भारतीय राष्ट्रीय सुरक्षा में आसूचना की भूमिका (Role Of Intelligence In National Security In India)
आसूचना, राष्ट्रीय सुरक्षा के प्रमुख घटकों में से एक है। विशेष रूप से बढ़ते कट्टरपंथ, सीमा-पार आतंकवाद, सामूहिक विनाश के हथियारों का प्रसार और साइबर जासूसी के उभरते खतरे के कारण इसके महत्व में और भी अधिक वृद्धि हुई है। सुरक्षा के
संदर्भ में आसूचना
- आसूचना को राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित अथवा राष्ट्रीय रणनीतियों के निर्माण को प्रभावित करने वाली सूचनाओं के संग्रह,संयोजन, विश्लेषण और मूल्यांकन के रूप में परिभाषित किया जा सकता है।
- आसूचना तंत्र संभावित शत्रु राज्य समूह, व्यक्ति, या गतिविधि के संबंध में सूचनाओं के उपयोग से संबंधित तंत्र है। इसके अतिरिक्त, आसूचना सम्बन्धी गतिविधियां, अन्य राज्यों की विदेश और घरेलू नीति के विकल्पों को प्रभावित करने का प्रयास करती हैं।
निम्नलिखित कारणों से आसूचना संबंधी गतिविधियों में सम्मिलित हितधारकों द्वारा अधिक से अधिक सूचनाओं का साझा करना अत्यधिक महत्वपूर्ण हो गया है।
- हमलों से होने वाली क्षति को न्यूनतम करने हेतुः हाल ही में उरी और पठानकोट एयर बेस पर हुए हमले कुछ ऐसे
उदाहरण हैं, जो खुफिया जानकारी प्राप्त करने में हुई लापरवाही को प्रदर्शित करते हैं। - खतरे की वैश्विक परस्पर-संबद्धता: आतंकवाद वर्तमान में किसी एक देश की सीमाओं से संबंधित नहीं है, बल्कि यह एक वैश्विक चुनौती बन गया है। विश्व के किसी भी हिस्से में घटित होने वाली घटना से हमारी आंतरिक सुरक्षा प्रभावित हो। सकती है।
- खतरे का व्यापक विश्लेषण: देश की सभी आसूचना एजेंसियों को उपलब्ध सूचनाओं के माध्यम से एक साथ मिलकर समन्वित रूप से वास्तविक खतरे का विश्लेषण करना चाहिए और क्षेत्राधिकार संबंधी विवाद में उलझे बिना इन
सूचनाओं को प्रत्यक्ष रूप से कार्यवाही करने वाली एजेंसियों के साथ साझा करना चाहिए।
सम्बंधित जानकारी
भारत में आसूचना तंत्र
- भारत में आसूचना गतिविधियां विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों द्वारा संपन्न की जाती हैं जैसे : रिसर्च एंड एनालिसिस विंग्स (RAW), इंटेलिजेंस ब्यूरो (IB), नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA), ऑल इंडिया रेडियो मॉनिटरिंग सर्विस (AIRMS) इत्यादि।
- कई खुफिया एजेंसियों का नेतृत्व संबंधित मंत्रालय द्वारा किया जाता है और उन्हें एक विशिष्ट कार्य प्रदान किया किया जाता है। IB देश की बाह्य सुरक्षा संबंधी कार्यों और RAW आंतरिक सुरक्षा संबंधी कार्यों की देखरेख करता है।
- सुरक्षा खतरे के अतिरिक्त, ये एजेंसियां तीन अन्य महत्वपूर्ण कार्य करती हैं; सब्वर्शन (स्थापित हानिकारक व्यवस्था को प्रभावित कर परिवर्तन लाना), सबोटेज (सैन्य या राजनीतिक उद्देश्यों की प्राप्ति के लिए स्थापित हानिकारक व्यवस्था का नाश करना) और एस्पोनिएज (राजनीतिक सूचना की प्राप्ति के लिए जासूसी) संबंधी गतिविधियाँ।
सरकार द्वारा की गयी पहल
- नेटग्रिड: इसमें संभावित सुरक्षा खतरे से निपटने हेतु विभिन्न सुरक्षा एजेंसियों से जुड़े इंटेलिजेंस डेटा बेस शामिल हैं।
- राष्ट्रीय आतंकवाद प्रतिरोधी केंद्र (NCTC) आतंकवाद रोकथाम संबंधी योजनाओं को तैयार करता है और सभी मौजूदा जांच और आसूचना एजेंसियों के मध्य समन्वय स्थापित करता है।
- राष्ट्रीय साइबर समन्वय केंद्र (NCCC) जो राष्ट्रीय सुरक्षा से संबंधित मुद्दों के लिए सभी संभावित ऑनलाइन खतरों की जाँच | करेगा और आसूचना एजेंसियों के साथ समन्वय स्थापित करेगा।
