1.पद ‘राष्ट्रीय आय’ निरूपित करता है –
(a) बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, मूल्य ह्रास घटाकर।
(b) बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, मूल्य ह्रास घटाकर, विदेश से प्राप्त निवल कारक आय जोड़कर।
(c) बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, मूल्य ह्रास और अप्रत्यक्ष करों को घटाकर, सब्सिडी जोड़कर।
(d) बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, विदेश से प्राप्त निवल कारक आय घटाकर ।
[I. A.S. (Pre) 2001]
उत्तर- (c) बाजार कीमतों पर सकल राष्ट्रीय उत्पाद, मूल्य ह्रास और अप्रत्यक्ष करों को घटाकर, सब्सिडी जोड़कर।
- साधन लागत पर निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNPFC) को राष्ट्रीय आय (NI) कहा जाता है।
राष्ट्रीय उत्पाद के विभिन्न रूपों के बीच संबंध

- निवल अप्रत्यक्ष कर (NIT) अप्रत्यक्ष कर – Subsidy
GNP = सकल राष्ट्रीय उत्पाद, NNP = निवल राष्ट्रीय उत्पाद, GDP = सकल घरेलू उत्पाद, NDP = निवल घरेलू उत्पाद, MP= बाजार कीमत पर, FC= साधन लागत पर, D= मूल्यह्रास, NIT निवल अप्रत्यक्ष कर, NFI = विदेशों से प्राप्त निवल कारक आय।
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2. निम्नलिखित में से कौन-सी एक सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) गणना करने की विधि नहीं
(a) उत्पादन विधि
(b) हासमान लागत विधि
(c) आय विधि
(d) व्यय विधि
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
[66th B.P.S.C. Re-Exam. 2020]
उत्तर-(b) हासमान लागत विधि
- भारत में सकल घरेलू उत्पाद (GDP) गणना करने की तीन विधियां
अपनाई जाती है।
उत्पादन विधि
आय विधि
व्यय विधि
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3. निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP) एवं सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) हैं-
(a) राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य मापन
(b) खंड लागत पर राष्ट्रीय उपज के मूल्य का मूल्यांकन
(c) निर्यात का मूल्य मापन
(d) भिन्न-भिन्न हैं
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2010]
उत्तर- (a) & (d) राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य मापन, भिन्न-भिन्न हैं
- निवल राष्ट्रीय उत्पाद (NNP-Net National Product) और सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP-Gross National Product) के द्वारा राष्ट्रीय उत्पाद का मूल्य मापन किया जाता है तथापि ये दोनों भिन्न-भिन्न हैं।
- GNP किसी देश के नागरिकों द्वारा (देश के भीतर या बाहर) एक वर्ष में उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल मूल्य होता है, जिसमें से पूंजी हास (Depreciation) को घटाने से NNP प्राप्त होता है।
- अर्थात NNP = GNP – मूल्य हास।
- अतः विकल्प (a) और (d) दोनों को सही माना जा सकता है।
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4. भारत में राष्ट्रीय आय की गणना में एक समस्या है
(a) अल्प-रोजगार
(b) मुद्रास्फीति
(c) बचत का निम्न स्तर
(d) असंगठित क्षेत्र
(e) उपर्युक्त में से कोई नहीं/उपर्युक्त में से एक से अधिक
[63rd B.P.S.C. (Pre) 2017]
उत्तर-(d) असंगठित क्षेत्र
- असंगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की आय की गणना करने का कोई भी उपकरण, तरीका हमारे पास नहीं है।
- अतः भारत में राष्ट्रीय आय की गणना में असंगठित क्षेत्र एक समस्या है।
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5. निम्नलिखित कथनों को पढ़िए तथा सही विकल्प को चुनिए:
कथन I : शुद्ध घरेलू उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद + मूल्याह्रास
कथन II : प्रति व्यक्ति आय = शुद्ध घरेलू उत्पाद/राष्ट्र की कुल जनसंख्या
कथन III : विश्व की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करने हेतु शुद्ध घरेलू उत्पाद सकल घरेलू उत्पाद की अपेक्षा बेहतर मानक है
(a) कथन I, II एवं III सभी सही हैं।
(b) केवल कथन I एवं II सही हैं।
(c) केवल कथन II एवं III सही हैं।
(d) उपर्युक्त में से कोई भी सही नहीं है।
[Chhattisgarh P.C.S. (Pre) Exam. 2020]
उत्तर-(d) उपर्युक्त में से कोई भी सही नहीं है।
- शुद्ध घरेलू उत्पाद का अभिप्राय एक वर्ष में एक देश की घरेलू सीमाओं में निवासियों द्वारा उत्पादित अंतिम वस्तुओं एवं सेवाओं के मौद्रिक मूल्य से है, जिसमें से स्थिर पूंजी के उपभोग को घटा दिया जाता है।
- शुद्ध घरेलू उत्पाद = सकल घरेलू उत्पाद- मूल्याहास प्रति व्यक्ति आय एक राष्ट्र या भौगोलिक क्षेत्र में रहने वाले व्यक्तियों की औसत आय होती है।
- प्रति व्यक्ति आय का उपयोग किसी क्षेत्र के लिए औसत प्रति व्यक्ति आय निर्धारित करने और आबादी के जीवन स्तर और गुणवत्ता के मूल्यांकन के लिए किया जा सकता है।
- किसी राष्ट्र के लिए प्रति व्यक्ति आय की गणना देश की राष्ट्रीय आय को उसकी जनसंख्या से विभाजित करके की जाती है।
- किसी देश की सीमा में एक निर्धारित समय के भीतर उत्पादित सभी वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य को सकल घरेलू उत्पाद (GDP) कहते हैं।
- यह किसी देश के घरेलू उत्पाद का व्यापक मापक होता है और इससे किसी देश की अर्थव्यवस्था की सेहत पता चलती है।
- परंतु विश्व की अर्थव्यवस्थाओं की तुलना करने हेतु शुद्ध घरेलू उत्पाद सकल घरेलू उत्पाद की अपेक्षा बेहतर मानक है क्योंकि इसमें से घिसावट मूल्य घटा दिया जाता है, जिससे वास्तविक अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य पता चलता है।
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6. किसी दी गई अवधि के लिए एक देश की राष्ट्रीय आय-
(a) नागरिकों द्वारा उत्पादित वस्तुओं और सेवाओं के कुल मूल्य के बराबर होगी
(b) कुल उपभोग और निवेश व्यय के योग के बराबर होगी
(c) सभी व्यक्तियों की वैयक्तिक आय के योग के बराबर होगी
(d) उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य के बराबर होगी
[I.A.S. (Pre) 2013]
उत्तर-(d) उत्पादित अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य के बराबर होगी
- राष्ट्रीय आय से आशय किसी अर्थव्यवस्था में एक विशेष समय अवधि (साधारणतया एक वर्ष) में देश के नागरिकों द्वारा उत्पादित समस्त अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के कुल मौद्रिक मूल्य से है।
- भारत में राष्ट्रीय आय की गणना केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम क्रियान्वयन मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) [पूर्व में केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (CSO)] द्वारा की जाती है।
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7. एक खुली हुई अर्थव्यवस्था में, अर्थव्यवस्था की राष्ट्रीय आय (Y) है- (C, I, G, X, M का क्रमशः अर्थ है उपभोग, निवेश, सरकारी खर्च, कुल निर्यात और कुल आयात)
(a) Y=C+I+G+X
(b) Y=C+I+G-X+M
(c) Y=C+I+G+(X-M)
(d) Y=G+I-G+X-M
[I. A.S. (Pre) 2000]
उत्तर-(c) Y=C+I+G+(X-M)
- Y=C+I+G+(X-M)
जहां Y = राष्ट्रीय आय
C = उपभोग व्यय
I = निवेश व्यय
G = सरकारी खर्च, तथा X-M = निर्यात और आयात का अंतर
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8. निम्नलिखित में से कौन-सा समायोजित सकल आय (ए.जी.आर.) की परिभाषा के अंतर्गत आता/आते है/हैं?
