म.प्र. जनगणना 2011

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म.प्र. की जनसंख्या 2011

    • जनगणना एक निश्चित समय पर किसी देश की जनसंख्या, लिंग, घनत्व, साक्षरता, व्यवसाय, जाति, धर्म, आयु आदि से सम्बन्धित आंकड़ों के संग्रहण, संकलन और प्रकाशन की सांख्यिकीय प्रक्रिया है।
    • भारत में जगनणना की शुरूआत की जानकारी ऋग्वेद में भी मिली है। कौटिल्य के ‘अर्थशास्त्र में तत्कालीन नीति निर्धारण के लिए जनसंख्या के आँकड़ों का कुछ सीमित उद्देश्य के लिए एकत्र किए जाने का वर्णन मिलता है।
    • प्राचीनकाल में जनगणना के संदर्भ कौटिल्य व प्लूटानी द्वारा लिखित ग्रन्थों में उल्लिखित है।
    • अबुल फजल द्वारा लिखित ‘आइन-ए-अकबरी’ में भी जनगणना कराए जाने का उल्लेख मिलता है, जिसे एक रात में ही पूरा कर लिया जाता था ।
    • भारत में आधुनिक जनगणना की शुरूआत अंग्रेजों ने 1851-52 में की थी, जब मद्रास प्रांत की जनगणना की गई थी।
    • सम्पूर्ण भारत में तत्कालीन ब्रिटिश सरकार ने 1856 में होम गवर्नमेंट के निर्देशों पर 1861 में जनगणना कराए जाने का विचार किया, लेकिन बाद में इस कार्य को स्थगित कर दिया गया ।
    • पुनः 1865 में भारत की ब्रिटिश सरकार और होम गवर्नमेंट ने तय किया कि 1871 में भारत की जनगणना कराई जाए, जो बाद में 1867 से 1872 तक देश के भिन्न-भिन्न भागों में भिन्न-भिन्न समय पर की गई।
    • आंशिक तौर पर सम्पन्न इस जनगणना को 1872 की जनगणना के नाम से जाना जाता है, हालांकि 1872 की जनगणना सम्पूर्ण भारत में एक ही समय में नहीं हो पाई, लेकिन इसे ही भारत की पहली जनगणना मारजाता है।
  • डल्यू.सी. प्लाउडेन भारत के प्रथम जनगणना आयुक्त थे।
  • प्लाउडेन ने वर्ष 1881 में सम्पूर्ण देश में समकालिक तौर पर जनगणन कराई । अखिल भारतीय पैमाने पर हुई इस पहली वृहद जनगणना है बाद से बगैर किसी बाधा के प्रत्येक दस वर्ष के अंतराल पर जनगणना कार्य किया जाने लगा।
  • भारत में जाति आधारित जनगणना 1881 में शुरू हुई थी और 1931 के बाद इसे समाप्त कर दिया गया।
  • 2011 से एक बार फिर जातीय जनगणना कराने को मंजूरी दी गई।
  • इस प्रकार आधुनिक प्रणाली की प्रथम जनगणना गवर्नर लॉर्ड मेयो के शासनकाल में 1872 में कराई गई, किन्तु विधिवत रूप से नियमित गणना की शुरूआत गवर्नर लॉर्ड रिपन (1880-84) के कार्यकाल में 1881 से शुरू हुई जो वर्तमान तक प्रति दस वर्ष के अन्तराल पर नियमित रूप से जारी है।
  • जनगणना की कार्यप्रणाली निर्धारित करने और इसकी समुचित प्रकार से सम्भावित कराने हेतु जनगणना अधिनियम 1948 बनाया गया ।
  • इसी के तहत जनगणना नियम-1990 (संशोधन 1993) सम्मिलित है। 1948 के अधिनियम के तहत भारत के महारजिस्ट्रार तथा जनगणना आयुक्त की नियुक्ति की जाती है।
  • सम्प्रति भारत के जनगणना आयुक्त सी. चन्द्रमौलि है।
  • म.प्र. के जनगणना आयुक्त सचिन सिन्हा है।

