राष्ट्रीय आय की अवधारणा
प्रश्न: राष्ट्रीय आय के आकलन की मूल्य-वर्धित, आय और व्यय विधियों को स्पष्ट कीजिए।
दृष्टिकोण:
- राष्ट्रीय आय की अवधारणा का संक्षेप में वर्णन कीजिए।
- राष्ट्रीय आय का आकलन करने के लिए मूल्य-वर्द्धित ,आय और व्यय विधियों की व्याख्या कीजिए।
- भारत में उपयोग की जाने वाली विधियों पर संक्षिप्त टिप्पणी के साथ उत्तर समाप्त कीजिए।
उत्तर:
राष्ट्रीय आय एक वित्तीय वर्ष के दौरान किसी देश में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य को संदर्भित करती है। इसकी गणना सामान्यतया कारक लागत अर्थात् उत्पादन के सभी कारकों की लागत अथवा बाजार मूल्य (जिसमें उत्पादन लागत, उत्पादकों के लिए अप्रत्यक्ष कर और सब्सिडी सम्मिलित हैं) पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) या सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) के संदर्भ में की जाती है। राष्ट्रीय आय का आकलन विभिन्न विधियों जैसे मूल्य-बर्द्धित विधि, आय विधि और व्यय विधि से किया जा सकता है।
मूल्य-वर्द्धित विधि: इसे उत्पादन विधि या वस्तु-सूची (इन्वेंट्री) विधि के रूप में भी जाना जाता है। इसमें एक निश्चित अवधि के दौरान देश में उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं का बाजार मूल्य ज्ञात करना सम्मिलित होता है। अंतिम वस्तुओं के उत्पादन के लिए उपभोग किए जाने वाले मध्यवर्ती उत्पादों के मूल्यों को घटा दिया जाता है, ताकि मूल्यों का दोहराव न हो। उत्पादन प्रक्रिया के दौरान उपकरणों के मूल्यह्रास और अप्रत्यक्ष करों को भी घटा दिया जाता है। इन आकलनों के योग से औद्योगिक उत्पत्ति द्वारा वर्गीकृत कारक लागत पर निवल घरेलू उत्पाद प्राप्त होता है। इसमें विदेशों से प्राप्त होने वाली निवल आय को भी जोड़ा जाता है, जिससे निवल राष्ट्रीय आय प्राप्त होती है।
NNPFC = GDPMP – निश्चित पूंजी की खपत (मूल्यह्रास) + विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय – निवल अप्रत्यक्ष कर
जहां, NNPFc= कारक लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद और GDPMP= बाजार मूल्य पर सकल घरेलू उत्पाद है।
आय विधि: इस पद्धति में उत्पादन के कारकों अर्थात् मानव श्रम, पूँजी, निश्चित प्राकृतिक संसाधनों (भूमि) और उद्यमशीलता द्वारा मजदूरी, ब्याज, किराए और लाभ के माध्यम से एक निश्चित अवधि के दौरान अर्जित समस्त आय को जोड़ा जाता है। राष्ट्रीय आय निवल घरेलू कारक आय है जिसे विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय के साथ जोड़ा जाता है।
NNPFC = GDPMP + विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय।
जहां, ANPFC = कारक लागत पर निवल घरेलू उत्पाद है।
व्यय विधि: इस पद्धति में राष्ट्रीय आय की गणना करने के लिए किसी अर्थव्यवस्था के भीतर वित्तीय वर्ष के दौरान उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के क्रय पर व्यय राशि के कुल योग को आकलित किया जाता है। व्यय को चार श्रेणियों में वर्गीकृत किया जा सकता है;जैसे – निजी अंतिम उपभोग व्यय, सरकार द्वारा किया गया अंतिम उपभोग व्यय, निवेश व्यय या सकल घरेलू पूंजी निर्माण और निवल निर्यात (निर्यात – आयात)।
GDPMP = निजी अंतिम उपभोग व्यय + सरकारी अंतिम उपभोग व्यय + निवेश व्यय + निवल निर्यात (निर्यात – आयात)।
NNPrc= GDPMP – मूल्यह्रास + विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय – निवल अप्रत्यक्ष कर
भारत में राष्ट्रीय आय की गणना के लिए इन विधियों का विविधतापूर्वक उपयोग किया जाता है। केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) मूल्यवर्द्धित पद्धति का उपयोग करके कृषि, वानिकी, मत्स्यन, खनन और विनिर्माण, निर्माण आदि गतिविधियों के माध्यम से किए गए मूल्यवर्द्धन की गणना करता है। व्यय विधि के तहत केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO) निजी अंतिम उपभोग, सरकारी अंतिम उपभोग, सकल स्थिर पूंजी निर्माण, निवल निर्यात व आयात जैसे व्यय के विभिन्न घटकों को जोड़ता है।