1. ब्याज आय
2. लाभांश (डिविडेंड)
3. विदेशी मुद्रा लाभ (फोरेक्स गेन)।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए।
कूट :
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) सभी 1, 2 और 3
(d) केवल 1 और 3
[U.P.R.O./A.R.O. (Mains) 2016]
उत्तर- (c) सभी 1, 2 और 3
- दूरसंचार ऑपरेटरों को केंद्र को ‘राजस्व हिस्सेदारी’ के रूप में लाइसेंस शुल्क और स्पेक्ट्रम शुल्क का भुगतान करना होता है।
- इस राजस्व हिस्सेदारी की गणना के लिए इस्तेमाल की जाने वाली राजस्व राशि को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (AGR) के रूप में जाना जाता है।
- DOT के अनुसार, गणना में एक टेलीकॉम कंपनी द्वारा अर्जित सभी राजस्व शामिल होना चाहिए, जिसमें गैर-दूरसंचार स्रोत जैसे जमा ब्याज और परिसंपत्तियों की बिक्री शामिल है।
- हालांकि, कंपनियों का मानना है कि AGR में केवल दूरसंचार सेवाओं से उत्पन्न राजस्व शामिल होना चाहिए और गैर-दूरसंचार राजस्व को इससे बाहर रखा जाना चाहिए।
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9. यदि एक दी हुई समयावधि में कीमतें तथा मौद्रिक आय दोनों दोगुनी हो जाएं, तो वास्तविक आय-
(a) दोगुनी हो जाएगी।
(b) आधी रह जाएगी।
(c) अपरिवर्तित रहेगी।
(d) कीमतें वास्तविक आय को प्रभावित नहीं करती हैं।
[U.P.P.C.S. (Mains) 2004]
उत्तर-(c) अपरिवर्तित रहेगी।
- एक दी हुई समयावधि में कीमतें और मौद्रिक आय दोनों दोगुनी होने पर वास्तविक आय अपरिवर्तित रहेगी, क्योंकि बढ़ी हुई कीमतें बढ़ी हुई मौद्रिक आय को प्रति संतुलित कर देंगी।
- इससे वास्तविक आय पर कोई प्रभाव नहीं पड़ेगा।
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10. किस सैद्धांतिक रूप से यदि आर्थिक विकास की कल्पना की जाती है, तो इनमें से किस एक को साधारणतः ध्यान में नहीं रखा जाता है?
(a) सकल घरेलू उत्पाद में वृद्धि
(b) विश्व बैंक से वित्तीय सहायता में वृद्धि
(c) सकल राष्ट्रीय उत्पाद में वृद्धि
(d) प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद में वृद्धि
[Jharkhand P.C.S. (Pre) 2013]
उत्तर-(b) विश्व बैंक से वित्तीय सहायता में वृद्धि
- आर्थिक विकास में सकल घरेलू उत्पाद (GDP), सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) व प्रति व्यक्ति सकल राष्ट्रीय उत्पाद में वृद्धि का ध्यान रखा जाता है।
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11. भारतीय अर्थव्यवस्था के बारे में अमर्त्य सेन के सुझावों से संबंधित निम्नांकित कथनों पर विचार कीजिए।
1. इसे वस्तु-उन्मुख होना चाहिए
2. इसे जन-उन्मुख होना चाहिए
3. सबसे अधिक निर्धन व्यक्ति की आर्थिक सुरक्षा होनी चाहिए
4. विश्व अर्थव्यवस्था में इनके एकीकरण के साथ राष्ट्रीय बचाव होना चाहिए।
इनमें से-
(a) 1,2 तथा 3 सही हैं
(b) 2,3 तथा 4 सही हैं
(c) 1,3 तथा 4 सही हैं
(d) 1,2 तथा 4 सही हैं
[U.P.P.C.S. (Pre) 1999]
उत्तर-(b) 2,3 तथा 4 सही हैं
- अमर्त्य सेन कल्याणकारी अर्थशास्त्र से संबंधित हैं।
- उनके अनुसार, आर्थिक विकास का मुख्य लक्ष्य मानवीय विकास है।
- अपने इसी दृष्टिकोण के कारण अमर्त्य सेन ने भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में प्रश्नगत 2,3 एवं 4 कथनों की सिफारिश की थी।
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12. यह विचार कि “भविष्य में भारतीय नियोजन में वस्तुओं से अधिक ध्यान व्यक्तियों पर देना चाहिए” व्यक्त किया गया था-
(a) अमर्त्य सेन द्वारा
(b) यशवंत सिन्हा द्वारा
(c) अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा
(d) मनमोहन सिंह द्वारा
[U.P. Lower (Pre) (Spl.) 2004]
उत्तर- (a) अमर्त्य सेन द्वारा
- यह विचार अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन द्वारा व्यक्त किया गया था।
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13. हिंदू वृद्धि दर किस वृद्धि दर से संबंधित है?
(a) प्रति व्यक्ति आय
(b) राष्ट्रीय आय
(c) जनसंख्या
(d) साक्षरता
[U.P.P.C.S. (Pre) 1996, 2006, U.P.P.C.S. (Mains) 2004]
उत्तर-(b) राष्ट्रीय आय
- प्रो. राजकृष्ण ने वर्ष 1981 में अमेरिकन इकोनॉमिक एसोसिएशन में बोलते हुए हिंदू वृद्धि दर का सर्वप्रथम प्रयोग किया था।
- उनके अनुसार, हिंदू परंपरा जो विकास के अनुकूल नहीं है अथवा जिसमें विकास को प्रश्रय नहीं दिया जाता है, के कारण ही भारतीय अर्थव्यवस्था में राष्ट्रीय आय/GDP की वृद्धि दर 3.5% के आस-पास बनी हुई है।
- स्पष्ट है कि प्रो. राजकृष्ण द्वारा प्रयुक्त हिंदू वृद्धि दर राष्ट्रीय आय / GDP से संबंधित है।
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14. आर्थिक विकास सामान्यतया युग्मित होता है-
(a) अवस्फीति के साथ
(b) स्फीति के साथ
(c) स्टैगफ्लेशन के साथ
(d) अतिस्फीति के साथ
[I.A.S (Pre) 2011]
उत्तर-(b) स्फीति के साथ
- आर्थिक विकास के साथ-साथ सामान्यतः वस्तुओं की मांग बढ़ती है और आय में भी वृद्धि होती है।
- इसी कारण आर्थिक विकास सामान्यतया स्फीति (Inflation) के साथ युग्मित होता जाता है।
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15. निम्न कारण से GNP (सकल राष्ट्रीय उत्पाद) में श्रम की भागीदारी कम है-
(a) मजदूरी की तुलना में कीमतें कम हैं।
(b) कीमत की तुलना में लाभ कम है।
(c) लाभ की तुलना में कीमतें कम हैं।
(d) कीमतों की तुलना में मजदूरी कम है।
[U.P.P.C.S. (Mains) 2008]
उत्तर-(d) कीमतों की तुलना में मजदूरी कम है।
- सकल राष्ट्रीय उत्पाद में श्रम की भागीदारी कम होने का कारण, कीमतों की तुलना में मजदूरी का कम होना है।
- कीमत वृद्धि भारतीय अर्थव्यवस्था का प्रमुख लक्षण है, जिस कारण मजदूरी में यदि वृद्धि होती भी है, तो भी परिणामी लाभ कम होता है।
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16. सूची-1 को सूची-II से सुमेलित कीजिए तथा सूचियों के नीचे दिए गए कूट का प्रयोग करके सही उत्तर का चयन कीजिए :
| सूची-I |
सूची-II |
| A. आर्थिक विकास |
