मध्यप्रदेश में कृषि

कृषि के नवीनतम् आँकड़े : एक नजर में

मध्यप्रदेश आर्थिक सर्वे रिपोर्ट 2018-19 के अनुसार, सकल राज्य घरेलू उत्पाद में क्षेत्रवार योगदान प्रचलित व स्थिर भावों के आधार पर निम्न प्रकार रहा-

  • भारत की भाँति मध्यप्रदेश भी एक कृषि प्रधान राज्य है।
  • मध्यप्रदेश का सकल राज्य घरेलू उत्पाद स्थिर भावों पर आधार वर्ष (2011-12) में 315562 करोड़ रुपये थी, जो वर्ष 2017-18 (त्वरित) एवं 2018-19 (अग्रिम) में क्रमशः बढ़कर 500151 करोड़ एवं 535362 करोड़ होने का अनुमान है। जो आधार वर्ष से क्रमशः 58.50 एवं 69.65 प्रतिशत अधिक है।
  • 2018-19 के अग्रिम अनुमानों के अनुसार राज्य के सकल घरेल जा में वर्ष 2017-18 (त्वरित) की तुलना में प्रचलित भावों पर 11.13 शित तथा स्थिर भावों पर 7.04 प्रतिशत की वृद्धि रही । वर्ष 2018-19 जमि) के दौरान विगत वर्ष से प्राथमिक क्षेत्र में 5.48 प्रतिशत की वृद्धि यांकलित की गई है । इसी प्रकार द्वितीयक एवं तृतीय क्षेत्र में क्रमशः 5.71 प्रतिशत की एवं 7.06 प्रतिशत की वृद्धि अनुमानित रही।
  • स्थिर भावों (वर्ष 2011-12) के आधार पर प्रति व्यक्ति शुद्ध आय वर्ष 2017-18 (त्वरित) में 55677 रुपये थी जो बढ़कर वर्ष 2018-19 (अग्रिम) में रुपये 58706 हो गई, जो गतवर्ष की तुलना में 5.44 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है । प्रचलित भावों के आधार पर राज्य की शुद्ध प्रति व्यक्ति आय (वर्ष 2017-18) में 82941 रुपये से बढ़कर वर्ष 2018-19 (अग्रिम) में 90998 हो गई, जो 9.71 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाती है।
  • प्रदेश में प्रतिव्यक्ति आय देश के अन्य राज्यों की तुलना में कम है, प्रचलित मूल्य पर मध्यप्रदेश में प्रतिव्यक्ति आय वर्ष 1993-94 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रतिव्यक्ति आय का 85 प्रतिशत थी । वर्ष 2017-18 में 70.86 प्रतिशत के स्तर पर है। इस प्रकार देश में 21.92 प्रतिशत की तुलना में राज्य में 31.65 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी रेखा के नीचे हैं।
  • नीति आयोग भारत सरकार द्वारा जारी सतत विकास लक्ष्यों के तुलनात्मक विश्लेषण के अनुसार प्रदेश में गरीबी के स्तर पर 29 राज्यों में से 27वें स्थान पर है।
  • राज्य की अर्थव्यवस्था में (सकल घरेलू उत्पाद) वर्ष 2017-18 के त्वरित अनुमानों के अनुसार फसल क्षेत्र का योगदान 25.86 प्रतिशत है ।
  • 2017-18 में शुद्ध सिंचित क्षेत्र 105.66 लाख हेक्टेयर है, जो वर्ष 2016-17 के 98.76 लाख हेक्टेयर से 6.99 प्रतिशत अधिक रहा।
  • वर्ष 2017-18 में कुल बोया गया क्षेत्र 251.14 लाख हेक्टेयर है ।
  • वर्ष 2017-18 में शुद्ध बोया गया क्षेत्र 151.191 लाख हेक्टेयर है।
  • वर्ष 2017-18 में शुद्ध बोये गये क्षेत्र में शुद्ध सिंचित क्षेत्र का प्रतिशत 69.6 है।
  • मध्यप्रदेश में कृषि विभाग का नाम अब किसान कल्याण तथा कृषि विभाग हो गया है।
  • मध्यप्रदेश की लगभग 70% जनसंख्या कृषि पर निर्भर है।
  • मध्यप्रदेश के लगभग 49% क्षेत्रफल पर कृषि होती है ।
  • मध्यप्रदेश में अंगूर की खेती के लिए मशहूर रतलाम जिल म स्थापत पाही केन्द्र सरकार ने अंगूर अनुसंधान केन्द्र स्थापित किया है।
  • प्रदेश सरकार ने अफीम की खेती पर प्रतिबंध लगाने व किसानों को वैकल्पिक खेती एवं अन्य व्यवसाय से जोड़ने की कार्य योजना पर निर्णय लिया है।
  • मध्यप्रदेश की सर्वाधिक सिंचित फसल गेहूँ है ।
  • मध्यप्रदेश में”कृषि उद्योग विकास निगम द्वारा प्रदेश के पहले ‘सैलरिच’ कि खाद संयंत्र की स्थापना भोपाल में की है।
  • मध्यप्रदेश में सरकार ने वर्ष 1997 में मत्स्यपालन को बढावा देने के लिए इसे कृषि का दर्जा प्रदान किया है।
  • मध्यप्रदेश में कृषि जोतों का औसत आकार 2.2 हेक्टेयर है।
  • देश के कुल सोयाबीन उत्पादन का लगभग 55-60% मध्यप्रदेश में होता है।
  • चावल मध्यप्रदेश की सर्वाधिक महत्वपूर्ण फसल है ।
  • मध्यप्रदेश का खाद्यान्न उत्पादन में देश में चौथा स्थान है।
  • सोयाबीन, चना, अलसी, दलहन, अफीम के उत्पादन में प्रदेश का देश में प्रथम स्थान है।
  • ज्वार, तिल, तिलहन व अरहर के उत्पादन में प्रदेश का देश में द्वितीय स्थान है।
  • मध्यप्रदेश में कुल कृषि योग्य भूमि का 43% भाग एक फसलीय तथा 70% भाग द्वि-फसलीय कृषि भूमि के अंतर्गत आता है।