भारतीय जनगणना का संक्रमणकाल

अवस्था दशक विशेषतायें
प्रथम अवस्था (1901-1921) देश की जनसंख्या में धीमी वृद्धिदर रही तथा उच्च जन्मदर के साथ उच्च मृत्यु दर रही।
द्वितीय अवस्था (1921-1951)   जनसंख्या में स्थिर दर से उत्तरोत्तर वृद्धि, मृत्युदर में कमी, अकाल पर नियंत्रण।
तृतीय अवस्था (1951-1981)  जनसंख्या में अत्यधिक तेजी से वृद्धि हुई तथा मृत्युदर में कमी व जन्मदर में स्थिरता रही।
चतुर्थ अवस्था (1981-1921) जनसंख्या बड़ी पर वृद्धिदर में कमी दर्ज की गयी तथा छोटे परिवार की अवधारणा ने जोर पकडा।
  • 1921 को महान विभाजक वर्ष माना जाता है।
  • प्रतिवर्ष लगभग 1.70 करोड़ लोग बढ़ रहे है।
  • वर्ष 2011 की जनगणना का नारा- “हमारी जनगणना हमारा भविष्य” है।

फार्मूले

  • जनसंख्या घनत्व  =  देश या स्थान विशेष की कुल जनसंख्या / देश या स्थान विशेष का कुल क्षेत्रफल
  • लिगानुपात  =  (स्त्रियों की संख्या / पुरूषों की संख्या) * 1000
  • दशकीय वृद्धिदर   =  [(वर्तमान जनसंख्या – पूर्व जनसंख्या) / पूर्व जनसंख्या] * 1000
  • साक्षरता दर: 7 बर्ष और उससे अधिक आयु वाली कुल जनसंख्या में साक्षरों के शतको जनसंख्या की ‘साक्षरता दर’ कहते हैं।

मुख्य तथ्य

  • म.प्र. की प्रथम जनगणना 1881 में हुई मानी जाती है।
  • प्रदेश की 15वीं जनगणना 2011 में हुई।
  • जनगणना कार्य प्रत्येक 10 वर्ष पश्चात् किया जाता है।
  •  बर्ष 2001 की जनगणना 21वीं सदी की प्रदेश की पहली जनगणना है, जबकि 2011 की जनगणना इस सदी की दूसरी जनगणना है ।
  • जनगणना संबंधी कार्य भारत सरकार द्वारा किया जाता है ।
  • जनगणना कार्य जनसंख्या अधिनियम 1948 के अनुसार किया जाता है ।
  • 11 जलाई को विश्व जनसंख्या दिवस मनाया जाता है।
  • साक्षरता दर में 7 वर्ष और उससे अधिक आयु वर्ग के व्यक्तियों को शामिल किया जाता है।
  • 11 मई का दिन म.प्र. की जनसंख्या नियंत्रण दिवस के रूप में मनाया जाता है।
  • विश्व के केवल 18 देशों की जनसंख्या ही म.प्र. से अधिक है।
  • राज्य के 22 जिलों का लिंगानुपात देश के औसत लिंगानुपात (943) से अधिक है।
  • रीवा जिले का लिंगानुपात राज्य के औसत लिंगानुपात 931 के बराबर है।
  • पश्चिम निमाड़ जिले का लिंगानुपात देश के औसत लिंगानुपात 943 के बराबर है।
  • म.प्र. के भिण्ड जिले का जनघनत्व 382 है, जो राष्ट्रीय औसत के बराबर है।

वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आँकड़े (एक नजर में)

वर्ष 2011 में हुई देश की 15वीं जनगणना के अंतिम आँकड़े भारत के जनगणना निदेशालय ने जारी किए | इसी के साथ मध्यप्रदेश की जनगणना के आतिम आँकड़े 10 जून, 2013 को प्रदेश के जनगणना कार्य निदेशालय द्वारा जारी किए गए | मध्यप्रदेश की जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के मुख्य बिन्दु निम्नलिखित हैं

  • जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या 7,26,26,809 है, जिसमें पुरुष जनसंख्या 3,76,12,306 है, जबकि महिला जनसंख्या 3,50,14,503 है।
  • प्रदेश की जनसंख्या देश की कुल जनसंख्या की 6% है।
  • जनगणना 2011 के अंतिम आँकड़ों के अनुसार प्रदेश की जनसंख्या में  0-6 वर्ष तक के बच्चों की संख्या 1,08,09,395 है, जिसमें बालकों की सख्या 56,36,172 है तथा बालिकाओं की संख्या 51,73,223 है।
  • प्रदेश का लिंगानुपात 931 हो गया है, जबकि 2001 में यह 919 (1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) था । इस प्रकार पिछले दशक में प्रदेश के लिंगानुपात अनुपात में 12 अंकों की वृद्धि दर्ज की गई।
  • प्रदेश का सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला बालाघाट (1021) है, जबकि न्यूनतम लिंगानुपात भिण्ड (837) है।
  • प्रदेश का शिशु लिंगानुपात (0-6 वर्ष) 918 है, जो 2001 में 932 था।
  • अंतिम आँकड़ों के अनुसार प्रदेश में शहरी क्षेत्रों के मुकाबले गाँवों में बालिकाओं की संख्या ज्यादा घटी है । गाँवों में वर्ष 2001 में 1000 लड़कों पर 939 लड़कियाँ थीं, जो 2011 में घटकर 923 रह गई है, जबकि शहरों में यह आँकड़ा 907 से घटकर 901 हो गया है।
  • प्रदेश का सर्वाधिक शिशु लिंगानुपात वाला जिला अलीराजपुर (978) है, जबकि न्यूनतम शिशु लिंगानुपात वाला जिला मुरैना (829) है ।
  • जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश का सर्वाधिक जनसंख्या वाला जिला इंदौर (32,76,697) है, जबकि प्रदेश का न्यूनतम जनसंख्या वाला जिला हरदा (5,70,465) है।
  • क्षेत्रफल की दृष्टि से प्रदेश का सबसे बड़ा जिला छिंदवाड़ा है, जिसका क्षेत्रफल 11815 वर्ग किलोमीटर है, जबकि 2691 वर्ग किलोमीटर क्षेत्रफल के साथ दतिया प्रदेश का सबसे कम क्षेत्रफल वाला जिला है।
  • जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश का जनसंख्या घनत्व 236 है । प्रदेश का सर्वाधिक जनघनत्व वाला जिला भोपाल (855) है, जबकि न्यूनतम जनसंख्या घनत्व डिण्डोरी (94) जिले की है।
  • धार्मिक जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश मे धर्म अनुसार जनसंख्या इस प्रकार है – हिन्दू 66007121,मुस्लिम 4774695,ईसाई 213282, सिख 151412,बुद्धिस्ट-216052,जैन 567028अन्य 599594,
  • 2011 की जनगणना के अनुसार म.प्र. का सर्वाधिक जनसंख्या व जिला इंदौर है, जिसकी आबादी 32,76,697 है, जबकि सबसे जनसंख्या निवाड़ी जिले की है, जो 4,01,000 है । (1 अक्टूबर, 20 को निवाड़ी नया जिला बनने के बाद)

लिंगानुपात

2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में प्रति हजार पुरुषों पर हिलाओं की संख्या 931 है अर्थात् म.प्र. का लिंगानुपात 1000 : 931 है, जबकि 2001 की जनगणना में यह आँकड़ा 919 का था । राज्य में सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला बालाघाट है, जहाँ प्रति हजार पुरुषों पर 1021 महिलाएँ – जबकि प्रदेश का भिण्ड जिला न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला है, जिसमें ते हजार पुरुषों पर मात्र 837 महिलाएँ ही हैं । चिन्तनीय पहलू यह है कि प्रदेश 6 वर्ष तक के बच्चों में लिंगानुपात के अंतर में कमी आई है।

जनसंख्या घनत्व

2001 की जनगणना में म.प्र.का जनसंख्या घनत्व 196 था, जा की जनगणना में बढ़कर 236 हो गया । आबादी के मान से प्रदेश का सवा। घनत्व वाला जिला भोपाल (855) है, जबकि सबसे कम जनघनत्व वाला डिन्डोरी(94) है।

साक्षरता

म.प्र. की साक्षरता जहाँ 2001 में 63.7 प्रतिशत थी, वहीं 2011 की यह बढ़कर 69.32 प्रतिशत हो गयी है। इसमें पुरुषों की साक्षरता एव महिलाओं की 59.2 प्रतिशत हो गयी है । इस प्रकार 2001 – साक्षरता दर में 5.62 प्रतिशत का इजाफा हआ है। पुरुषों 79.7 प्रतिशत और महिलाओं में 59.2 प्रतिशत रही। प्रदेश का जबलपुर जिला साक्षरता के साथ शीर्ष पर है, जबकि अलीराजपुर 36.1 प्रतिशत साक्षरता  के साथ सबसे पीछे है ।