1. सकल घरेलू उत्पाद |
| B. आर्थिक वृद्धि |
2. पर्यावरण |
| C. संपोषित विकास |
3. स्वास्थ्य |
| D. जीवन की गुणवत्ता |
4. संरचनात्मक परिवर्तन |
कूट :
A B C D
(a) 1,2,3,4
(b) 4,2,3,1
(c) 3,4,1,2
(d) 4,1,2,3
[U.P. U.D.A./L.D.A. (Spl.) (Mains) 2010]
उत्तर-(d) 4,1,2,3
- सूची I का सूची II से सही सुमेलन इस प्रकार है-
-
| सूची-I |
सूची-II |
| A. आर्थिक विकास |
1. संरचनात्मक परिवर्तन |
| B. आर्थिक वृद्धि |
2. सकल घरेलू उत्पाद |
| C. संपोषित विकास |
3. पर्यावरण |
| D. जीवन की गुणवत्ता |
4. स्वास्थ्य |
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17. भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए :
1. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में विगत एक दशक में चार गुना वृद्धि हुई है।
2. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में सार्वजनिक क्षेत्र के प्रतिशत अंश में विगत एक दशक में कमी आई है।
उपर्युक्त में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
[I.A.S. (Pre) 2010]
उत्तर-(b) केवल 2
- कथन (1) असत्य है, क्योंकि विगत एक दशक में भारत के GDP में चार गुना वृद्धि नहीं हुई है।
- दूसरी ओर कथन (2) सत्य है, क्योंकि विगत दशक में जीडीपी में सार्वजनिक क्षेत्र का हिस्सा कम हुआ है, जबकि निजी क्षेत्र का बढ़ा है।
- अतः अभीष्ट उत्तर विकल्प (b) होगा।
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18. भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए-
| (पद) |
(सर्वोपयुक्त वर्णन) |
| 1. मेल्ट डाउन |
स्टॉक कीमतों की गिरावट |
| 2. मंदी (रिसेसन) |
संवृद्धि दर की गिरावट |
| 3. स्लो-डाउन |
सकल घरेलू उत्पाद की गिरावट |
उपर्युक्त में से कौन-सा / से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2 और 3
(c) केवल 1 और 3
(d) 1, 2 और 3
[I.A.S. (Pre) 2010]
उत्तर- (a) केवल 1
- मेल्ट डाउन (Melt down) प्रतिभूतियों एवं बंध-पत्रों (Mortgages)की गिरावट की स्थिति है, जबकि मंदी (Recession), व्यावसायिक एवं औद्योगिक चक्रों के संकुचन की स्थिति है और Slow down आर्थिक क्रियाओं की हासमान स्थिति है।
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19. नीचे दो वक्तव्य दिए है-
कथन (A) : भारतीय आर्थिक नीति की अंदर और बाहर दोनों ओर से अधिकाधिक आलोचना हो रही है।
कारण (R) : आलोचना अधिकांशतः आदर्शों के भेदों पर आधारित है।
नीचे दिए कूट में से सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही हैं, किंतु (A) की सही व्याख्या (R) नहीं है।
(c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
(d) A गलत है, किंतु (R) सही है।
[Uttarakhand P.C.S. (Pre) 2002]
उत्तर- (a) (A) और (R) दोनों सही हैं और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
- भारत द्वारा वर्ष 1991 से नई आर्थिक नीति जो मुख्यतः उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण पर आधारित है, को अपनाए जाने की आलोचना अभी भी जारी है।
- विश्व के विकसित देश नई आर्थिक नीति को समग्र एवं निश्चित समय में न अपनाए जाने के कारण जहां भारत सरकार की आलोचना कर रहे हैं, वहीं भारत के भीतर इसकी आलोचना इस आधार पर भी हो रही है, कि नई आर्थिक नीति के कारण भारत पूंजीवाद का अंगीकरण कर रहा है तथा संविधान में उल्लिखित समाजवाद के पथ से विचलित हो रहा है।
- वस्तुतः ये आलोचनाएं आदर्शों के मतभेदों पर ही आश्रित हैं।
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20. 1991 में नई आर्थिक नीति में अपनाई गई मुख्य रणनीति थी?
(a) उदारीकरण
(b) निजीकरण
(c) वैश्वीकरण
(d) उपर्युक्त सभी
[U. P. P. C. S. (Mains) 2015]
उत्तर- (d) उपर्युक्त सभी
- 1991 में नई आर्थिक नीति में अपनाई गई मुख्य रणनीति उदारीकरण, निजीकरण और वैश्वीकरण थी।
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21. भारत में आर्थिक उदारीकरण (Economic Liberalisation) शुरू हुआ-
(a) औद्योगिक लाइसेंस नीति में वास्तविक बदलाव के साथ
(b) भारतीय रुपये की परिवर्तनशीलता के साथ
(c) प्रत्यक्ष विदेशी पूंजी निवेश में कार्यविधिक औपचारिकताएं दूर करने के साथ
(d) कर-दरों में महत्वपूर्ण कटौती के साथ
[I.A.S. (Pre) 2000]
उत्तर- (a) औद्योगिक लाइसेंस नीति में वास्तविक बदलाव के साथ
- जून, 1991 में नरसिम्हा राव सरकार के सत्ता ग्रहण के पश्चात अपनाई गई नई आर्थिक नीति के तहत उदारीकरण का प्रारंभ 24 जुलाई, 1991 को हुआ।
- 24 जुलाई, 1991 को नई औद्योगिक नीति घोषित हुई। इस नीति में 18 प्रमुख उद्योगों को छोड़कर अन्य सभी उद्योगों को लाइसेंस से मुक्त कर दिया गया।
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22. भारत की व्यावसायिक संरचना के वर्षों बाद भी लगभग वैसा ही बने रहने का एक कारण है-
(a) निवेश का प्रतिमान पूंजी प्रधान उद्योगों की दिशा में उन्मुख रहा है।
(b) कृषि में उत्पादकता इतनी अधिक रही है कि जनता को कृषि में ही बने रहने की प्रेरणा मिली है।
(c) भूधृति (जोत) पर लगी अधिकतम सीमा के कारण अधिक लोगों को भूस्वामित्व मिला है और उन्होंने कृषि में ही बने रहना पसंद किया है।
(d) आर्थिक विकास के लिए कृषि से उद्योग की दिशा में अंतरण के महत्व की जनता को अधिकतर जानकारी नहीं है।
[I.A.S. (Pre) 1995]
उत्तर- (a) निवेश का प्रतिमान पूंजी प्रधान उद्योगों की दिशा में उन्मुख रहा है।
- स्वतंत्रता के बाद भारत के GDP में कई गुना वृद्धि तथा GDP में प्राथमिक, द्वितीयक एवं तृतीयक क्षेत्र के योगदान में वृहत परिवर्तन के बावजूद भारत की व्यावसायिक संरचना कमोबेश स्थिर बनी हुई है।
- इसका प्रमुख कारण निवेश का प्रतिमान पूंजी प्रधान उद्योगों की दिशा की तरफ उन्मुख रहा है।
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23. भारत में अपनाई गई नई आर्थिक नीति के दो घटकों-स्थिरीकरण और संरचनात्मक समायोजन के विषय में निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सही है?
