक एंजाइम की भांति कार्य करके प्लाज्मा की घुलनशील फाइब्रिनोजन (Fibrinogen) प्रोटीन के फाइब्रिन (Fibrin) नामक अघुलनशील प्रोटीन अणुओं में संश्लेषण को प्रेरित करता है।
- रुधिर स्कंदन की क्रिया विधि का स्पष्ट विवरण ‘हॉवेल’ (Howell) ने दिया था।
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63. किस शारीरिक प्रक्रम से थ्रॉम्बिन का संबंध है?
(a) उत्सर्जन
(b) रक्त जमाव
(c) प्रजनन
(d) वृद्धि
[U.P.P.C.S. (Pre) 2011]
उत्तर – (b) रक्त जमाव
- रक्त का थक्का (Blood Clotting) बनने की प्रक्रिया का थ्रॉम्बिन से संबंध है।
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64. प्लाज्मा में जल का प्रतिशत होता है-
(a) 60%
(b) 70%
(c) 80%
(d) 90%
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर – (d) 90%
- रक्त प्लाज्मा रक्त का पीले रंग का तरल घटक है, जिसमें संपूर्ण रक्त की रक्त कोशिकाएं सामान्य रूप से निलंबित रहती हैं।
- प्लाज्मा, कुल रक्त की मात्रा का लगभग 55% तक होता है।
- प्लाज्मा में लगभग 91-92% अंश जल का होता है तथा शेष 8-9% भाग में विभिन्न प्रकार के कार्बनिक और अकार्बनिक पदार्थ होते हैं।
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65. किसी सामान्य व्यक्ति में रक्त के संदर्भ में, निम्नलिखित में से कौन- सा कथन सही है?
(a) धमनियों की तुलना में, शिराओं की संख्या कम होती है और उनमें हर समय शरीर के रक्त की कम मात्रा रहती है।
(b) रक्त की कुल मात्रा का लगभग 70 प्रतिशत रक्त कोशिकाओं के रूप में होता है।
(c) श्वेत रक्त कोशिकाएं (डब्ल्यू. बी.सी.) केवल लसीका पर्व की बनी होती हैं।
(d) रक्त में डब्ल्यू.बी.सी. की तुलना में बिम्बाणु अधिक होते हैं।
[I.A.S. (Pre) 2002]
उत्तर – (d) रक्त में डब्ल्यू.बी.सी. की तुलना में बिम्बाणु अधिक होते हैं।
- रक्त में श्वेत रुधिराणुओं (White Blood Corpuscles – W.B.Cs.) या ल्यूकोसाइट्स (Leukocytes) की तुलना में बिम्बाणु या रुल्चर प्लेटलेट्स (Blood Platelets) की संख्या अधिक होती है, जबकि इनकी संख्या लाल रुधिराणुओं (R.B.Cs.) की अपेक्षा कम होती है।
- लाल रुधिराणुओं की औसत संख्या पुरुषों में 54 लाख प्रति क्यूबिक मिमी. रक्त या स्त्रियों में 48 लाख प्रति क्यूबिक मिमी. रक्त, श्वेत रुचिराणु 5,000 से 11,000 प्रति क्यूबिक मिमी. रक्त, जबकि रुधिर प्लेटलेट्स की संख्या 1.5 लाख से 5 लाख प्रति क्यूबिक मिमी. रक्त होती है।
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66. निम्नलिखित पर विचार कीजिए:
कथन (A): कटे स्थानों से रक्त प्रवाह रोकने के लिए फिटकरी का उपयोग किया जाता है।
कारण (R): रक्त एक कोलाइडी निकाय है. जिसमें ऋणावेशित कोलाइडी कण होते हैं। फिटकरी के एल्युमीनियम आयनों की स्कंदन शक्ति अधिक होती है, अतः रक्त स्कंदित हो जाता है।
नीचे दिए गए कूटों का उपयोग करके सही उत्तर चुनिए:
कूट:
(a) (A) एवं (R) दोनों सही है, तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) एवं (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
[U.P.P.C.S. (Mains) 2010]
उत्तर – (a) (A) एवं (R) दोनों सही है, तथा (R), (A) की सही व्याख्या है।
- फिटकरी एक रंगहीन क्रिस्टलीय पदार्थ है।
- फिटकरी में उपस्थित एल्युमीनियम आयनों की अधिक स्कंदन शक्ति के कारण यह रक्त प्रवाह रोकने के लिए प्रयोग की जाती है।
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67. किस देश के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा कृत्रिम रक्त बनाया है, जो प्लास्टिक रक्त की किस्म है, जिसे किसी मरीज को………. (किस्म)का विचार किए बिना दिया जा सकता है?
(a) यू.एस.ए.
(b) ब्रिटेन
(c) चीन
(d) नॉर्वे
[U.P.P.C.S. (Mains) 2006]
उत्तर – (b) ब्रिटेन
- ब्रिटेन के शेफील्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने कृत्रिम प्लास्टिक रक्त तैयार किया है, जिसे आपात स्थिति में खून के विकल्प के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है। यह कृत्रिम रक्त हल्का है और इसे ठंडी जगह में भी रखने की जरूरत नहीं है।
- साथ ही यह लंबे समय तक खराब नहीं होता।
- इस रक्त को प्लास्टिक कणिकाओं से तैयार किया गया है।
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