अंतर्राष्ट्रीय संगठित अपराध (Trans-National Organised Crime)

संगठित अपराध (OC) अत्यधिक जटिल,विविधतापूर्ण एवं व्यापक गतिविधि है, जिसके द्वारा गैरकानूनी तरीके से और बल, धोखाधड़ी तथा भ्रष्टाचार का अवैध प्रयोग करके वैश्विक अर्थव्यवस्था से प्रत्येक वर्ष कई अरब डॉलर की निकासी होती है। संगठित अपराध (OC) की शक्ति का प्रमुख स्रोत अवैध गतिविधियों के माध्यम से प्राप्त धन है।

इन गतिविधियों में नशीली दवाओं की तस्करी, मानव तस्करी, मनी लॉन्डरिंग, आतंकवाद, हथियारों का अवैध व्यापार एवं सामाजिक उत्पीड़न के अन्य रूप जैसे अवैध वसूली आदि सम्मिलित हैं। इस धन एवं शक्ति का अत्यधिक प्रयोग घुसपैठ तथा हमारी लोकतांत्रिक प्रक्रिया को भ्रष्ट करने के लिए किया जाता है।
संगठित आपराधिक गतिविधियां देश की आर्थिक प्रणाली की स्थिरता को कमजोर करती हैं, जिससे निर्दोष निवेशकों तथा प्रतिस्पर्धी संगठनों को हानि होती है। ये बाजारों की मुक्त प्रतिस्पर्धा में हस्तक्षेप करती हैं। ये अंतरराज्यीय तथा विदेशी व्यापार वाणिज्य को गंभीरता से प्रभावित करती हैं, घरेलू सुरक्षा के समक्ष खतरा उत्पन्न करती हैं तथा राष्ट्र एवं उसके नागरिकों के सामान्य कल्याण को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती हैं।

संगठित अपराध के लक्षण

किसी समूह को संगठित अपराध का एक निकाय माना जाता है, यदि

  • आदेशों (कमान) की एक श्रेणीबद्ध संरचना प्रणाली मौजूद हो;
  • आंतरिक दण्ड प्रणाली के तौर पर शारीरिक हिंसा का प्रयोग किया जाता है;
  • समूह एक से अधिक प्रकार के अपराधों को अंजाम देने की विशिष्टता रखता हो;
  •  अवैध रूप से प्राप्त धन को वैध आर्थिक गतिविधियों में निवेश किया जाता हो;
  •  सरकारी अधिकारियों एवं वैध व्यवसायियों को घूस या धमका कर अपना काम कराते हों।

संगठित अपराधों के प्रकार

ड्रग दुर्व्यसन एवं ड्रग तस्करी

भारत भौगोलिक रूप से ‘गोल्डन ट्रायंगल, तथा ‘गोल्डन क्रेसन्ट’ के देशों के मध्य स्थित है और इन क्षेत्रों में उत्पादित नारकोटिक ड्रग के लिए एक पारगमन बिंदु है।

 तस्करी

इसके तहत गुप्त परिचालन के माध्यम से बिना किसी रिकॉर्ड के व्यापार किया जाता है, जो एक प्रमुख आर्थिक अपराध है। तस्करी की वस्तुओं एवं इसकी मात्रा का स्वरुप मौजूदा राजकोषीय नीतियों द्वारा निर्धारित होता है। भारत की लगभग 7,500 किलोमीटर की विशाल तट रेखा है तथा इसकी नेपाल एवं भूटान के साथ खुली सीमाएं, बड़े पैमाने पर प्रतिबंधित और अन्य उपभोग की वस्तुओं की तस्करी के लिए अनुकूल हैं।

अवैध शस्त्र व्यापार

हल्के शस्त्रों का प्रसार एक वैश्विक घटना है। इसका मानव जीवन एवं सम्पूर्ण क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास पर गंभीर प्रभाव पड़ा है। मुंबई में,अवैध शस्त्रों का व्यापार एक खतरनाक दर से बढ़ रहा है।

धन शोधन (मनी लॉन्डरिंग) व्यापार

ड्रग संबंधी अपराधों का प्रचलन विश्वभर में मनी लॉन्डरिंग का एक महत्वपूर्ण स्रोत है। यह लक्ष्य सामान्यतः ‘प्लेसमेंट’, ‘लेयरिंग’ एवं ‘इंटीग्रेशन’ के जटिल चरणों के द्वारा प्राप्त किया जाता है ताकि वैध अर्थव्यवस्था में इस प्रकार से एकीकृत धन को अपराधियों द्वारा पहचान के डर के बिना प्रयोग किया जा सके।

कॉन्ट्रैक्ट किलिंग

इसके तहत पेशेवर गिरोह द्वारा धन के बदले हत्याओं को अंजाम दिया जाता है। बॉम्बे के गिरोहों को कॉन्ट्रैक्ट किलिंग में विशेषज्ञता हासिल है। इनके द्वारा हत्या करने के बदले में ली जाने वाली राशि काफी बड़ी होती है तथा यह राशि टारगेट की सामाजिक आर्थिक स्थिति के अनुसार अलग-अलग होती है।