(a) स्थिरीकरण क्रमिक, बहुपद प्रक्रम है, जबकि संरचनात्मक समायोजन त्वरित अनुकूलन मक्रम है।
(b) संरचनात्मक समायोजन क्रमिक, बहुपद प्रक्रम है, जबकि स्थिरीकरण त्वरित अनुकूलन प्रक्रम है।
(c) स्थिरीकरण और संरचनात्मक समायोजन बहुत समान और अनुपूरक नीतियां हैं, उनमें से एक को दूसरी से पृथक करना कतिन है।
(d) स्थिरीकरण का संबंध मुख्यतः ऐसी नीतियों के वर्ग से है जिनका कार्यान्वयन केंद्रीय सरकार करती है, जबकि संरचनात्मक समायोजन का संचालन राज्य सरकारों को करना होता है।
[L.A.S. (Pre) 1996]
उत्तर-(b) संरचनात्मक समायोजन क्रमिक, बहुपद प्रक्रम है, जबकि स्थिरीकरण त्वरित अनुकूलन प्रक्रम है।
- भारत में अपनाई गई नई आर्थिक नीति के दो क्रियात्मक पहलू थे- स्थिरीकरण एवं संरचनात्मक समायोजन।
- स्थिरीकरण अर्थव्यवस्था के मांग पक्ष के प्रबंधन से संबंधित है जिसमें मुद्रास्फीति नियंत्रण, राजकोषीय समायोजन (Fiscal Management) तथा भुगतान संतुलन के क्षेत्रक शामिल हैं।
- संरचनात्मक समायोजन अर्थव्यवस्था के पूर्ति पक्ष के प्रबंधन से संबंधित है जिसमें व्यापार और पूंजी प्रवाह में सुधार, औद्योगिक विनियंत्रण, विनिवेश तथा वित्तीय क्षेत्र सुधार इत्यादि सम्मिलित हैं।
- यद्यपि स्थिरीकरण एवं संरचनात्मक समायोजन एक-दूसरे के पूरक है।
- तथापि संरचनात्मक समायोजन पूर्ति पक्ष से संबंधित होने के कारण स्थिरीकरण की अपेक्षा अधिक समय लेता है।
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24. भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का अग्रदूत (पायनियर) किसको कहा जाता है?
(a) डॉ. मनमोहन सिंह
(b) पी.वी. नरसिम्हा राव
(c) डॉ. बिमल जालान
(d) पी. चिदंबरम
[M.P.P.C.S. (Pre) 2008]
उत्तर-(a) डॉ. मनमोहन सिंह
- भारतीय अर्थव्यवस्था में उदारीकरण वर्ष 1991 से माना जाता है।
- उत्त समय डॉ. मनमोहन सिंह, भारत के वित्त मंत्री थे।
- परिणामतः उन्हें ही भारतीय अर्थव्यवस्था के उदारीकरण का अग्रदूत कहा जाता है।
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25. किसी देश की आर्थिक वृद्धि की सर्वाधिक उपयुक्त माप है-
(a) सकल घरेलू उत्पाद
(b) शुद्ध घरेलू उत्पाद
(c) शुद्ध राष्ट्रीय उत्पाद
(d) प्रति व्यक्ति उत्पाद
[U.P.P.C.S. (Pre) 2013, U.P. Lower Sub. (Pre) 2013, Chhattisgarh P.C.S (Pre) 2015, I.A.S. (Pre) 2001]
उत्तर-(d) प्रति व्यक्ति उत्पाद
- किसी देश की आर्थिक संवृद्धि की सर्वाधिक उपयुक्त माप प्रति व्यक्ति उत्पाद/ प्रति व्यक्ति वास्तविक राष्ट्रीय आय होती है, क्योंकि यह राष्ट्रीय आय की प्रति व्यक्ति उपलब्धता को दर्शाती है।
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26. वर्तमान मूल्यों (Current Prices) पर प्रति व्यक्ति आय (Per Capita Income) की वृद्धि दर (Growth Rate) स्थिर मूल्यों (Constant Prices) पर प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर से अपेक्षाकृत अधिक है, क्योंकि स्थिर मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर में ध्यान रखा जाता है-
(a) जनसंख्या वृद्धि की दर का
(b) मूल्यस्तर की वृद्धि दर का
(c) मुद्राआपूर्ति की वृद्धि दर का
(d) वेतन दर में वृद्धि की दर का
[I. A.S. (Pre) 2000]
उत्तर-(b) मूल्यस्तर की वृद्धि दर का
- वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय में से मूल्यस्तर की वृद्धि दर को घटाने पर स्थिर मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय प्राप्त होती है।
- स्पष्ट है कि वर्तमान मूल्यों पर प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर का मूल्य (Value) स्थिर कीमतों पर प्रति व्यक्ति आय की वृद्धि दर के मूल्य की अपेक्षा अधिक होगा तथा यह अंतर मुद्रास्फीति की दर के मूल्य के बराबर होगा।
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27. 1867-68 में भारत में प्रति व्यक्ति आय 20 रुपये थी, यह सर्वप्रथम अभिनिश्चित किया-
(a) एम. जी. रानाडे ने
(b) सर डब्ल्यू हटर ने
(c) आर. सी. दत्त ने
(d) दादाभाई नौरोजी ने
[L. A.S. (Pre) 2000 U.P.P.C.S. (Pre) 2007 U.P. P.C.S. (Mains) 2013]
उत्तर-(d) दादाभाई नौरोजी ने
- सर्वप्रथम दादाभाई नौरोजी ने राष्ट्रीय आय का आकलन करते हुए 1867-68 ई. में मारत में प्रति व्यक्ति आय 20 रुपये होने का आकलन किया था।
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28. 1949 में भारत सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय आय समिति का अध्यक्ष निम्नलिखित में से कौन था?
(a) सी.आर. राव
(b) पी.सी. महालनोबिस
(c) वी के आर वी राव
(d) के एन राज
[U. P. P. C. S. (Mains) 2015]
उत्तर-(b) पी.सी. महालनोबिस
- वर्ष 1949 में भारत सरकार द्वारा नियुक्त राष्ट्रीय जाय समिति के अध्यक्ष पी.सी. महालनोबिस थे।
- डॉ. डी. बार, गाडगिल तथा वी. के. आर.वी. राव इस समिति के सदस्य थे।
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29. किस अर्थशास्त्री ने भारत में सबसे पहले वैज्ञानिक दृष्टि से राष्ट्रीय आय की गणना की?
(a) डी. आर. गाडगिल
(b) वी. के.आर.वी. राव
(c) मनमोहन सिंह
(d) वाई.वी. अलघ
(c) उपरोक्त में से कोई नहीं। उपरोक्त में से एक से अधिक
[B.P.S.C. (Pre) 2016]
उत्तर-(b) वी. के.आर.वी. राव
- स्वतंत्रता से पूर्व राष्ट्रीय आय के अनुमान का प्रथम प्रयास दादाभाई नौरोजी ने 1868 ई. में किया था, जबकि प्रथम वैज्ञानिक अनुमान वी.के.आर.वी. राव ने किया था।
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30. भारत में पूंजी निर्माण के आंकड़े एकत्रित करने का काम कौन करता है?