कृषि क्षेत्र

फसलों के आधार पर मध्यप्रदेश को 7 कृषि क्षेत्रों में बाँटा गया है –

  1. ज्वार का क्षेत्र- गुना, शिवपुरी, श्योपुर, पश्चिमी मुरैना ।
  2. गेहूँ व ज्वार का क्षेत्र-बघेलखण्ड तथा मालवा के पठार का मध्य भाग, भिण्ड, मुरैना, ग्वालियर ।
  3. कपास व गेहूँ का क्षेत्र-उज्जैन, मंदसौर, शाजापुर, राजगढ़, देवास व सीहोर।
  4. कपास का क्षेत्र-पश्चिमी मध्यप्रदेश (खण्डवा, खरगोन, बड़वानी, धार, रतलाम, झाबुआ)
  5. चावल व कपास क्षेत्र-खण्डवा
  6. चावल, कपास,ज्वार क्षेत्र- क्षेत्र सिवनी, छिंदवाड़ा, बैतूल
  7. चावल का क्षेत्र- बघेलखण्ड क्षेत्र (शहडोल, मण्डला, बालाघाट, सिवनी, सीधी, जबलपुर)

उपयोग के आधार पर वर्गीकरण

  1. व्यापारिक फसलें- कपास, गन्ना, तम्बाकू, अफीम, पटसन, अलसी, तिल, सोयाबीन आदि।
  2. खाद्यान्न फसलें- गेहूँ, चावल, ज्वार, मक्का, बाजरा, चना, दालें, तिलहन ।

कृषि विभाग द्वारा मध्यप्रदेश को 5 कृषि प्रदेशों में विभाजित किया गया है-

  1. पश्चिम में काली मिट्टी का प्रदेश-इसमें मंदसौर, नीमच, रतलाम, झाबुआ, बड़वानी, हरदा, धार, देवास, उज्जैन, इंदौर, खण्डवा, खरगोन आदि शामिल हैं।
  2. उत्तर में ज्वार, गेहूँ का प्रदेश-इसमें मुरैना, श्योपुर, भिण्ड, ग्वालियर, दतिया, शिवपुरी, गुना, छतरपुर व टीकमगढ़ जिले आते हैं।
  3. मध्य में गेहूँ का मालवा प्रदेश-इसमें भोपाल, सीहोर, होशंगाबाद, नरसिंहपुर, रायसेन, विदिशा, सागर व दमोह जिले शामिल हैं।
  4. चावल गेहूँ का प्रदेश- इसमें पन्ना, सतना, कटनी, उमरिया, जबलपुर व सिवनी जिले आते हैं।
  5. संपूर्ण पूर्वी मध्यप्रदेश चावल का प्रदेश-इसमें रीवा, सीधी, शहडोल,अनूपपुर, डिण्डोरी, मण्डला, बालाघाट आदि जिले शामिल हैं।

