केस स्टडीज : नैतिकता संबंधी मुद्दों का विश्लेषण

प्रश्न:  आप हाल ही में मद्यपान निषिद्ध करने वाले एक राज्य के एक जिले में पुलिस अधीक्षक (SP) के रुप में पदस्थापित किए गए हैं। जिला आबकारी विभाग ने कई छापे मारे और बड़ी मात्रा में शराब जब्त की है, जिसके लिए उसे राज्यव्यापी सार्वजनिक सराहना मिली है। कुछ महीनों बाद मीडिया में यह खबर आई कि इस जिले में, सैकड़ों अवैध शराब की बोतलें सरकारी मलखाने या स्टोर से गायब हैं। फलस्वरुप, सरकार को शर्मिंदा होना पड़ा। जिला आबकारी ढांचे के समग्र प्रभारी DM द्वारा आपको इस प्रकरण की जाँच का कार्य सौंपा गया है। जाँच करने पर, आपको उन राजनेताओं और सरकारी अधिकारियों के बीच सांठगांठ का पता चलता है, जो जब्त की गई शराब की तस्करी करते थे और अवैध माध्यमों से उसे राज्य में तथा राज्य के बाहर बेचते थे। इस संदर्भ में, निम्नलिखित विकल्पों का मूल्यांकन कीजिए:

1. अपनी जाँच के परिणाम DM के सामने रखेंगे और स्पष्ट रुप से यह बात बताते हुए कि प्रथम दृष्टया आपराधिक कृत्य किये गए हैं, आगे की कार्यवाही के लिए निर्देश मांगेंगे।

2. सभी अभियुक्तों को कानूनी प्रावधानों के अंतर्गत आरोपित बनाएंगे और कानून को अपना काम करने देंगे।

3. इस प्रकरण की गंभीरता से अवगत होने के नाते, विस्तृत जाँच रिपोर्ट को अलग से सार्वजनिक डोमेन में रखेंगे और सांठगांठ का खुलासा करेंगे। साथ ही, दिए गए विकल्पों तक अपने आपको सीमित न रखते हुए, अंतिम कार्यवाही का सुझाव दीजिए जिसे आप वरीयता देंगे।

दृष्टिकोण

  • संक्षेप में नैतिकता संबंधी मुद्दों का विश्लेषण कीजिए।
  • केस स्टडी में शामिल प्रमुख हितधारकों का उल्लेख कीजिए।
  • प्रत्येक दिये गए विकल्प का उसके गुण एवं दोष सहित मूल्यांकन कीजिए।
  • दी गई परिस्थितियों में आप जिस अंतिम कार्रवाई का अनुसरण करेंगे उल्लेख कीजिए।

उत्तर

दिया गया प्रकरण गंभीर नैतिकता संबंधी चिंताएँ उत्पन्न करता है ,क्योंकि इसमें आधिकारिक भंडारगृह से चोरी के साथ-साथ राज्य में प्रतिबंधित वस्तु के अन्तर्राज्यीय और अंत:राज्यीय अवैध व्यापार सहित निजी लाभ के लिए रिश्वत और सार्वजनिक पद का अनैतिक उपयोग सम्मिलित है। इस प्रकार के कृत्यों से सरकारी अधिकारियों के प्रति लोगों में अविश्वास उत्पन्न होता है और कुछ लोगों के कुकृत्यों के कारण सम्पूर्ण विभाग और प्रशासन की प्रतिष्ठा धूमिल होती है। दिये गए प्रकरण में, लोक सेवकों की जवाबदेही सुनिश्चित करना सरकारी तंत्र का कर्तव्य है। यह सरकार में जनता का विश्वास सुनिश्चित करने के लिए सर्वोपरि है।

इस प्रकरण में प्रमुख हितधारकों में सम्मिलित हैं: कथित अपराधियों के रूप में कुछ सरकारी अधिकारी और राजनेता, जाँच अधिकारी के रूप में मैं (पुलिस अधीक्षक), जिला आबकारी व्यवस्था के समग्र प्रभारी के रूप में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM), मीडिया, राज्य प्रशासन और समग्र रूप से जनता। इस प्रकरण से निपटने के लिए निम्नलिखित विकल्प हैं:

  • अपनी जाँच का परिणाम DM को सूचित करना और प्रथम दृष्ट्या किये गए अपराधों को स्पष्ट रूप से वर्णित करते हुए, आगे की कार्रवाई के लिए निर्देश मांगना,

