डेटा स्थानीयकरण की अवधारणा की संक्षिप्त व्याख्या : डेटा स्थानीयकरण से संबद्ध विभिन्न चुनौतियां

प्रश्न: भारत के लिए डेटा के स्थानीयकरण के महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डेटा के स्थानीयकरण से जुड़ी विभिन्न चुनौतियों की चर्चा कीजिए।

दृष्टिकोण

  • डेटा स्थानीयकरण की अवधारणा की संक्षिप्त व्याख्या करते हुए उत्तर आरम्भ कीजिए।
  • भारत के लिए इसके महत्व पर प्रकाश डालिए।
  • डेटा स्थानीयकरण से संबद्ध विभिन्न चुनौतियों की चर्चा कीजिए।
  • उपर्युक्त बिंदुओं के आधार पर निष्कर्ष प्रदान कीजिए।

उत्तर

डेटा स्थानीयकरण से तात्पर्य किसी विशिष्ट देश (जहां डेटा का सृजन किया गया) की सीमाओं के भीतर भौतिक रूप से विद्यमान किसी भी डिवाइस में डेटा को संगृहीत करना है। भारत के परिप्रेक्ष्य में, इनमें से अधिकांश डेटा भारत के बाहर एक क्लाउड में संगृहीत किए जाते हैं। इसलिए, वर्ष 2018 में RBI द्वारा बी.एन. श्री कृष्ण समिति की अनुशंसाओं का अनुपालन करते हुए सभी प्रणाली प्रदाताओं को उनके द्वारा संचालित भुगतान प्रणाली से संबंधित संपूर्ण डेटा को केवल भारत में स्थित सिस्टम में संगृहीत करने की सलाह दी गई।

भारत के लिए डेटा स्थानीयकरण का महत्व:

  • भारत में डिजिटल डेटा वर्ष 2010 में 40,000 पेटाबाइट था जो वर्ष 2020 तक 2.3 मिलियन पेटाबाइट के स्तर तक पहुँच जाएगा। यह वैश्विक दर की तुलना में 2 गुना तीव्रता से वृद्धि कर रहा है। यदि इस समस्त डेटा को भारत अपने पास संगृहीत रखता है, तो यह वर्ष 2050 तक डेटा सेंटर बाजार में दूसरा सबसे बड़ा निवेशक और 5वां सबसे बड़ा डेटा सेंटर बाजार बन जाएगा।
  • “डेटा नया उभरता हुआ क्षेत्र है” (Data is the new oil- जिस प्रकार एक समय में तेल एक महत्वपूर्ण संसाधन था उसी प्रकार वर्तमान में डेटा एक महत्वपूर्ण संसाधन के रूप में उभर रहा है) जो स्थानीयकरण के रूप से डेटा के संग्रहण को महत्वपूर्ण आधार प्रदान करता है। विश्व में सबसे बड़े खुले इंटरनेट बाजार के क्षेत्र में, राष्ट्रीय धन सृजन इन-हाउस डेटा स्टोरेज पर निर्भर करता है।
  • ऑन-शोरिंग ग्लोबल डेटा घरेलू नवाचार में तथा डेटा स्टोरेज एवं एनालिटिक्स में घरेलू नौकरियों और कौशल के सृजन के माध्यम से भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था के दोहन में सहायक हो सकता है।
  • इसके माध्यम से वैश्विक कंपनियां भारत में अधिक जवाबदेह बन जाएंगी। भारत सरकार का विचार है कि यदि डेटा को देश की संप्रभु सीमाओं के बाहर संगृहीत किया जाता है, तो ऑनलाइन गतिविधि की निगरानी और विनियमित करने की इसकी क्षमता कम हो जाएगी क्योंकि ऐसी स्थिति में एजेंसियों को पहुंच स्थापित करने और विलम्बित जांच हेतु पारस्परिक कानूनी सहायता संधियों (MLATs) पर निर्भर रहने की आवश्यकता होगी।
  • यह डेटा उल्लंघनों और धोखाधड़ी की घटनाओं में वृद्धि के आलोक में कानून प्रवर्तन एजेंसियों की जांच और अभियोजन के लिए उपयोगकर्ता डेटा तक पहुंच स्थापित करने में सहायता प्रदान करके राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करेगा।
  • यह सीमा पार डेटा साझाकरण अधिकार क्षेत्र के संघर्ष को भी कम करेगा।

डेटा स्थानीयकरण से संबंधित चुनौतियाँ:

  • निवेश और व्यापार करने में सुगमता: अवसंरचना और समय पर निष्पादन दोनों के लिए वैश्विक अभिकर्ताओं को भारत में निवेश को बढ़ावा देने की आवश्यकता होगी।
  • संरक्षणवाद और संघर्ष: डेटा स्थानीयकरण को एक संरक्षणवादी नीति के रूप में देखा जा सकता है जिसके परिणामस्वरूप एक खंडित इंटरनेट (स्प्लिन्टरनेट) की समस्या उत्पन्न हो सकती है तथा डेटा साझाकरण से संबंधित संघर्ष में वृद्धि हो सकती है।
  • घरेलू IT उद्योग को प्रभावित करता है: एक खंडित इंटरनेट सूचना प्रवाह की लागत और गति को प्रभावित करेगा। यह भारत के युवा स्टार्टअप्स और भारत में विदेशी डेटा को प्रोसेस करने वाली कंपनियों जैसे कि टाटा कंसल्टिंग सर्विसेज और विप्रो पर दबाव उत्पन्न कर सकता है।
  • डेटा का दुरुपयोग: आलोचक न केवल राज्य द्वारा डेटा के दुरुपयोग और व्यक्तिगत डेटा की निगरानी के प्रति सतर्क हैं, बल्कि उनके द्वारा यह भी तर्क दिया जाता है कि सुरक्षा और सरकार की पहुंच स्थानीयकरण के माध्यम से प्राप्त नहीं होती है। यहां तक कि यदि डेटा को देश में ही संगृहीत किया जाता है, तब भी एन्क्रिप्शन कीज़ (encryption keys) राष्ट्रीय एजेंसियों की पहुंच से बाहर रह सकती हैं।
  • साइबर सुरक्षा को सुनिश्चित करना: भारत में व्यवसायियों को साइबर सुरक्षा हमलों का खतरा अधिक बना रहता है। जिससे नागरिकों के डेटा के समक्ष खतरा उत्पन्न हो सकता है।
  • लचीलेपन को प्रभावित करता है: क्लाउड कंप्यूटिंग सॉफ्टवेयर ने इकॉनमी ऑफ स्केल और विश्व भर में अवसंरचनात्मक संरचना का लाभ उठाया है। इस प्रकार, जब विश्व के एक भाग में खतरा उत्पन्न होता है, तो एल्गोरिथ्म डेटा को किसी अन्य स्थान अथवा यहां तक कि विभिन्न स्थानों पर स्थानांतरित किया जा सकेगा। हालाँकि, डेटा स्थानीयकरण के कारण यह लचीलापन अवरुद्ध हो सकता है।

‘डिजिटल इंडिया’ के सृजन हेतु सरकार की आकांक्षाओं के लिए डेटा स्थानीयकरण पर भारत की स्थिति को अधिक महत्व दिया जाना चाहिए तथा क्या एक बंद डेटा अर्थव्यवस्था अथवा एक खुली अर्थव्यवस्था उन लक्ष्यों को पूरा करने हेतु अधिक अनुकूल होगी, इस पर रणनीतिक रूप से विचार किए जाने की आवश्यकता है।

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