अन्य तथ्य

  • मध्यप्रदेश बीज तथा फार्म विकास निगम की स्थापना वर्ष 1980 में की गई, जिसका मुख्यालय भोपाल में है।
  • मवेशियों के लिए चारा बनाने का संयंत्र धार में स्थापित किया गया है।
  • मध्यप्रदेश के इंदौर में भारत की प्रथम जैविक खेती इकाई स्थापित की गई है।
  • मध्यप्रदेश कृषि उद्योग विकास निगम की स्थापना वर्ष 1969-70 में की गई।
  • मध्यप्रदेश राज्य भण्डार गृह निगम की स्थापना फरवरी 1958 में की गई।
  • कृषि उपज में वृद्धि करने के उद्देश्य से प्रदेश में “विपुल उत्पादन कार्यक्रम” चलाया जा रहा है।
  • प्रदेश में लघु कृषक विकास अधिकरण की स्थापना (SFDA) 1971 में की गई।
  • अनुसूचित जनजाति के कृषकों की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिये प्रदेश में “सूरज धारा” योजना चलायी जा रही है।
  • मध्यप्रदेश में किसानों के हित संरक्षण हेतु प्रत्येक जिले में एक “किसान परिषद्” का गठन किया गया है, जिसका अध्यक्ष जिला पंचायत अध्यक्ष होता है।
  • मध्यप्रदेश का प्रथम कृषि विश्वविद्यालय जबलपुर में है, जो जवाहरलाल नेहरू कृषि विश्वविद्यालय के नाम से जाना जाता है । इसकी स्थापना 1964 में हुई थी।
  • मध्यप्रदेश के खण्डवा, खरगोन को ‘सफेद सोना’ का क्षेत्र कहा जाता है ।
  • मध्यप्रदेश का सोयाबीन का सबसे बड़ा कारखाना सिवनी मालवा में है।
  • उज्जैन में एशिया का सबसे बड़ा सोयाबीन कारखाना है ।
  • राष्ट्रीय सोयाबीन अनुसंधान केन्द्र इंदौर में है।
  • धान अनुसंधान केन्द्र बड़वानी मध्यप्रदेश में है । (भारत का कटक में)
  • उद्यानिकी महाविद्यालय मंदसौर, रेहली (सागर) और छिंदवाड़ा में है।
  • वर्ष 1989 से केन्द्र सरकार द्वारा प्रदेश के 33 जिलों में सूखे की स्थिति के समय सहायता हेतु “थ्रस्ट परियोजना” चलायी जा रही है । इसके तहत चावल, गेहूँ व अरहर की फसलों को शत-प्रतिशत केन्द्रीय सहायता दी जाती है।
  • मध्यप्रदेश को “सोयाबीन स्टेट या सोया राजधानी” भी कहा जाता है।
  • मालवा का पठार गेहूँ का भण्डार कहा जाता है, क्योंकि यहाँ प्रदेश का सर्वाधिक गेहूँ का उत्पादन होता है ।
  • मध्यप्रदेश के खरीफ की फसलों का प्रतिशत 62, जबकि रबी की फसलों का प्रतिशत 38 है।
  • मध्यप्रदेश का कपास उत्पादन में देश में तीसरा स्थान तथा गेहूँ के उत्पादन में चौथा स्थान है।
  • प्रदेश में सर्वाधिक कृषि जोत का आकार 5.6 हेक्टेयर हरदा जिले में है, जबकि न्यूनतम कृषि जोत का आकार 1.5 हेक्टेयर कटनी व नीमच जिले में हैं।
  • मंदसौर व नीमच राज्य के अफीम उत्पादक जिले हैं।
  • खण्डवा व बुरहानपुर राज्य के गाँजा उत्पादक जिले हैं।
  • प्रदेश में सर्वाधिक सरसों उत्पादक क्षेत्र ग्वालियर, भिण्ड, मुरैना है ।
  • प्रदेश में सर्वाधिक मूंगफली का उत्पादन खरगोन जिले में होता है।
  • मध्यप्रदेश में चने का प्रमुख उत्पादक क्षेत्र होशंगाबाद है।
  • प्रदेश में पीली क्रांति का संबंध सरसों, अलसी और सोयाबीन के में वृद्धि से हैं।
  • प्रदेश में सबसे अधिक मात्रा में नाइट्रोजनीय उर्वरकों का प्रयोग होता है।

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