जनसंख्या वृद्धि दर

म.प्र.सरकार द्वारा जनसंख्या नियंत्रण की कोशिशों का परिणाम 2011 की जनगणना में जनसंख्या वृद्धि दर में आयी कमी के रूप में दिखलाई दे रहा है। 2001 की जनगणना के मुकाबले 2011 में प्रदेश की जनसंख्या वृद्धि की दर में लगभग चार प्रतिशत की कमी आई है । 2001 में यह 24.3 प्रतिशत थी,जो 2011 में 20.35 प्रतिशत रह गयी है अर्थात् बीते एक दशक में जनसंख्या वृद्धि दर में 3.95 फीसदी की कमी आई है।

म.प्र. के 5 सर्वाधिक जनसंख्या वृद्धि दर वाले जिले –

  •  इंदौर(32.88)
  • झाबुआ(30.70)
  • भोपाल(28.62)
  • सिंगरौली(28.05)
  • बड़वानी(27.7)

म. प्र. के 5 न्यूनतम जनसंख्या वृद्धि दर वाले जिले –

  • अनूपपुर(12.3 )
  • बैतूल(12.9)
  • छिंदवाड़ा(13.1)
  • मंदसौर(13.2)
  • बालाघाट(13.6)

2011 की जनगणना के अनुसार, मध्यप्रदेश की शहरी व ग्रामीण जनसंख्या अनुपात 

  • जनगणना के ताजा अंतिम आँकड़ों के अनुसार, प्रदेश की कुल जनसंख्या 7.27 करोड़ में 5.25 करोड़ लोग ग्रामीण क्षेत्र में निवास करते हैं, जबकि 2 करोड़ लोग शहरों में निवास करते हैं । इस प्रकार पिछले 10 सालों में मध्यप्रदेश के करीब 1.25% लोग गाँवों से निकलकर शहरों में बस गये हैं। इस दौरान प्रदेश में शहरों की संख्या में 82 नगरों का इजाफा हुआ, जबकि 490 गाँव कम हो गये।
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अंतिम आँकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश की कुल जनसंख्या 7,26,26,809 में से 5,25,57,404 ग्रामीण हैं, जबकि 2,00,69,405 लोग शहरी हैं।
  • 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रतिशतता की दृष्टि से राज्यों में 72.37% जनसंख्या ग्रामीण है, जबकि 27.63 प्रतिशत जनसंख्या शहरी है । इसमें ग्रामीण पुरुष 72.2 प्रतिशत व शहरी पुरुष 27.8 प्रतिशत है। वहीं ग्रामीण महिलाएँ 72.6 प्रतिशत व शहरी महिलाएँ 27.4 प्रतिशत है।
  • प्रदेश की दशकीय जनसंख्या वृद्धि दर (2001-2011) 20.35% रही, जिसमें ग्रामीण जनसंख्या की वृद्धि दर 18.42% रही, जबकि शहरी जनसंख्या में यह प्रतिशत 25.69 रहा।
  • मध्यप्रदेश का लिंगानुपात 931 है, जिसमें 936 ग्रामीण लिंगानुपात व 918 शहरी लिंगानुपात है, जबकि प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 918 है, जिसमें 923 ग्रामीण व 901 शहरी हैं।
  • प्रदेश में ग्रामीण साक्षर लोगों की संख्या 2,82,81,986 है, जबकि नगरीय जनसंख्या 1,45,69,183 है ।
  • म.प्र. की ग्रामीण साक्षरता 63.94% है, जबकि प्रदेश की नगरीय साक्षरता 82.85% है।
  • मध्यप्रदेश की कुल पुरुष साक्षरता 78.73% है, जिसमें ग्रामीण पुरुष साक्षरता 74.74% व नगरीय पुरुष साक्षरता 88.67% है, जबकि महिलाओं की कुल साक्षरता 59.2 है, जिसमें ग्रामीण महिला साक्षरता का प्रतिशत 52.4 है और शहरी महिला साक्षरता का प्रतिशत 76.5 है।
  • जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश की कुल जनसंख्या में 14.9% हिस्सा शिशु जनसंख्या का है, जिसमें 15.8% ग्रामीण व 12.38% जनसंख्या शहरी है।

प्रदेश में सर्वाधिक नगरीयकरण प्रतिशत वाले जिले

  1. भोपाल (80.9%)
  2. इंदौर (74.1% )
  3. ग्वालियर(62.7%)
  4. जबलपुर(58.5%)
  5. उज्जैन(39.2%)

अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति संबंधित जनगणना 2011 के मुख्य तथ्य