(a) भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन
(b) भारतीय रिजर्व बैंक और भारतीय स्टेट बैंक
(c) भारतीय रिजर्व बैंक और सभी वाणिज्यिक बैंक
(d) केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन और राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण
[U.P. Lower Sub. (Pre) 2008]
उत्तर- (a) भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन
- भारत में पूंजी निर्माण के आंकड़े एकत्रित करने का काम भारतीय रिजर्व बैंक और केंद्रीय सांख्यिकीय संगठन द्वारा किया जाता है।
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31. राष्ट्रीय आय लेखांकन में ‘आधार वर्ष’ का अर्थ है –
(a) जिस वर्ष की आय का उपयोग मौद्रिक जी.डी.पी. की गणना के लिए किया जाता है।
(b) जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग मौद्रिक जी.डी.पी. की गणना के लिए किया जाता है।
(c) जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग वास्तविक जी.डी.पी. की गणना के लिए किया जाता है।
(d) जिस वर्ष की आय का उपयोग वास्तविक जी.डी.पी. की गणना के लिए किया जाता है।
[R.A.S./R.T.S. (Pre) 2021]
उत्तर-(c) जिस वर्ष की कीमतों का उपयोग वास्तविक जी.डी.पी. की गणना के लिए किया जाता है।
- राष्ट्रीय आय लेखांकन एक सरकारी बहीखाता पद्धति है जो किसी देश की आर्थिक गतिविधि को मापत्ती है।
- आधार वर्ष एक बेंचमार्क है जिसके संदर्भ में सकल घरेलू बचत, सकल पूंजी निर्माण जैसे राष्ट्रीय खाते के आंकड़ों की गणना किसी निश्चित वर्ष के लिए जाती है।
- वर्तमान में राष्ट्रीय आय के मापन हेतु आधार वर्ष, 2011-12 है।
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32. नई जी.डी.पी. आंकड़ों में आधार वर्ष 2004-05 के स्थान पर बदलकर कर दिया गया है-
(a) 2011-2012
(b) 2010-2011
(c) 2008-2009
(d) 2007-2008
[U. P. P. C. S. (Mains) 2015*]
उत्तर- (a) 2011-2012
- नई जी.डी.पी. आंकड़ों में आधार वर्ष 2004-05 के स्थान पर बदलकर 2011 – 2012 कर दिया गया है।
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33. भारत का आर्थिक सर्वेक्षण, प्रत्येक वर्ष सरकारी तौर पर प्रकाशित किया जाता है-
(a) भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा
(b) भारतीय योजना आयोग द्वारा
(c) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा
(d) भारत सरकार के उद्योग मंत्रालय द्वारा
[I.A.S. (Pre) 1998]
उत्तर-(c) भारत सरकार के वित्त मंत्रालय द्वारा
- भारत के आर्थिक सर्वेक्षण का प्रत्येक वर्ष सरकारी तौर पर प्रकाशन, भारत सरकार के वित्त मंत्रालय के आर्थिक कार्य विभाग द्वारा किया जाता है।
- आर्थिक सर्वेक्षण में अर्थव्यवस्था की नीतिगत समीक्षा प्रस्तुत की जाती है।
- इसमें पिछले वित्तीय वर्ष में अर्थव्यवस्था के प्रदर्शन से संबंधित तथ्य एवं आंकड़े भी संग्रहित होते हैं।
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34. निम्न में से कौन-सा एक आर्थिक वृद्धि का परिचायक है?
(a) वर्ष के दौरान स्थिर कीमतों पर राष्ट्रीय आय में वृद्धि।
(b) वास्तविक प्रत्ति व्यक्ति आय में सुस्थिर वृद्धि।
(c) किसी अवधि में चालू कीमतों पर राष्ट्रीय आय में वृद्धि।
(d) जनसंख्या में वृद्धि के साथ राष्ट्रीय आय में वृद्धि।
[R.A.S/R.T.S. (Pre) 2013]
उत्तर-(b) वास्तविक प्रत्ति व्यक्ति आय में सुस्थिर वृद्धि।
- आर्थिक संवृद्धि से अभिप्राय किसी समयावधि में किसी अर्थव्यवस्था में होने वाली वास्तविक आय की वृद्धि से है।
- सामान्यतया यदि सकल राष्ट्रीय उत्पाद, सकल घरेलू उत्पाद तथा प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि हो रही हो, तो हम कहते हैं कि आर्थिक संवृद्धि हो रही है, परंतु आर्थिक संवृद्धि की माप के लिए प्रति व्यक्ति आय को ही सबसे उपयुक्त माना जाता है।
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35. निम्नलिखित वक्तव्यों पर विचार कीजिए और नीचे दिए कूट से सही उत्तर चुनिए-
कथन (A): आर्थिक विकास के लिए एक बहुआयामी उपागम की आवश्यकता होती है।
कारण (R): वर्तमान भारत सरकार मुख्यतः सूक्ष्म आर्थिक विषयों पर ध्यान केंद्रित कर रही है।
कूट:
(a) (A) बौर (R) दोनों सही है और (R), (A) का सही स्पष्टीकरण है।
(b) (A) और (R) दोनों सही है किंतु (R), (A) का सही स्पष्टीकरण नहीं है।
(c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, किंतु (R) सही है।
[U. P. P. C. S. (Pre) (Re-Exam) 2015]
उत्तर-(c) (A) सही है, किंतु (R) गलत है।
- किसी भी देश के आर्थिक विकास हेतु एक बहुआयामी उपागम की आवश्यकता होती है, जिससे कि समावेशी विकास के लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके।
- अतः कवन (A) सत्य है। वर्तमान भारत सरकार सूक्ष्म (Micro) आर्थिक विषयों के साथ-साथ वृहद (Macro) आर्थिक विषयों पर भी अपना ध्यान केंद्रित कर रही है।
- वृहद आर्थिक विषयों में पालू खाते का घाटा, राजकोषीय घाटा, मुद्रास्फीति, राष्ट्रीय आय, बेरोजगारी दर, भुगतान संतुलन, निवेश में वृद्धि आदि आते हैं।
- सूक्ष्म आर्थिक विषयों के अंतर्गत फर्म, उद्योग, व्यक्ति आदि के उत्पादन, उपभोग, वितरण, मूल्य निर्धारण आदि का अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार कारण (R) गलत है।
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36. निरपेक्ष तथा प्रति व्यक्ति वास्तविक GNP की वृद्धि आर्थिक विकास की ऊंची दर का संकेत नहीं करती, यदि –
(a) औधोगिक उत्पादन कृषि उत्पादन के साथ-साथ बदने में विफल रह जाता है।
(b) कृषि उत्पादन औद्योगिक उत्पादन के साथ-साथ बढ़ने में विकल रह जाता है।
(c) निर्धनता और बेरोजगारी में वृद्धि होती है।
(d) निर्माता की अपेक्षा जावात तेजी से बढ़ते हैं।
[LA.S. (Pre) 2018]
उत्तर-(c) निर्धनता और बेरोजगारी में वृद्धि होती है।
- सकल राष्ट्रीय उत्पाद (GNP) तथा प्रतिव्यक्ति GNP में वृद्धि को आमतौर पर आर्थिक संवृद्धि (Growth) से जोड़कर देखा जाता है. परंतु यह आर्थिक विकास (Development) की सही तस्वीर तब तक प्रस्तुत नहीं करता है जब तक कि इसका प्रभाव सभी व्यक्तियों पर सकारात्मक रूप से न पड़े।
- यदि GNP अधप्रति GNP वृद्धि के साथ-साथ अर्थव्यवस्था में बेरोजगारी और निर्धनता बढ़ रही हो, तो इसका तात्पर्य यह है कि अर्थव्यवस्था में जाय कर संर्वेदन कुछ ही लोगों के पास हो रहा है।
- इसे अर्थव्यवत्त्या में उच्च आर्थिक विकास नहीं माना जा सकता है, क्योंकि इससे सभी लोगों के जीवन की गुणवत में सुधार नहीं होता है।
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37. भारतीय अर्थव्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार करिए-
1. पिछले दशक में वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर लगातार बढ़ती रही है।
2. पिछले दशक में बाजार कीमतों पर (रुपयों में) सकल घरेलू उत्पाद लगातार बढ़ता रहा है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा / से सही है/हैं?
