परमाणु भयादोहन(निवारण) के अर्थ की व्याख्या
प्रश्न: आत्मरक्षा की एक रणनीति के रूप में परमाणु भयादोहन (निवारण) का उपयोग करने के नैतिक आयामों का विश्लेषण कीजिए।
दृष्टिकोण
- परमाणु भयादोहन के अर्थ की व्याख्या कीजिए।
- नैतिक दृष्टिकोण से परमाणु भयादोहन के पक्ष और विपक्ष पर चर्चा कीजिए।
- अपने सुझाव प्रस्तावित करते हुए समाप्त कीजिए।
उत्तर
परमाणु भयादोहन एक मनोवैज्ञानिक परिघटना है जिसने शीत युद्ध की अवधि के दौरान प्रमुखता प्राप्त की। इस रणनीति के अंतर्गत आक्रामक शक्ति को विध्वंसक कार्यवाही करने से रोकना या अन्य देशों द्वारा अपने विदेशी नीति के लक्ष्यों की प्राप्ति में सैन्य बल के उपयोग के खतरे से रोकना सम्मिलित है। भयादोहन की सफलता न केवल जवाबी कार्यवाही करने की क्षमता पर बल्कि आसन्न खतरे की प्रभावशाली अपील पर भी निर्भर है। प्रतिद्वंद्वी को जवाबी कार्यवाही के खतरे को उचित और गंभीर समझना चाहिए। इस प्रकार, यह आधुनिक समय में एक शक्तिशाली आत्मरक्षा रणनीति के रूप में कार्य करता है, जिसमें कई देश स्वयं की रक्षा हेतु परमाणु हथियारों को प्राप्त करने के लिए होड कर रहे हैं। उदाहरण के लिए, उत्तर कोरिया का मिसाइल कार्यक्रम।
हालाँकि, परमाणु भयादोहन की अत्यधिक नैतिक, आर्थिक, कल्याणकारी और पर्यावरणीय कीमत चुकानी पड़ती है। इसके साथ विभिन्न नैतिक आयाम भी जुड़े हुए हैं जो इसे भयावह बनाने के साथ ही विश्वसनीयता प्रदान करते हैं।
परमाणु भयादोहन के पक्ष में नैतिक तर्क:
- उपयोगितावादी दृष्टिकोण से इसका उद्देश्य दीर्घकालिक शांति स्थापित करना है।
- यह अंतरराष्ट्रीय शांति और स्थिरता बनाए रखने का प्रयास करता है।
- वास्तविकता यह है कि परस्पर होने वाली निश्चित क्षति के भय से परमाणु शस्त्र संपन्न राष्ट्रों के मध्य युद्ध नहीं हुआ है, इसका तात्पर्य यह है कि भयादोहन ने विवादों को बढ़ने से रोका है।
इसने अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों के जीवन की रक्षा की है ,क्योंकि परमाणु भयादोहन शस्त्रों के अभाव में राष्ट्रों द्वारा पारंपरिक युद्ध का सहारा लिया जा सकता था।
परमाणु भयादोहन के विपक्ष में नैतिक तर्क:
- परमाणु भयादोहन से उत्पन्न जोखिम के कारण अन्य लोगों के जीवन को जोखिम में डालना तात्विक रूप से रूप से अनुचित है।
- अल्पकालिक और दीर्घकालिक विनाशकारी प्रभावों के कारण परमाणु हथियार का विस्फोट करना अनैतिक है।
- यद्यपि इसके पीछे परमाणु सशस्त्र संपन्न राष्ट्रों का सकारात्मक मंतव्य हैं तथापि दुर्घटनाओं और चूक होने का खतरा हमेशा बना रहता है जो परमाणु युद्ध को आरंभ कर सकता है।
- परमाणु शस्त्र संपन्न राष्ट्रों की स्वार्थपूर्ण प्रवृति, अथवा चूक/दुर्घटना या उनकी विफलता के कारण उनके शस्त्रों के आतंकवादियों के हाथों में जाने की संभावना को भी नजरंदाज नहीं किया जा सकता।
- भयादोहन के विकास और अर्जन के लिए बड़ी मात्रा में मानव, तकनीकी और वित्तीय संसाधनों के निवेश की आवश्यकता होती है। शिक्षा, स्वास्थ्य, अवसंरचना और जीवन की गुणवत्ता के संदर्भ में इनकी अवसर लागत (opportunity cost) होती हैं।
यद्यपि परमाणु भयादोहन के स्पष्ट रूप से कुछ लाभ हो सकते हैं, किन्तु वे निश्चित रूप से एक कीमत पर ही प्राप्त होते हैं। निरस्त्रीकरण को भयादोहन के नैतिक विकल्प के रूप में देखा जा सकता है क्योंकि इससे उत्पन्न सबसे निकृष्टतम संभावित परिणाम कम विनाशकारी होंगे। हाल ही में संयुक्त राष्ट्र के तत्वाधान में संपन्न परमाणु शस्त्र निषेध संधि(Treaty on the Prohibition of Nuclear weapons) इस दिशा में उठाया गया एक सही कदम है और वर्तमान परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय निरस्त्रीकरण एक दूरवर्ती लेकिन साध्य लक्ष्य के रूप में प्रतीत होता है।
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