मुझे इस प्रकरण में जाँच अधिकारी निर्दिष्ट करने वाले DM इस प्रकरण के लिए मेरे पर्यवेक्षक अधिकारी बन जाते हैं। पदानुक्रम सम्बन्धी सरकार के नियमों के अनुसार, मेरे लिए अपनी जाँच रिपोर्ट DM को सौंपना अनिवार्य है। जिला आबकारी व्यवस्था के समग्र प्रभारी के रूप में मेरी जाँच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करना और आवश्यक होने पर अपने वरिष्ठ अधिकारियों या न्यायालयों को रिपोर्ट प्रस्तुत करना उनका विशेषाधिकार है। इस कार्रवाई के संपादन के साथ समस्या यह है कि दोषियों को न्यायालय में दोषी ठहराने में अत्यधिक समय लग सकता है, जो सरलता से बच निकलने के लिए इस विलंब का उपयोग कर सकते हैं। यह मेरे कर्तव्य-पालन की विफलता के रूप में भी संकेत कर सकता है।

  •  सभी अभियुक्तों पर विभिन्न विधिक प्रावधानों के अंतर्गत आरोप तय करना और विधि के अनुसार कार्य होने देना

यहां, प्रकृति में न्याय शीघ्र होगा और सरकार तथा उसके तंत्र में जनता का विश्वास सुदृढ़ होगा। इस प्रकार का कदम इस कार्रवाई के निष्पादन द्वारा संभवतः किसी भी विवाद या सम्मिलित किसी भी पक्ष, अर्थात अपराधी, मीडिया, जनता या विभाग द्वारा दोषारोपण से बचाएगा। यह प्रशासन का ईमानदार और सख्त आचरण प्रदर्शित करेगा तथा संभावित अपराधियों को किसी भी प्रकार का अपराध करने से हतोत्साहित करेगा।

परन्तु, इस कार्रवाई के साथ समस्या यह है कि इसमें प्रथम दृष्ट्या प्रकरण की सम्पूर्ण जाँच सम्मिलित नहीं है। प्रकरण के तथ्यों को सत्यापित किए बिना सभी आरोपियों पर आरोप तय करना उत्तरवर्ती चरणों में अभियोजन को कमज़ोर कर सकता है। इसके अतिरिक्त, चूंकि इस प्रकार के कदम के लिए जिला आबकारी व्यवस्था के समग्र प्रभारी DM को अनिवार्य रूप से रिपोर्ट प्रस्तुत करने की कोई आवश्यकता नहीं है, इसलिए DM द्वारा मुझसे सरकारी प्रक्रियाओं और पदानुक्रम के नियमों का पालन करने के लिए कहा जा सकता है।

  • प्रकरण की गंभीरता से अवगत होने के कारण, सावधानीपूर्वक विस्तृत जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखना और सांठ-गांठ को उजागर करना।

इससे जनता का विश्वास पुनः प्राप्त किया जा सकता है, क्योंकि इससे जाँच की पारदर्शी और निष्पक्ष प्रकृति प्रदर्शित होगी, परन्तु तत्काल आवश्यकता के बिना जाँच रिपोर्ट को सार्वजनिक डोमेन में रखना उचित नहीं है। कानून यह निर्धारित करता है कि ऐसी रिपोर्ट या तो वरिष्ठ अधिकारियों को या न्यायालय को प्रस्तुत की जानी चाहिए। इसे सार्वजनिक डोमेन में रखने से आगे की जाँच कमजोर हो सकती है, क्योंकि अपराधी अपने भेद को गोपनीय रखने हेतु रिपोर्ट का उपयोग कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त, इस प्रकार के कदम उठाने से केंद्रीय सिविल सेवा (आचरण) नियमावली, 1964 का भी उल्लंघन हो सकता है। इस विकल्प के माध्यम से इस प्रकार की सांठ-गांठ को प्रकट करना केवल अंतिम उपाय माना जाना चाहिए।

मेरी अंतिम कार्रवाई के रूप में सबसे पहले घटना की सम्पूर्ण जाँच की जाएगी। जाँच पूर्ण होने तक, मैं अनुशंसा करूंगा/करूंगी कि जिन सरकारी अधिकारियों की जाँच की जा रही है, ऐसे अधिकारियों को जाँच के दौरान निलंबित रखा जाए। तत्पश्चात मैं एक आधिकारिक रिपोर्ट में अपने सभी निष्कर्षों को प्रलेखित करूंगा/करूंगी, उसे DM को प्रस्तुत करूंगा/करूंगी और आगे की कार्रवाई का अनुसरण करूंगा/करूंगी ताकि समय पर न्याय प्राप्त हो सके। इस प्रकार की कार्रवाई यह सुनिश्चित करेगी कि अपेक्षित कानूनों और सरकारी प्रक्रियाओं का अक्षरश: पालन किया गया है। अंत में, मैं कुछ सुझाव भी दे सकता/सकती हूँ जिन्हें भविष्य में ऐसी स्थिति से बचने के लिए अपनाया जा सकता है, जैसे कि सरकारी भंडारगृह में CCTV लगाना, व्हिसल ब्लोअर या सामान्य नागरिकों को आगे आने के लिए प्रोत्साहित करना आदि।

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