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 और न ही 2
[I.A. S. (Pre) 2015]
उत्तर-(b) केवल 2
- पिछले दशक (2000-2010) के समष्टिगत आर्थिक विश्लेषणों का अध्ययन करने से स्पष्ट है कि इस दौरान सेवाओं और वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि हुई है।
- अतः अवश्यम्भावी रूप से सकल घरेलू उत्पाद भी बढ़ता रहा है, जबकि वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर में उतार-चढ़ाव की प्रवृत्ति रही है।
- अगर वर्तमान आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के आंकड़ों पर गौर किया जाए तो, वर्तमान दशक (2010- 11 से 2020-21) में चालू एवं स्थिर कीमतों पर वृद्धि दर गिरने एवं बढ़ने की रही है। हालांकि गिरावट का रुख अधिक रहा।
- अतः वर्तमान में विकल्प (d) सत्य होगा।
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38. भारत में सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2012-13 के 4.5 प्रतिशत की तुलना में वर्ष 2013-14 में 4.7 प्रतिशत तक बढ़ी जिसका कारण था-
(a) सेवा क्षेत्र में उच्च वृद्धि दर
(b) निर्माण क्षेत्र की उच्च वृद्धि दर
(c) कृषि एवं संबंधित क्षेत्र की उच्च वृद्धि दर
(d) उपरोक्त सभी सही हैं
(e) इनमें से कोई नहीं
[Chhattisgarh P.C.S. (Pre) 2014*]
उत्तर-(c) कृषि एवं संबंधित क्षेत्र की उच्च वृद्धि दर
- आर्थिक समीक्षा, 2013-14 के अनुसार, भारत में सकल घरेलू उत्पाद वर्ष 2012-13 के 4.5% की तुलना में वर्ष 2013-14 में 4.7% तक बढ़ी।
- इसका प्रमुख कारण कृषि एवं संबंधित क्षेत्र की उच्च वृद्धि दर को माना जा सकता है।
- कृषि क्षेत्र में अनुकूल मानसून के कारण 4.7% की वृद्धि दर्ज की गई।
- जो पिछले वर्ष (1.4%) की तुलना में काफी अधिक थी।
- उल्लेखनीय है कि काफी समय (1999-2000 से 2012-13 के दौरान) से कृषि क्षेत्र की वृद्धि दर 3% की औसत दर से बढ़ रही थी।
- आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के अनुसार कृषि एवं संबद्ध क्षेत्र की वृद्धि दर वर्ष 2021-22 (1st A.E.) में 3.9 प्रतिशत अनुमानित है। जबकि वर्ष 2020-21 (P.E.) में यह 3.6 प्रतिशत अनुमानित था।
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39. कथन (A): भारतीय अर्थव्यवस्था में 1997-98 वित्तीय वर्ष में अवसाद की स्थिति है।
कारण (R): निकट भूतकाल में सार्वजनिक निवेश में कमी आई है।
नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर चुनिए:
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
[U.P.P.C.S. (Pre) 1998]
उत्तर-(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं
- वर्ष 1997-98 में भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर 4.3% थी, जो वर्ष 1996-97 में प्राप्त की गई वृद्धि दर (8.0%) की अपेक्षा काफी कम थी।
- पुनः वर्ष 1997-98 में सार्वजनिक क्षेत्र का निवेश वर्तमान बाजार कीमतों पर सकल घरेलू उत्पाद का 6.6% था जो वर्ष 1996-97 के 7.5% तथा वर्ष 1995-96 के 7.7% की अपेक्षा कम था।
- इस प्रकार कथन और कारण दोनों सही है परंतु कारण, कथन की स्पष्ट व्याख्या नहीं कर रहा है।
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40. कथन (A): पिछले 15 वर्षों में भारतीय अर्थव्यवस्था ऊंची औसत सकल राष्ट्रीय उत्पाद वृद्धि दर पर पहुंच गई है।
कारण (R): इस अवधि में बचत अनुपात में निरंतर वृद्धि हुई है।
कूट:
(a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
(b) (A) तथा (R) दोनों सही हैं, परंतु (R), (A) की सही व्याख्या नहीं करता है।
(c) (A) सही है, परंतु (R) गलत है।
(d) (A) गलत है, परंतु (R) सही है।
[U.P.P.C.S. (Pre) 1997]
उत्तर- (a) (A) तथा (R) दोनों सही हैं और (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
- सकल राष्ट्रीय उत्पाद की वृद्धि दर छठी पंचवर्षीय योजना (1980-85) में 5.5% वार्षिक, सातवीं पंचवर्षीय योजना (1985-90) में 5.8% वार्षिक तथा आठवीं पंचवर्षीय योजना (1992-97) में 6.8% वार्षिक रही, जो पूर्व की अवधि में प्राप्त राष्ट्रीय उत्पाद की वृद्धि दर की अपेक्षा ऊंची थी।
- इसी प्रकार वर्ष 1980-81 में बचत दर GDP के 18.9% से बढ़कर वर्ष 1995-96 में GDP का 25.1% हो गया था।
- अतः कथन एवं कारण दोनों सही हैं तथा (R), (A) की सही व्याख्या करता है।
- वर्ष 2000- 2015 की अवधि में भी भारतीय अर्थव्यवस्था की कमोबेश यही स्थिति रही।
- यदि वर्तमान की बात की जाए तो कोविड-19 से पूर्व भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर सबसे तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था रही है।
- जबकि कोविड-19 के समय भारतीय अर्थव्यवस्था की वृद्धि दर में गिरावट दर्ज की गई है।
- वर्तमान वैश्विक संस्थाओं (IMF, World Bank आदि) द्वारा अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, एक बार पुनः भारतीय अर्थव्यवस्था वैश्विक स्तर पर सबसे तीव्र वृद्धि दर हासिल करने वाली अर्थव्यवस्था अनुमानित है।
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41. किस राज्य की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय न्यूनतम आंकी गई है?
(a) बिहार
(b) मध्य प्रदेश
(c) उड़ीसा
(d) उत्तर प्रदेश
[U.P.P.C.S (Pre) 1993, U.P.P.C.S. (Pre) 2008, U.P. Lower Sub. (Pre) 2004]
उत्तर-(c) उड़ीसा
- प्रश्नकाल में विकल्प (c) सही उत्तर था।
- आर्थिक समीक्षा 2021-22 के अनुसार, चालू कीमतों पर वर्ष 2019-20 में विकल्पगत राज्यों की प्रतिव्यक्ति आय निम्न है बिहार (45071 रुपये), मध्य प्रदेश (103288 रुपये), ओडिशा (110434 रुपये) तथा पश्चिम बंगाल (113163 रुपये)।
- जबकि वर्ष 2018-19 में विकल्पगत राज्यों की प्रतिव्यक्ति आय थी, यथा- बिहार (40715), मध्य प्रदेश (90487), ओडिशा (100771), पश्चिम बंगाल (103944)|
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42. निम्न में से किस राज्य में औसत प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक है?
(a) गोवा
(b) पंजाब
(c) महाराष्ट्र
(d) गुजरात
[U.P P.C.S. (Pre) 1994]
उत्तर-(b) पंजाब
- प्रश्नकाल में विकल्प (b) सही उत्तर था।
- आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के अनुसार, वर्ष 2019-20 में देश में गोवा की औसत प्रति व्यक्ति आय सर्वाधिक (435959 रुपये) है, जबकि बिहार की सबसे न्यूनतम (45071 रुपये) है।
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43. भारत में ग्रामीण आय प्रायः नगरीय आय से कम है। इसके लिए निम्नलिखित में से कौन-से कारण जिम्मेदार हैं?
1. किसान बहुत बड़ी संख्या में निरक्षर हैं और वैज्ञानिक कृषि के बारे में उनका ज्ञान नगण्य है।
2. विनिर्मित उत्पादों की तुलना में प्राथमिक उत्पादों का मूल्य कम होता है।
3. उद्योगों में निवेश की तुलना में कृषि में निवेश कम हुआ है।
नीचे दिए हुए कूट की सहायता से सही उत्तर का चयन कीजिए-
कूट :
(a) 1, 2 और 3
(b) 1 और 2
(c) 1 और 3
(d) 2 और 3
[L.A.S. (Pre) 1996]
उत्तर- (a) 1, 2 और 3
- वर्ष 2011 की जनगणनानुसार, भारत की लगभग 69% जनसंख्या गांवों में निवास करती है, जिसका मुख्य व्यवसाय कृषि है।
- उपर्युक्त तीनों विकल्पों के सम्मिलित प्रभाव के कारण कृषि से उत्पन्न आय अपेक्षाकृत कम है।
- यही कारण है, कि ग्रामीण आय, नगरीय आय की अपेक्षा कम है।
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44. ‘पूंजी निर्माण’ के संदर्भ में कौन-सा/से कथन सही है है?
