भूटान और नेपाल के साथ भारत की खुली सीमा नीतियों का संक्षिप्त वर्णन

प्रश्न: यद्यपि खुली सीमाएं सांस्कृतिक निरंतरता एवं उत्कृष्ट अंतःक्रिया की सुविधा प्रदान करती हैं, लेकिन इनके सुरक्षा निहितार्थों को कम करके नहीं आंका जा सकता है। नेपाल और भूटान के साथ भारत की खुली सीमा नीति के सन्दर्भ में इस कथन की चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • भूटान और नेपाल के साथ भारत की खुली सीमा नीतियों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  • खुली सीमा नीतियों के सकारात्मक परिणामों का संक्षिप्त वर्णन कीजिए।
  • भारत की सुरक्षा पर इसके निहितार्थों को स्पष्ट कीजिए।
  • आगे की राह सुझाइए।

उत्तर

शांति एवं मैत्री संधि,1950 भारत और नेपाल के मध्य व्यक्तियों और वस्तुओं के मुक्त आवागमन की सुविधा प्रदान करती है। इसी प्रकार, भारत-भूटान मैत्री संधि, 2007 के तहत भी समान प्रावधान किए गए हैं। भारतीय नागरिकों के लिए नेपाल और भूटान में प्रवेश करने हेतु वीजा अनिवार्य नहीं है तथा इसी प्रकार, नेपाल और भूटान के नागरिकों के लिए भी भारत में प्रवेश करने हेतु वीजा अनिवार्य नहीं है। 699 किलोमीटर लंबी भारत-भूटान सीमा और 1,751 किमी लंबी भारत-नेपाल सीमा के साथ सीमांकन स्तम्भों की उपस्थिति के बावजूद सीमाएं खुली हुई हैं।

लाभ 

  • सांस्कृतिक सम्पर्क और पर्यटन में वृद्धि होती है। 
  • समुदायों और सीमा व्यापार के मध्य घनिष्ठ संबंधों को बढ़ावा परिणामतः पारस्परिक लाभ में वृद्धि होती है। 
  • मानव पूंजी का कुशल उपयोग: सिक्किम में नेपाली श्रमबल ने मौसमी कृषि के लिए श्रमिक प्रदान करके इस क्षेत्र के आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
  • राजनयिक संबंध सुदृढ़ होते हैं और भारत को अपनी सॉफ्ट पॉवर का विस्तार करने में सहायता मिलती है, क्योंकि नेपाल एवं भूटान लघु बाजार और अल्प आर्थिक अवसरों वाले स्थलरुद्ध देश हैं।

चिंताएं

  •  मानव तस्करी, निषिद्ध माल, नकली भारतीय मुद्राओं, हथियार और ड्रग्स की तस्करी संबंधी घटनाओं में वृद्धि हुई है।
  • खुली और छिद्रिल (porous) अंतरराष्ट्रीय सीमाओं की रक्षा सुरक्षा बलों के लिए एक चुनौती उत्पन्न करती है।
  • एक खुली सीमा, आतंकवादियों और विद्रोहियों को सरल निर्गमन की सुविधा प्रदान करती है।
  • 1980 के दशक के अंत में पंजाब और कश्मीर से संबद्ध आतंकवादी तत्वों ने नेपाल के माध्यम से भारत में प्रवेश किया था।
  • उत्तर पूर्व के विभिन्न विद्रोही समूहों जैसे यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (ULFA), नेशनल डेमोक्रेटिक फ्रंट ऑफ बोडोलैंड (NDFB), और कामतपुर लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (KLO) ने भी खुली सीमा का दुरुपयोग किया है।
  • विद्रोहियों और आतंकवादियों के अतिरिक्त भारतीय और नेपाली सुरक्षा बलों द्वारा पीछा करते समय कई अपराधी खुली सीमा से सुरक्षित निकल जाते हैं।
  • इस सीमा के माध्यम से चीन या अन्यत्र निर्मित सस्ते उत्पादों की भारत में सरलता से आपूर्ति की जा रही है।
  • यद्यपि सभी प्रवेश और निकास बिंदु नेपाल और भूटान के नागरिकों को ही स्वतंत्र रूप से भारत में प्रवेश करने की अनुमति देते हैं, किन्तु अंतरराष्ट्रीय प्रवेश बिंदुओं के माध्यम से प्रवेश करने वाले लोगों की नागरिकता या वाहनों के पंजीकरण को सत्यापित करने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है।

उभरते मुद्दों का समाधान करने के लिए सीमा पार करने वाले व्यक्तियों और वाहनों की पहचान पत्र की जाँच तथा भूटान और नेपाल के सुरक्षा बलों के साथ समन्वय में वृद्धि जैसे उपायों को अपनाया जाना चाहिए। इसी प्रकार, इन सीमाओं की रक्षा करने वाले सशस्त्र सीमा बल (SSB) का सशक्तिकरण और आधुनिकीकरण करना समय की मांग है। सीमा प्रशासन में परिवर्तन से संबंधित कोई भी निर्णय वैश्वीकरण की अनिवार्यता और सीमा के दोनों ओर के व्यक्तियों के हितों को ध्यान में रखकर लेना चाहिए।

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