फिरौती के लिए अपहरण

यह शहरी क्षेत्रोंमें एक अत्यधिक संगठित अपराध है। कई स्थानीय गिरोहों के साथ-साथ अंतरराज्यीय गिरोह भी इसमें सम्मिलित होते हैं, क्योंकि इस कृत्य में श्रम एवं जोखिम की तुलना में कहीं अधिक वित्तीय प्रतिफल प्राप्त होता है। आम तौर पर, यदि अपहरणकर्ताओं की मांग पूरी कर दी जाती है तो उनके द्वारा अपहरित व्यक्ति को कोई चोट नहीं पहुंचाई जाती है।

मानव तस्करी

इसे धमकी या बल प्रयोग या उत्पीड़न, अपहरण, धोखाधड़ी एवं छल आदि के माध्यम से, शोषण के उद्देश्य से व्यक्तियों की भर्ती, परिवहन, स्थानांतरण, उन्हें आश्रय में रखने या उनकी प्राप्ति के रूप में परिभाषित किया जाता है। मानव तस्करी भारत के संगठित अपराध के एक बड़े रैकेट का प्रतिनिधित्व करती है। देश में मानव तस्करी के लिए प्रचलित रैकेट की दो प्रमुख श्रेणियां हैं- बलात् यौन कार्य (sex work) के लिए तस्करी एवं बलात् श्रम के लिए तस्करी।

सरकार द्वारा उठाए गए कदम 

  • मानव तस्करी से निपटने हेतु विभिन्न निर्णयों को लागू करने एवं राज्य सरकारों द्वारा की गई कार्यवाहियों पर
    अनुवर्ती कार्रवाई के लिए गृह मंत्रालय (MHA) द्वारा एंटी-ट्रैफिकिंग नोडल सेल बनाया गया है।
  • महिला एवं बाल विकास मंत्रालय द्वारा उज्ज्वला योजना के माध्यम से महिलाओं तथा बच्चों के लिए (विशेष रूप से
    यौन दुर्व्यापार की शिकार महिलाओ के लिए) गैर सरकारी संगठन संचालित आश्रय और पुनर्वास सेवाओं को, एवं
    कठिन परिस्थितियों में फँसी महिलाओं के लिए स्वाधार कार्यक्रम को वित्तपोषित किया जाता है।
  •  सरकार ने मानव तस्करी को रोकने के लिए बांग्लादेश, नेपाल, बहरीन आदि के साथ समझौते पर हस्ताक्षर भी
    किए हैं।
  • हाल ही में सरकार के द्वारा लोकसभा में “मानव तस्करी (रोकथाम, संरक्षण और पुनर्वास) विधेयक, 2018” प्रस्तुत किया गया है।

संगठित अपराधों एवं आतंकवाद के मध्य संबंध

  • भारत में संगठित अपराध से प्राप्त धन, तीव्रता से वित्तीय आतंकवादी संक्रियाओं से जुड़ रहा है, जो देश को विश्व के
    आतंकवाद से सर्वाधिक ग्रसित राष्ट्रों में शामिल करता है।
  • कुछ शक्तिशाली संगठित एवं अपराधी समूह स्वेच्छा से भारत (मुंबई) एवं पाकिस्तान (कराची) के मुख्य बंदरगाहों में आतंकवादियों के साथ कार्य करते हैं। इन बंदरगाहों पर लोगों, हथियारों तथा विस्फोटकों के अवैध स्थानांतरण की सुविधा प्रदान करने वाले आपराधिक संगठनों का  रूप से प्रभुत्व होता है।
  • आतंकवादियों और संगठित अपराधियों की गतिविधियां प्रायः एक-दूसरे को सुदृढ़ता प्रदान करती हैं।  आतंकवादी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से  संगठित अपराध गतिविधियों, जैसे- मानव तस्करी, स्मगलिंग, बलपूर्वक वसूली में संलग्न होते हैं जो राज्य सुरक्षा, स्थिरता एवं सामाजिक तथा आर्थिक विकास को कमजोर करने का कार्य करती हैं, इसके परिणामस्वरूप संगठित आपराधिक समूहों के विकास के लिए सहायक परिस्थितियों का निर्माण होता है।
  • काले धन के प्रसार एवं आतंकवादी घटनाओं के लिए धन उपलब्ध कराने के लिए विश्व भर में हवाला नेटवर्क का व्यापक रूप से उपयोग किया जाता है।
  • दूसरी ओर, संगठित अपराध समूह अपने उद्देश्यों की पूर्ति हेतु हिंसा के रणनीतिक प्रयोग सहित अन्य आतंकवादी युक्तियों का प्रयोग कर सकते हैं।

गंभीर एवं संगठित अपराध तथा आतंकवाद के मध्य संबंधों के दोहरे खतरे हैं:

  • प्रथम, संगठित अपराध (OC) के नेटवर्क का इस्तेमाल आग्नेयास्त्र या जाली दस्तावेज हासिल करने, वस्तुओं एवं
    लोगों के स्थानांतरण तथा आतंकवादी समूहों को हमलों के प्रयुक्त किए जाने वाले घातक हथियारों की डिलीवरी के | लिए किया जा सकता है।
  •  द्वितीय, गंभीर एवं संगठित अपराध में आतंकवादियों की संलग्नता उन्हें आतंकवादी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए धन प्राप्त करने का अवसर प्रदान कर सकती है।

संगठित अपराध का सामना करने में विद्यमान समस्याएं

  • अपर्याप्त विधिक संरचना: भारत में संगठित अपराध को नियंत्रित करने या रोकने के लिए कोई विशेष कानून नहीं है। । विद्यमान कानून इसके लिए अपर्याप्त हैं, क्योंकि ये कानून व्यक्तियों को लक्षित करते हैं न कि आपराधिक समूह या आपराधिक उद्यमों को।
  • साक्ष्य प्राप्त करने में कठिनाइयां : जैसा कि संगठित आपराधिक समूह पदानुक्रमित रूप से संरचित होते है, उच्च सोपानिक नेतृत्व कानून प्रवर्तन से बचा रहता है। साथ ही, हिंसा के अपराधों में शायद ही कोई दस्तावेज संबंधी साक्ष्य उपलब्ध हो पाता
  •  मुकदमों की धीमी गति एवं दोषसिद्धि की निम्न दरः इस प्रकार, आपराधिक न्याय प्रणाली की प्रभावकारिता में लोगों का विश्वास कम हो रहा है तथा अपराध नियंत्रण के प्रयासों के प्रति लोगों का रुख रूखा, उदासीन और असहयोगी हो गया है।
  • संसाधन तथा प्रशिक्षण की कमी: पुलिस व्यवस्था राज्य सूची का विषय है। अधिकांश राज्य संसाधनों की कमी का सामना कर | रहे हैं तथा आपराधिक न्याय प्रणाली एजेंसियों के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराने में सक्षम नहीं हैं। इसके अतिरिक्त, संगठित अपराध की जांच के लिए शायद ही कोई प्रशिक्षण सुविधाएं विद्यमान हैं।
  • समन्वय का अभाव: राज्य पुलिस बल, राज्य के भीतर संगठित आपराधिक गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी एकत्रित | करते हैं एवं सामान्य तौर पर इसे अन्य राज्यों या केंद्रीय एजेंसियों के साथ साझा नहीं करते हैं।
  • दोहरी आपराधिकता (Dual Criminality): कुछ अपराधों, विशेष रूप से ड्रग तस्करी, के मामले में विश्व के किसी एक भाग में इसकी योजना बनाई जाती है एवं दूसरे भाग में कार्यान्वित की जाती है। भिन्न भिन्न देशों में अलग-अलग कानूनी संरचनाएं होती हैं और एक देश से दूसरे देश में अपराधियों का प्रत्यर्पण केवल तभी संभव होता है जब दोहरी आपराधिकता का सिद्धांत लागू हो।
  •  आपराधियों, राजनीतिज्ञों एवं नौकरशाही के मध्य गठजोड़: इसके कारण, जांच तथा अभियोग चलाने वाली एजेंसियों को इनसे प्रभावी ढंग से निपटने में काफी समस्याएं आती हैं।

आगे की राह

  • आपराधिक कानूनों का सुदृढीकरण: चूँकि वर्तमान में भारत में संगठित अपराध को नियंत्रित करने या रोकने के लिए एक । विशेष अधिनियम नहीं है, अतः तत्काल विधायी हस्तक्षेप की आवश्यकता है।
  • समन्वय में सुधार तथा विशिष्ट इकाइयों की स्थापना करना: विभिन्न राज्यों के पुलिस बलों और केंद्रीय जांच एजेंसियों के मध्य समन्वय के लिए वर्तमान प्रवर्तन एजेंसियों के कार्यक्षेत्र से बाहर एक राष्ट्रीय स्तर के समन्वय निकाय की स्थापना की आवश्यकता है।
  • भगोड़े आपराधियों के शीघ्र प्रत्यर्पण या निर्वासन के लिए अंतर्राष्ट्रीय सहयोग में वृद्धि; अंतर्राष्ट्रीय अपराधों की प्रभावी जांच तथा अभियोजन के लिए पारस्परिक विधिक सहायता हेतु समझौता किया जाए। |
  •  राजनीतिक प्रतिबद्धता: विधायी कार्यवाहियों, आपराधिक न्याय प्रणाली को सुदृढ़ बनाने तथा संगठित अपराध के विरुद्ध मजबूत जनमत के निर्माण के लिए राजनीतिक प्रतिबद्धता।
  •  सार्वजनिक जागरूकता: सामान्य लोगों को इसकी रोकथाम एवं जांच में शामिल करना तथा मीडिया के माध्यम से और संगठित अपराध में सम्मिलित लोगों का सामाजिक बहिष्कार करके इसके विरुद्ध जनमत तैयार करना।
  •  मास मीडिया की भूमिका: मास मीडिया (जिसमें प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया दोनों सम्मिलित हैं) संगठित अपराध को उजागर करने तथा इसके विरुद्ध जनमत निर्माण में सहायता कर एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

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