1. पूंजी निर्माण की प्रक्रिया बचतों और वित्तीय संस्थाओं की प्रभाविता पर निर्भर करती है।
2. निवेश पूंजी निर्माण के लिए एक अनिवार्य कारक है। नीचे दिए गए कूट से सही उत्तर को चुनिए।
कूट :
(a) केवल 1
(b) केवल 2
(c) 1 और 2 दोनों
(d) न तो 1 न ही 2
[U.P. P.C.S. (Pre) 2021]
उत्तर-(c) 1 और 2 दोनों
- पूंजी निर्माण (Capital formation) एक शब्द है, जिसका उपयोग किसी विशेष देश के लिए लेखांकन अवधि के दौरान शुद्ध पूंजी संचय वर्णन करने के लिए किया जाता है।
- विश्व बैंक शुद्ध बचत में परिवर्तन का आकलन करके पूंजी निर्माण को मापता है।
- यदि घरेलू बचत दर बढ़ रही है, तो बचतकर्ता अतिरिक्त डॉलर का निवेश कर सकता है और स्टॉक और बॉण्ड खरीद सकता है।
- यदि अधिक परिवार बचत कर रहे हैं, तो देश नकदी अधिशेष की रिपोर्ट कर सकता है, जो पूंजी निर्माण के लिए एक सकारात्मक संकेत है।
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45. भारत म बचत आर पूजा निमाण का ऊचा दर हात हुए मा सवृद्धि दर कम होने का कारण है-
(a) ऊंची जन्म दर
(b) विदेशी सहायता का नीचा स्तर
(c) नीचा पूंजी उत्पाद अनुपात
(d) ऊंचा पूंजी/उत्पाद अनुपात
[I.A.S. (Pre) 1995]
उत्तर-(d) ऊंचा पूंजी/उत्पाद अनुपात
- उत्पादन की एक इकाई प्राप्त करने हेतु लगी पूंजी की मात्रा को पूंजी उत्पाद अनुपात कहते हैं।
- जिस देश में यह अनुपात जितना कम होगा वह देश उतना ही अधिक आर्थिक वृद्धि दर प्राप्त कर सकेगा।
- वहीं अल्पविकसित एवं विकासशील देशों में पूंजी उत्पाद अनुपात काफी ऊंचा रहता है, इसलिए देश की वृद्धि दर नीची रहती है।
- भारत में विकास दर के अपेक्षित स्तर को न प्राप्त कर पाने का एक प्रमुख कारण ऊंचा पूंजी-उत्पाद अनुपात है।
- हालांकि वर्तमान में यदि कोरोना आपदा को छोड़ दिया जाए तो भारत की संवृद्धि दर में वृद्धि देखी जा सकती है लेकिन तुलनात्मक रूप से कम ।
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46. उच्च बचत वाली अर्थव्यवस्था होते हुए भी किस कारण पूंजी निर्माण महत्वपूर्ण उत्पादन वृद्धि में परिणामित नहीं हो पाता है?
(a) कमजोर प्रशासन तंत्र
(b) निरक्षरता
(c) उच्च जनसंख्या घनत्व
(d) उच्च पूंजी-उत्पाद अनुपात
[I.A.S. (Pre) 2018]
उत्तर-(d) उच्च पूंजी-उत्पाद अनुपात
- पूंजी-उत्पाद अनुपात (Capital Output Ratio) किसी अर्थव्यवस्था में एक इकाई उत्पादन हेतु आवश्यक पूंजी की मात्रा को दर्शाता है। जब किसी अर्थव्यवस्था का पूंजी-उत्पाद अनुपात अधिक होता है, तो इसका अर्थ यह होता है कि उत्पादन प्रक्रिया कम दक्ष है।
- अर्थात एक इकाई के उत्पादन हेतु अधिक पूंजी का उपयोग होता है।
- इसके विपरीत निम्न पूंजी-उत्पाद अनुपात उत्पादन प्रक्रिया की दक्षता को दर्शाता है, क्योंकि अब कम पूंजी के प्रयोग द्वारा ही एक इकाई उत्पादित की जा सकती है।
- यदि अर्थव्यवस्था में उच्च पूंजी उत्पाद अनुपात है, तो उस अर्थव्यवस्था में अधिक बचत तथा अधिक निवेश से भी अत्यधिक उत्पादन प्राप्त नहीं हो पाता है, क्योंकि प्रत्येक इकाई के उत्पादन में अधिक पूंजी निवेशित करना होता है।
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47. निम्नलिखित में से कौन-से मुख्य कारणों से भारत में प्रति व्यक्ति आय में वृद्धि की दर धीमी है?
1. उच्च पूंजी-उत्पाद अनुपात
2. जनसंख्या वृद्धि की ऊंची दर
3. पूंजी निर्माण की ऊंची दर
4. वित्तीय घाटे का ऊंचा स्तर
सही उत्तर का चयन नीचे दिए हुए कूटों से कीजिए:
कूट :
(a) 1,2,3 और 4
(c) 1 और 4
(b) 2,3 और 4
(d) 1 और 2
[I.A.S. (Pre) 1993]
उत्तर-(d) 1 और 2
- भारतीय अर्थव्यवस्था में प्रति व्यक्ति आय में धीमी वृद्धि के दो प्रमुख कारण-उच्च पूंजी-उत्पाद अनुपात (Capital Output Ratio) तथा जनसंख्या वृद्धि की ऊंची दर है।
- जनसंख्या की तीव्र वृद्धि के कारण GDP (Gross Domestic Production) में वृद्धि के बावजूद प्रति व्यक्ति आय में उस अनुपात में वृद्धि नहीं हो पाती है।
- पुनः COR ऊंचा होने के कारण प्रति इकाई उत्पादन की लागत बढ़ती है, फलस्वरूप GDP में तीव्र वृद्धि नहीं हो पाती।
- इसकी परिणति प्रति व्यक्ति आय में निम्न वृद्धि के रूप में होती है।
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48. उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय की निम्नता के कारणों के बारे में निम्न कथनों पर विचार कीजिए:
1. तेजी से बढ़ती जनसंख्या
2. साहसीपन का अभाव
3. अपर्याप्त अधोः संरचनात्मक सुविधाएं
4. कृषि का आधुनिकीकरण
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा कथन समूह वर्ग सही है?
(a) 1, 2 तथा 4
(b) 1, 2 तथा 3
(c) 2, 3 तथा 4
(d) 1, 3 तथा 4
[U.P.P.C.S. (Mains) 2005]
उत्तर-(b) 1, 2 तथा 3
- उत्तर प्रदेश में प्रति व्यक्ति आय की निम्नता के प्रमुख कारण कथन 1,2 एवं 3 में दिए गए हैं।
- कथन (4) की विषय वस्तु ‘कृषि का आधुनिकीकरण’ उत्तर प्रदेश की प्रतिव्यक्ति निम्नता हेतु जिम्मेदार नहीं है।
- अतः विकल्प (b) अभीष्ट उत्तर है।
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49. X देश में आर्थिक संवृद्धि अनिवार्य रूप से होगी, यदि-
(a) विश्व अर्थव्यवस्था में तकनीकी प्रगति होती है
(b) X में जनसंख्या वृद्धि होती है
(c) X में पूंजी निर्माण होता है
(d) विश्व अर्थव्यवस्था में व्यापार की मात्रा बढ़ती है
[I.A.S. (Pre) 2013]
उत्तर-(c) X में पूंजी निर्माण होता है
- अर्थशास्त्रियों ने पूंजी निर्माण को आर्थिक संवृद्धि (Economic growth) हेतु सबसे महत्वपूर्ण कारक माना है।
- भारतीय योजना आयोग के अनुसार, “ऊंची उत्पादकता तथा आय और रोजगार के बढ़ते हुए स्तर की वास्तविक कुंजी पूंजी निर्माण की बढ़ती हुई दर है”।
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50. भारत में निकट भविष्य में 8 प्रतिशत या अधिक आर्थिक वृद्धि दर प्राप्त करने में सर्वाधिक सहयोग किस तत्व (कारक) से मिल सकता है?