  • 2011 की जनगणना के अंतिम आँकड़ों के अनुसार मध्यप्रदेश में अनुसूचित जाति की जनसंख्या 1,13,42,320 है, जिसमें 59,08,638 पुरुष तथा 54,33,682 महिलाएँ हैं।
  • प्रदेश की अनुसूचित जाति की संख्या प्रदेश की कुल जनसंख्या का 15.0 प्रतिशत है।
  • प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की जनसंख्या 1,53,16,784 है, जितना से 77,19,404 पुरुष तथा 75,97,380 महिलाएँ हैं।
  • प्रदेश की अनुसूचित जनजाति की संख्या प्रदेश की कुल जनसंख्या 21.1 प्रतिशत है।

सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले जिले

  1. इंदौर
  2. उज्जैन
  3. सागर
  4. मुरैना
  5. छतरपुर

न्यूनतम अनुसूचित जाति जनसंख्या वाले जिले

  1. झाबुआ
  2. अलीराजपुर
  3. डिण्डोरी
  4. छिंदवाड़ा
  5. उमरिया

सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या % वाले जिले

  1. उज्जै न (26.4%)
  2. दतिया(25.5%)
  3. टीकमगढ़(25.0%)
  4. शाजापुर(23.4%)
  5. छतरपुर(23.0%)

न्यूनतम अनुसूचित जाति जनसंख्या % वाले जिले

  1.  झाबुआ(1.7 2%)
  2. अलीराजपुर (3.7% )
  3. मण्डला(4.6%)
  4. डिण्डोरी(5.6%)
  5. बड़वानी (6.3%)

सर्वाधिक अनुसूचित जाति जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर वाले जिले

  1. उमरिया(65.5%)
  2. अनूपपुर (53.8%)
  3. इंदौर (40.4%)
  4. भोपाल(38.5%)
  5. शहडोल(32.9%)

न्यूनतम अनुसूचित जाति जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर वाले जिले

  1. अलीराजपुर(5.1%)
  2.  बैतूल(7.1 %)
  3. बालाघाट(8.1%)
  4. छिंदवाड़ा/सिवनी (8.4%)
  5. बुरहानपुर(14.1%)

 सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले

  1. धार
  2. बड़वानी
  3. झाबुआ
  4. छिंदवाड़ा
  5. खरगोन

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या वाले जिले

  1. भिण्ड
  2. दतिया
  3. मुरैना
  4. मंदसौर
  5. शाजापुर

सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या % वाले जिले

  1. अलीराजपुर(89.0%)
  2. झाबुआ(87.0%)
  3. बड़वानी(69,4%)
  4. डिण्डोरी(64.7%)
  5. मण्डला(57.9%)

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या % वाले जिले

  1. भिण्ड(0.4%)
  2. मुरैना(0.9%)
  3. दतिया(1.9%)
  4. मंदसौर/शाजापुर/उज्जैन(2.5%)
  5. भोपाल(2.9%)

सर्वाधिक अनुसूचित जनजाति जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर वाले जिले

  1. छतरपुर(42.6%)
  2. शिवपुरी(42.0%)
  3. बुरहानपुर(36.8%)
  4. अशोकनगर(35.6%)
  5. खण्डवा(34.9%)

न्यूनतम अनुसूचित जनजाति जनसंख्या दशकीय वृद्धि दर वाले जिले

  1. मंदसौर(-11.8%)
  2.  भिण्ड(-8.8%)
  3. उज्जैन(-8.5%)
  4. शाजापुर(7.2%)
  5. सागर(13.0%)

मध्य प्रदेश में संभागीय जनसंख्या वृद्धि दर (% में) : एक नजर में

जनसंख्या वृद्धि दर प्रतिशत में (2011)

  1. नर्मदापुरम(14.7%)
  2. जबलपुर(15.5%)
  3. उज्जैन(16.8%)
  4. शहडोल(18.4%)
  5. सागर(18.5%)
  6. रीवा(21.5%)
  7. चम्बल(21.7%)
  8. भोपाल(23.0%)
  9. ग्वालियर (23.5%)
  10. इंदौर(26.3%)

धार्मिक जनगणना 2011 के अनुसार प्रदेश मे धर्म अनुसार घटते क्रम में इस प्रकार है

  1. हिन्दू
  2. मुस्लिम
  3. ईसाई
  4. सिख
  5. बुद्धिस्ट
  6. जैन
  7. अन्य

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