- आप्रवासन, वीजा और विदेशी यात्री पंजीकरण और ट्रैकिंग (MFRT): सभी विदेशी यात्राओं के आंकड़ों को बनाए रखने के साथ देश में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक प्रवेश की सुविधा प्रदान करना।
चुनौतियां
- औपनिवेशिक बोझः भारतीय आसूचना प्रणाली का विकास भारतीय पुलिस व्यवस्था के विस्तार के रूप में हुआ है किन्तु यह नौकरशाही प्रक्रियात्मक बाधाओं से ग्रसित है जो इसके उद्देश्य की प्राप्ति में प्रमुख बाधक है।
- समन्वयः विभिन्न आसूचना एजेंसियों के मध्य अनुवर्ती कार्यवाही और समन्वय का अभाव हैं उदाहरण स्वरूप कारगिल समीक्षा समिति द्वारा IB और RAW के मध्य विशेष रूप से सीमा पर समन्वय की कमी का उल्लेख किया गया है जबकि विशेष रूप से दोनों की क्षमताओं को रणनीतिक रूप से सुरक्षा दृष्टिकोण हेतु विशेष रूप से एकीकृत किया गया था।
- अप्रासंगिक प्रशिक्षण: 2011 में हुए मुंबई हमले की जाँच हेतु गठित समिति द्वारा निर्दिष्ट किया गया कि विश्लेषणात्मक दृष्टिकोण के अभाव तथा अप्रासंगिक प्रशिक्षण (आउट डेटेड ट्रेनिंग) के कारण विभिन्न खुफिया एजेंसियों की ओर से गंभीर काउंटर इंटेलिजेंस गलतियां हुई थीं।
- वैधानिक प्रावधानों का अभावः इस सम्बन्ध में विधायी प्रावधानों के अभाव के कारण गंभीर स्थिति उत्पन्न हो सकती है। क्योंकि सभी खुफिया गतिविधियाँ, कार्यकारी निर्देशों के अंतर्गत संचालित की जाती हैं। कुछ गतिविधियों में लक्षित देश के स्थानीय कानूनों का उल्लंघन भी शामिल हो सकता है।
आगे की राह:
- वैधानिक चार्टरः पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार द्वारा दिए गए सुझावों के अनुसार ख़ुफ़िया एजेंसियों हेतु कर्तव्यों के निर्वेहन संबंधी चार्टर का निर्माण किया जाना चाहिए। यह निष्पक्षता के साथ सेवा प्रदायगी में सुधार करेगा और उत्तरदायित्व के विभिन्न स्तरों अर्थात- कार्यकारी, वित्तीय और विधायी इत्यादि के लिए विधिक आधार प्रदान करेगा।
- एजेंसियों के मध्य समन्वयः अतिव्यापन, कार्यों के दोहराव एवं एक ही क्षेत्र में अलग-अलग एजेंसियों के क्षेत्राधिकार में टकराव की समस्या के निवारण और सुरक्षा इनपुट के बेहतर उपयोग को सुनिश्चित करने हेतु एक राष्ट्रीय आसूचना समन्वयक (National Intelligence Coordinator) नियुक्त किया जाना चाहिए। कुशल इनपुट साझाकरण हेतु एक मल्टी एजेंसी सेंटर को पुनः स्थापित किया जाना चाहिए।
- एकीकृत आसूचना तंत्रः आसूचना तंत्र के कई गैर-पारंपरिक क्षेत्रों जिनमें वित्तीय लेनदेन, तकनीकी लेनदेन, बड़ी कंपनी के । संचालन में धोखाधड़ी, संगठित अपराध इत्यादि का संज्ञान लेने की आवश्यकता होती है। इसके लिए आसूचना संग्रहण हेतु । एक उन्नत प्रौद्योगिकी युक्त तंत्र की आवश्यकता है।
- कार्यात्मक सुधार : सैन्य और डेटा विज्ञान संबंधी विशेषज्ञों को शामिल करने के लिए प्रतिनियुक्ति (डेप्युटेशन) स्लॉट का उपयोग किया जाना चाहिए। इसके साथ ही विशिष्ट आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए कार्यों की आउटसोर्सिंग की जानी चाहिए, जैसे इथिकल हैकर्स इत्यादि।
- प्रौद्योगिकी उन्नयन: मौजूदा सुरक्षा प्रणाली प्रतिमान में साइबर स्पेस प्रौद्योगिकी के संदर्भ में संरचनात्मक सुधार किए जाने । की आवश्यकता है। उदाहरणार्थ – एन्क्रिप्शन/डिक्रिप्शन, क्रिप्टोग्राफी, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ओपन सोर्स इंटेलिजेंस । इत्यादि।