(a) वस्तु व सेवा कर को बिना विलंब के 1 अप्रैल, 2016 से लागू किया जाए।
(b) देश में श्रम शक्ति का तीव्र गति से कौशल विकास किया जाए।
(c) सभी अवरुद्ध या रुके हुए उत्पादक प्रोजेक्टों का क्रियान्वयन किया जाए।
(d) व्यवसाय-व्यापार करने को आसान बनाने में तेज रफ्तार से वृद्धि की जाए।
[R.A.S./R.T.S. Pre (Re-Exam) 2013]
उत्तर- (a) वस्तु व सेवा कर को बिना विलंब के 1 अप्रैल, 2016 से लागू किया जाए।
- भारत में निकट भविष्य में 8% या अधिक वृद्धि के लिए सर्वाधिक सहयोग सभी अवरुद्ध या रुके हुए उत्पादक प्रोजेक्टों का क्रियान्वयन करके प्राप्त किया जा सकता है।
- हालांकि अन्य कारक जैसे- वस्तु एवं सेवा कर को लागू करके, श्रम शक्ति का कौशल विकास करके और व्यापार की प्रक्रिया को सरल करके भी इसमें दीर्घकाल में वृद्धि की जा सकती है।
- राजस्थान लोक सेवा आयोग द्वारा इस प्रश्न का उत्तर विकल्प (a) दिया गया है, जो सही नहीं है।
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51. निम्नलिखित में से कौन-सा लक्षण भारतीय अर्थव्यवस्था का नहीं है?
(a) श्रम की न्यून कार्यक्षमता
(b) प्रति व्यक्ति कम आय
(c) पूंजी निर्माण की न्यून दर
(d) प्राकृतिक संसाधनों की कमी
[U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004]
उत्तर-(d) प्राकृतिक संसाधनों की कमी
- प्रश्नगत विकल्पों में चौथा विकल्प भारतीय अर्थव्यवस्था का लाक्षणिक गुण नहीं है, जबकि शेष तीनों विकल्प भारतीय अर्थव्यवस्था के लाक्षणिक गुण हैं।
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52. निम्न कारणों में से कौन कारण भारत के प्रति व्यक्ति वास्तविक आय (Per Capita Income) में धीमी बढ़त के लिए मुख्य रूप से उत्तरदायी रहा :
1. जनसंख्या में तेज बढ़त
2. मूल्यों में भारी बढ़त
3. कृषि तथा औद्योगिक क्षेत्रों के विकास में धीमी गति
4. विदेशी विनिमय की अनुपलब्धता
नीचे दिए गए कूट का उपयोग करके सही उत्तर ढूंढें-
कूट :
(a) 1 एवं 2 केवल
(b) 1, 2 एवं 3 केवल
(c) 1 एवं 4 केवल
(d) उपर्युक्त सभी
[U.P.P.C.S. (Pre.) 2001]
उत्तर-(d) उपर्युक्त सभी
- प्रश्नकाल में भारत के प्रति व्यक्ति वास्तविक आय में धीमी बढ़त के लिए उपर्युक्त सभी कारक उत्तरदायी थे।
- परंतु वर्तमान में विदेशी विनिमय की पर्याप्त उपलब्धता है।
- अतः वर्तमान में विकल्प (b) सही उत्तर होगा।
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53. भारत में निम्नलिखित क्षेत्रों में से कौन एक क्षेत्र बचत में सर्वाधिक योगदान करता है?
(a) बैंकिंग तथा वित्तीय क्षेत्र
(b) निर्यात क्षेत्र
(c) घरेलू क्षेत्र
(d) निजी कॉर्पोरेट क्षेत्र
[U.P. U.D.A./L.D. A. (Pre) 2001 U.P.P.C.S. (Mains) 2004]
उत्तर-(c) घरेलू क्षेत्र
- प्रश्नकाल तथा वर्तमान आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के अनुसार भी सकल बचत में सर्वाधिक योगदान घरेलू क्षेत्र का ही है।
- आर्थिक समीक्षा 2021-22 के अनुसार, सकल बचत में सर्वाधिक हिस्सा घरेलू क्षेत्र (19.6%) का है।
- उसके बाद क्रमशः निजी निगम क्षेत्र (10.7%) तथा सार्वजनिक क्षेत्र (1.1%) का हिस्सा है।
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54. भारत में बचत में भागीदारी के संदर्भ में पिछले चार वर्षों के आधार पर निम्नलिखित में से कौन-सा एक कथन सही है?
(a) घरेलू क्षेत्र के वित्तीय एसेट्स की भागीदारी बढ़ी है।
(b) सार्वजनिक क्षेत्र की बचत में भागीदारी बढ़ी है।
(c) कॉर्पोरेट क्षेत्र की बचत में भागीदारी बढ़ी है।
(d) घरेलू क्षेत्र की वित्तीय एसेट्स के रूप में बचत में भागीदारी घटी है।
[U.P.P.C.S. (Spl.) (Mains) 2004]
उत्तर-(c) कॉर्पोरेट क्षेत्र की बचत में भागीदारी बढ़ी है।
- प्रश्नकाल में बचत में भागीदारी के संदर्भ में पिछले चार वर्षों में निजी निगम क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी थी।
- जबकि वर्तमान आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के अनुसार देखा जाए तो विगत चार वर्षों में बचत क्षेत्र में निजी निगम क्षेत्र की भागीदारी घटी है तथा घरेलू क्षेत्र की भागीदारी बढ़ी है।
- सकल घरेलू बचत में सार्वजनिक क्षेत्र के योगदान की प्रवृत्ति घटने-बढ़ने की रही है।
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55. निम्नलिखित में से किस एक का भारत में घरेलू बचतों में सर्वाधिक हिस्सा है?
(a) जमा धनराशियों का
(b) करेंसी का
(c) भौतिक परिसंपत्तियों का
(d) शेयर्स और डिबेंचर्स का
[U.P.P.C.S. (Mains) 2009]
उत्तर-(c) भौतिक परिसंपत्तियों का
- प्रश्नकाल तथा वर्ष 2018-19 में भी भारत में घरेलू बचतों में सर्वाधिक हिस्सा भौतिक परिसंपत्तियों का ही है।
- RBI द्वारा जारी ‘Hand Book of Statistics on the Indian Economy, 2020-21’ के अनुसार, वर्ष 2019-20 में घरेलू बचतों में हिस्सेदारों का क्रम निम्न है- भौतिक परिसंपत्ति > वित्तीय बचतें कम वित्तीय देनदारियां स्वर्ण एवं रजत के आभूषण।
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56. भारत में निम्नलिखित चार प्रमुख क्षेत्रों से बचत का उदय होता है-
1. गृहस्थ
2. निजी निगम क्षेत्र
3. सार्वजनिक निगम एवं अन्य लोक उपक्रम
4. सरकार
नीचे दिए कूट का उपयोग करते हुए उपर्युक्त क्षेत्रों के योगदान का सही अवरोही क्रम इंगित कीजिए-
कूट :
(a) 4,3,2 और 1
(b) 1,3,2 और 4
(c) 1,2,3 और 4
(d) 4,2,3 और 1
[U.P. Lower Sub. (Spl.) (Pre) 1998]
उत्तर-(c) 1,2,3 और 4
- प्रश्नकाल तथा आर्थिक समीक्षा, 2021-22 के अनुसार भी वर्ष 2019-20 में भारत में सकल घरेलू बचत में प्रश्नगत क्षेत्रों के योगदान का अवरोही क्रम है-गृहस्थ क्षेत्र, निजी निगम क्षेत्र तथा सार्वजनिक निगम/लोक उपक्रम एवं सरकारी क्षेत्र।
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